अंबाला के चंद्रपुरी इलाके की एक शांत गली में अब दिल दहला देने वाला सन्नाटा पसरा हुआ है, जहां कभी कुत्तों के भौंकने की गूंज हुआ करती थी। घर की भौतिक बनावट में कोई बदलाव नहीं आया है—दरवाजा अपनी जगह पर है, आंगन भी वैसा ही दिखता है, और कोने में रखी खाने की दर्जनों कटोरियां आज भी कतार में लगी हैं। हालांकि, इस घर की आत्मा अब जा चुकी है। यहां रहने वाले 43 बेसहारा कुत्ते उस परिचित कदमों की आहट का अंतहीन इंतजार कर रहे हैं, जिसने उन्हें जीवनदान दिया था। यह एक भीषण सड़क हादसे के बाद की दर्दनाक सच्चाई है, जिसने न सिर्फ एक इंसान की जान ले ली, बल्कि दर्जनों बेजुबान जानवरों को पूरी तरह से अनाथ कर दिया है। निकिता, जिन्हें उनके करीबी प्यार से निक्की बुलाते थे, ने अपना पूरा जीवन अपने घर को घायल, बीमार और बेसहारा सड़क के कुत्तों के लिए एक सुरक्षित आश्रय में बदलने के लिए समर्पित कर दिया था। जहां आम लोग एक घायल जानवर को देखकर मुंह फेर लेते थे, वहीं निकिता को उनके भीतर धड़कती हुई जान नजर आती थी।
पशु कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित घर
इन बेजुबानों के प्रति निकिता का समर्पण सिर्फ उन्हें खाना खिलाने तक सीमित नहीं था। उन्होंने बहुत ही व्यवस्थित तरीके से अपने परिवार के निजी घर को एक पूरी तरह से काम करने वाले पशु शेल्टर में बदल दिया था। त्याग की एक असाधारण मिसाल पेश करते हुए, परिवार ने अपने रहने के लिए सिर्फ एक-एक कमरा ही अपने पास रखा था, और घर का बाकी पूरा हिस्सा बचाए गए कुत्तों के रहने के लिए सौंप दिया था। इन जानवरों के रहने की व्यवस्था बेहद आरामदायक और सावधानीपूर्वक बनाई गई थी। गर्मियों की भीषण तपिश को ध्यान में रखते हुए, कुत्तों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष रूप से एसी लगवाए गए थे। साफ-सफाई बनाए रखने और चौबीसों घंटे देखभाल सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को काम पर रखा गया था। उनके खान-पान की व्यवस्था भी उतनी ही शानदार थी; लकवाग्रस्त और गंभीर रूप से घायल कुत्तों के लिए, जिन्हें अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती थी, हर दूसरे दिन पनीर मंगवाने का खास इंतजाम किया गया था। इसके अलावा, एक बड़ी संख्या में मौजूद कुत्तों का पेट भरने के लिए पास के एक डिलीवरी किचन से रोजाना लगभग 100 रोटियां आती थीं। पड़ोसियों के अनुसार, उच्च गुणवत्ता वाले भोजन, चिकित्सा उपचार और आवश्यक दवाइयों सहित इस व्यापक देखभाल व्यवस्था को चलाने पर रोजाना चार से पांच हजार रुपये का भारी खर्च आता था।
आधी रात के बचाव अभियान और अटूट करुणा
निकिता के समर्पण का मतलब था कि वह किसी भी जानवर के संकट में होने पर हमेशा तैयार रहती थीं। उनकी करुणा की कोई सीमा या समय नहीं था। इस इलाके के स्थानीय निवासी बंसीलाल ने उनकी इस अथक दिनचर्या को बहुत करीब से देखा था। उन्होंने बताया कि जब भी निकिता को आसपास कहीं भी किसी घायल जीव के मिलने की सूचना मिलती थी, तो वह तुरंत अपनी गाड़ी लेकर उस जगह पहुंच जाती थीं। आधी रात के समय भी आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान करने या सड़कों पर तड़प रहे किसी कुत्ते को बचाने के लिए निकल पड़ना उनके लिए कोई असामान्य बात नहीं थी। चाहे उन्हें ऐसा कुत्ता मिले जिसके घावों में कीड़े पड़ गए हों और उसे गहन इलाज की जरूरत हो, या कोई भूखा बेसहारा जीव जो एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहा हो, वह उन्हें घर ले आती थीं और अपने हाथों से उनकी देखभाल करके उन्हें वापस स्वस्थ बनाती थीं।
भयानक सड़क हादसा और उसके बाद के हालात
करुणा का यह अद्भुत सफर 13 जुलाई को अचानक और दुखद रूप से रुक गया। साहा के पास हुए एक भयानक सड़क हादसे में निकिता की जान चली गई, जिसने उन जानवरों की किस्मत को हमेशा के लिए बदल दिया जिनकी वह इतनी ममता से रक्षा करती थीं। इन जानवरों पर पड़ा भावनात्मक प्रभाव बेहद दर्दनाक है। उनके निधन के बाद से कई कुत्तों ने पूरी तरह से खाना-पीना छोड़ दिया है और वे दुख तथा उलझन में डूब गए हैं। वे बेहद सतर्क रहते हैं, और किसी भी तरह की आहट होने पर तुरंत मुख्य दरवाजे की तरफ दौड़ पड़ते हैं, इस उम्मीद में कि शायद वह वापस आ गई हैं।
आर्थिक संकट और गोद लेने की अपील
उनके अचानक चले जाने से, इस आश्रय स्थल की देखभाल करने की भारी जिम्मेदारी पूरी तरह से उनके शोक संतप्त परिवार के कंधों पर आ गई है। उनकी बहन आशा ने बताया कि निकिता कई वर्षों से घायल कुत्तों की सेवा कर रही थीं और घर पर ही उनका इलाज कर रही थीं। अब 40 से 50 कुत्तों की देखभाल की पूरी जिम्मेदारी परिवार पर आ गई है। हालांकि, हजारों रुपये का दैनिक खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं है, जिसके कारण परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते लंबे समय तक शेल्टर को चलाना व्यावहारिक रूप से असंभव हो गया है। इस आसन्न संकट को देखते हुए, स्थानीय समुदाय के लोग और पशु कल्याण संगठन मदद के लिए आगे आए हैं। वंदे मातरम संस्था ने इन कुत्तों को अन्य स्थापित शेल्टरों और देखभाल करने वाले परिवारों में स्थानांतरित करने तथा गोद लेने की एक व्यापक प्रक्रिया शुरू की है। वंदे मातरम दल के सदस्य सौरभ ने बताया कि उनका संगठन कई वर्षों से घायल जीवों का मुफ्त चिकित्सा उपचार कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निकिता के शेल्टर के सभी कुत्तों के लिए सुरक्षित और स्थायी घर सुनिश्चित करने के लिए अब एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। संगठन सक्रिय रूप से सक्षम और दयालु लोगों से अपील कर रहा है कि वे आगे आएं, इन बेजुबान अनाथों को गोद लें और उन जिंदगियों को बचाने में मदद करें जिनकी रक्षा के लिए निकिता ने इतनी कड़ी मेहनत की थी।



















