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ओडिशा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी उफान पर, धान के खेत डूबे और डूबा किसानों का कर्जछत्तीसगढ़
7 अक्तू॰ 2026, 8:40 pm (22 मिनट पहले)· 0

ओडिशा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी उफान पर, धान के खेत डूबे और डूबा किसानों का कर्ज

कालाहांडी बांध के फाटक खुलने से इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई और गांवों का संपर्क टूट गया।

ओडिशा के कालाहांडी स्थित बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी में अचानक उफान आ गया है। बारिश थमने के बावजूद बांध के गेट खोले जाने की वजह से नदी का पानी तटवर्ती इलाकों के खेतों में भर गया, जिसके चलते किसानों की तैयार धान की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं। कई गांवों के खेतों में पिछले दो से तीन दिनों से लगातार पानी जमा है, जिससे धान के पौधों के पूरी तरह सड़ने और नष्ट होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

कर्ज में डूबे किसानों पर फसल बर्बादी का दोहरा संकट

इस अप्रत्याशित बाढ़ ने उन किसानों की कमर तोड़ दी है जिन्होंने बैंकों और सहकारी संस्थाओं से कर्ज लेकर खेती की तैयारी की थी। काश्तकारों का कहना है कि यदि खेतों में जमा यह पानी अगले एक या दो दिन और नहीं उतरा, तो खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। कुछ किसानों के मुताबिक उनकी मेहनत पहले ही पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। अब उन्हें बैंक और लैम्प्स से लिए गए कर्जे की अदायगी की गहरी चिंता सता रही है, क्योंकि कमाई का पूरा दारोमदार इसी धान की उपज पर टिका हुआ था।

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प्रभावित किसानों की जुबानी नुकसान का ब्योरा

नुकसान झेल रहे किसान चैत सिंह कश्यप ने बताया कि उन्होंने लगभग पांच एकड़ जमीन पर रोपा धान बोया था, जो अब इंद्रावती नदी के सैलाब में समा चुका है। उन्होंने अपनी इस खेती के लिए बैंक से तकरीबन एक लाख रुपये का कर्ज उठाया था। इसी तरह घाटकवाली गांव के किसान जयराम की करीब साढ़े तीन एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब चुकी है। जयराम ने इस खेती में लगभग एक लाख रुपये की लागत लगाई थी और लैम्प्स समिति से करीब 45 हजार रुपये का ऋण लिया था। एक अन्य किसान सुनील कुमार नाग ने बताया कि उन्होंने खेती और खाद की व्यवस्था जुटाने के लिए लगभग दो लाख रुपये का कर्ज लिया था, मगर अब उनके खेत का आधा हिस्सा जलमग्न हो चुका है।

सड़कें कटीं, जिला मुख्यालय से कई गांवों का संपर्क बाधित

नदी के तेज बहाव और लगातार जलभराव का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा है। कई प्रमुख सड़कें और संपर्क मार्ग पानी में डूबने अथवा क्षतिग्रस्त होने से अनेक गांवों का सीधा संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। इस रुकावट के चलते ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन, जरूरी सामान की आपूर्ति और आपातकालीन यात्राओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सवाल-जवाब

बारिश रुकने के बाद भी इंद्रावती नदी में पानी क्यों बढ़ गया?
ओडिशा के कालाहांडी में बने बांध के गेट खोले जाने की वजह से इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया।
खेतों में कितने दिनों से पानी भरा हुआ है?
किसानों के खेतों में पिछले दो से तीन दिनों से लगातार पानी भरा हुआ है।
किसान चैत सिंह कश्यप को कितना नुकसान हुआ है?
चैत सिंह कश्यप की करीब पांच एकड़ में लगी रोपा धान की फसल डूब गई है, जिसके लिए उन्होंने बैंक से लगभग एक लाख रुपये का कर्ज लिया था।
घाटकवाली के किसान जयराम ने कितना कर्ज लिया था?
किसान जयराम ने लैम्प्स से करीब 45 हजार रुपये का कर्ज लिया था और खेती में लगभग एक लाख रुपये खर्च किए थे।
किसान सुनील कुमार नाग की कितनी फसल प्रभावित हुई है?
सुनील कुमार नाग ने खेती और खाद के लिए लगभग दो लाख रुपये का कर्ज लिया था और अब उनके खेत का आधा हिस्सा जलमग्न हो चुका है।
बाढ़ और जलभराव का ग्रामीण इलाकों पर क्या असर पड़ा है?
कई प्रमुख रास्ते प्रभावित होने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कट गया है, जिससे आवागमन ठप हो गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·3 मिनट पहले

सिर्फ पैंतालीस हजार के कर्ज के लिए जयराम की साढ़े तीन एकड़ फसल डूब गई, सोचकर ही डर लगता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 मिनट पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। पिछले साल जब हमारी बीहड़ कवरेज के दौरान अचानक पानी बढ़ा था, तो किसानों का रोना मुझसे देखा नहीं गया था।

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