मूलांक 1 राशिफल 29 अक्टूबर: सूर्य की ऊर्जा से चमकेगा करियर, रचनात्मकता देगी लाभरिपब्लिकन पार्टी की आखिरी हफ्तों में बढ़ी चिंता, मजबूत सीटों पर भी करनी पड़ रही है पैसों की बारिशनागालैंड की मतदाता सूची पर विवाद, 1.57 लाख से अधिक नामों में गड़बड़ी का आरोपराजस्थान के झालावाड़ में दंपति के झगड़े में दखल देना पड़ा महंगा, चचेरे भाइयों पर चाकू से जानलेवा हमलाबिहार विधानपरिषद चुनाव में नीरज कुमार की जीत, अनंत सिंह पर कसा तंजत्रिपुरा में जल्द खुलेगा नया चाय नीलामी केंद्र, मुख्यमंत्री माणिक साहा 29 अक्टूबर को करेंगे शुभारंभमहिला पहलवानों की अपील पर कोर्ट सख्त, बृजभूषण शरण सिंह को जवाब के लिए मिला अंतिम अवसरमहाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव परिणाम: बीजेपी ने जीती पुणे शिक्षक सीट, दो क्षेत्रों में शरद पवार गुट को बढ़तभीलवाड़ा में संपत्ति के लिए 72 वर्षीय कमला देवी की हत्या, शव जलाकर नदी में बहाए अवशेष; दो गिरफ्तारमिजो विरासत को सहेजने के लिए खुला मिजोरम स्टेट म्यूजियम, मंत्री सी. लालसाविवुंगा ने युवाओं से की खास अपील
अयोध्या राम मंदिर दान गबन कांड: तीन और आरोपियों को राहत नहीं, निचली अदालत से अर्जी खारिज होने पर अब जाएंगे उच्च न्यायालयउत्तर प्रदेश
23 सित॰ 2026, 9:27 am (36 दिन पहले)· 6

अयोध्या राम मंदिर दान गबन कांड: तीन और आरोपियों को राहत नहीं, निचली अदालत से अर्जी खारिज होने पर अब जाएंगे उच्च न्यायालय

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की जमानत याचिकाएं खारिज हो गई हैं, जिसके बाद अब वे राहत के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।

अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए दान गबन प्रकरण में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। परिसर में चढ़ावा राशि में हेरफेर करने के आरोप में न्यायिक हिरासत में चल रहे तीन अभियुक्तों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को अदालत से बड़ा झटका लगा है। संबंधित न्यायालय ने 22 सितंबर को दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद तीनों की नियमित जमानत अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया। इस अदालती आदेश के सामने आने के बाद अब आरोपियों का कानूनी पक्ष राहत पाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है।

अदालत में दलीलें खारिज, अब उच्च न्यायालय में अपील की तैयारी

आरोपियों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता कुल शेखर सिंह ने पूरे अदालती घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की तरफ से दाखिल की गई जमानत अर्जियों पर 22 सितंबर को अदालत के समक्ष सुनवाई पूरी हुई थी। अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों ने अपने-अपने तर्क पेश किए, लेकिन अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। अधिवक्ता कुल शेखर सिंह के अनुसार, निचली अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद वे लोग इन तीनों अभियुक्तों की रिहाई के लिए अब सीधे हाई कोर्ट में जमानत याचिकाएं दाखिल करने जा रहे हैं।

पहले भी तीन अन्य अभियुक्तों को नहीं मिली थी कोई राहत

इस पूरे प्रकरण में शामिल अन्य आरोपियों को भी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कोई ढील नहीं मिली है। कुल शेखर सिंह ने बताया कि इससे एक दिन पहले, यानी 21 सितंबर 2026 को तीन अन्य आरोपियों अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और राम शंकर मिश्रा की जमानत याचिकाएं भी अदालत द्वारा खारिज कर दी गई थीं। जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और कथित संलिप्तता के चलते अदालत ने इन सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ही रखने का निर्णय सुनाया था।

शेष दो आरोपियों की याचिकाओं पर आज सुनवाई

इस बड़े गबन कांड में कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से छह की याचिकाएं अब तक नामंजूर की जा चुकी हैं। मामले में बचे हुए दो अन्य आरोपियों सुभाष चंद और टिन्नू यादव की जमानत याचिकाओं पर 23 सितंबर को अदालत में सुनवाई तय की गई है। बचाव पक्ष के वकील का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों और पूर्व के फैसलों को देखते हुए इनकी याचिकाएं भी खारिज होना लगभग तय माना जा रहा है। अधिवक्ता के अनुसार, यदि यहां से भी राहत नहीं मिलती है, तो सभी आठों आरोपी संयुक्त रूप से अथवा अलग-अलग अपनी जमानत याचिकाएं हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

दान में हेरफेर से जुड़ा है पूरा मामला और जांच

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान की धनराशि में सेंधमारी का यह पूरा मामला साल 2026 के दौरान सामने आया था, जिसने पूरे देश में व्यापक हलचल मचा दी थी। प्राथमिक जांच के दौरान यह बात उजागर हुई थी कि मंदिर परिसर में तैनात सेवादारों ने दान में आई बड़ी धनराशि को गायब कर दिया था। जांच एजेंसियों ने छानबीन के दौरान कई सेवादारों के पास से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद की थी, जिसके बाद संदिग्धों की गिरफ्तारी की गई थी। इस मामले को लेकर विपक्ष ने भी सत्ताधारी बीजेपी पर कड़े राजनीतिक हमले बोले थे।

मामले के सार्वजनिक होने और विवाद गहराने के बाद मंदिर प्रबंधन से जुड़े शीर्ष पदाधिकारियों पर भी गाज गिरी थी, जिसके चलते ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद मंदिर की व्यवस्थाओं को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से राम मंदिर ट्रस्ट के लिए नए CEO की नियुक्ति की गई है। इस पूरे वित्तीय घोटाले की जांच के लिए गठित SIT ने अपनी जांच प्रक्रिया पूरी कर ली है और 25 सितंबर तक मामले में आरोप पत्र दाखिल किए जाने की पूरी संभावना है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

किन आरोपियों की जमानत याचिकाएं 22 सितंबर को खारिज हुईं?
अदालत ने अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे की नियमित जमानत याचिकाएं 22 सितंबर को खारिज कर दीं।
निचली अदालत से झटका लगने के बाद बचाव पक्ष का क्या कदम होगा?
आरोपियों के वकील कुल शेखर सिंह के अनुसार, वे सभी आरोपियों के लिए अब सीधे हाई कोर्ट में जमानत याचिकाएं दाखिल करेंगे।
इससे पहले किन आरोपियों की जमानत अर्जी रद्द की गई थी?
21 सितंबर 2026 को अदालत ने तीन अन्य आरोपियों अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और राम शंकर मिश्रा की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं।
बाकी बचे दो आरोपियों की सुनवाई कब होनी है?
मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों सुभाष चंद और टिन्नू यादव की जमानत याचिकाओं पर 23 सितंबर को सुनवाई निर्धारित है।
राम मंदिर ट्रस्ट में इस विवाद के बाद क्या प्रशासनिक बदलाव हुए?
महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद मंदिर प्रबंधन के लिए नए सीईओ की नियुक्ति की गई है।
एसआईटी इस मामले में अपनी चार्जशीट कब तक दाखिल कर सकती है?
एसआईटी द्वारा जांच पूरी कर ली गई है और 25 सितंबर तक अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए जाने की पूरी उम्मीद है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·35 दिन पहले

दान के पैसों में हेरफेर करने वालों के लिए कोर्ट के दरवाजे अब एक-एक करके बंद हो रहे हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·35 दिन पहले

राम मंदिर के दान में ऐसा गबन करने की हिम्मत कैसे हो गई इन लोगों की? अब हाई कोर्ट से इन्हें क्या ही राहत मिलेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·35 दिन पहले

अर्जुन जी, वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में शुरुआती दौर में जमानत मिलना वैसे भी मुश्किल होता है, फिर चाहे मामला किसी ट्रस्ट का हो या कॉर्पोरेट का।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 दिन पहले

राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर दान गबन का मामला बेहद संवेदनशील है। निचली अदालत से राहत न मिलना साफ संकेत है कि जांच एजेंसी के पास मजबूत सबूत हैं, अब सबकी नजरें हाई कोर्ट पर टिकी हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·35 दिन पहले

करण, बिल्कुल सही कहा आपने। जब निचली अदालत से लगातार जमानत खारिज हो रही है, तो हाई कोर्ट में भी इनके लिए राह आसान नहीं होगी।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp