मूलांक 1 राशिफल 29 अक्टूबर: सूर्य की ऊर्जा से चमकेगा करियर, रचनात्मकता देगी लाभरिपब्लिकन पार्टी की आखिरी हफ्तों में बढ़ी चिंता, मजबूत सीटों पर भी करनी पड़ रही है पैसों की बारिशनागालैंड की मतदाता सूची पर विवाद, 1.57 लाख से अधिक नामों में गड़बड़ी का आरोपराजस्थान के झालावाड़ में दंपति के झगड़े में दखल देना पड़ा महंगा, चचेरे भाइयों पर चाकू से जानलेवा हमलाबिहार विधानपरिषद चुनाव में नीरज कुमार की जीत, अनंत सिंह पर कसा तंजत्रिपुरा में जल्द खुलेगा नया चाय नीलामी केंद्र, मुख्यमंत्री माणिक साहा 29 अक्टूबर को करेंगे शुभारंभमहिला पहलवानों की अपील पर कोर्ट सख्त, बृजभूषण शरण सिंह को जवाब के लिए मिला अंतिम अवसरमहाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव परिणाम: बीजेपी ने जीती पुणे शिक्षक सीट, दो क्षेत्रों में शरद पवार गुट को बढ़तभीलवाड़ा में संपत्ति के लिए 72 वर्षीय कमला देवी की हत्या, शव जलाकर नदी में बहाए अवशेष; दो गिरफ्तारमिजो विरासत को सहेजने के लिए खुला मिजोरम स्टेट म्यूजियम, मंत्री सी. लालसाविवुंगा ने युवाओं से की खास अपील
बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद की वापसी, मायावती ने फिर सौंपी राष्ट्रीय संयोजक की कमानउत्तर प्रदेश
5 अक्तू॰ 2026, 6:40 pm (23 दिन पहले)· 0

बहुजन समाज पार्टी में आकाश आनंद की वापसी, मायावती ने फिर सौंपी राष्ट्रीय संयोजक की कमान

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को दोबारा बहुजन समाज पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने का फैसला किया है। संगठन में अनुशासन और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को संगठन में वापस लेते हुए उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय संयोजक की अहम जिम्मेदारी सौंप दी है। हाल के दिनों में पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और संगठन को नए सिरे से साधने के इरादे से कई कड़े निर्णय लिए गए थे, जिसके बाद अब आकाश आनंद को दोबारा मुख्य धारा में शामिल किया गया है।

आदर्शों और आगामी चुनावी तैयारियों का दिया हवाला

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार बयानों के जरिए इस बड़े फैसले की पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और उनके प्रमुख अनुयायी मान्यवर कांशीराम के त्याग, कड़े संघर्ष और उच्च आदर्श पार्टी के लिए हमेशा से प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। इन्हीं सिद्धांतों के बल पर बहुजन समाज पार्टी ने देश की सियासत में ऐतिहासिक सफलताएं दर्ज की हैं। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव को ध्यान में रखकर सर्वसमाज को साथ जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं, जिसके लिए संगठन का एकजुट और मजबूत होना आवश्यक माना गया है।

अनुशासन और परिवार को लेकर रुख किया स्पष्ट

पार्टी की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि उनका कोई निजी दायरा नहीं है, बल्कि पूरा बहुजन समाज ही उनका विराट परिवार है। समाज का हित और कल्याण उनके लिए हमेशा सर्वोपरि रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि संगठन में अनुशासन कायम रखना सबसे जरूरी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी नीति के तहत पिछले कुछ दिनों के दौरान कई सख्त कदम उठाए गए थे। मायावती ने साफ तौर पर कहा कि अनुशासन के मामले में उनके अपने भाई-बहन या परिवार के अन्य सदस्य कभी अपवाद नहीं रहे हैं और यह बात पूरी तरह से जगजाहिर है।

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास और आकाश के बदले व्यवहार पर चर्चा

आकाश आनंद की भूमिका की समीक्षा करते हुए मायावती ने उल्लेख किया कि वैसे तो पार्टी में उनका व्यक्तित्व काफी हद तक ठीक रहा है, लेकिन अतीत में कुछ ऐसी परिस्थितियां बनी थीं जिनकी वजह से संगठनात्मक ढांचे में कई बदलाव करने पड़े। उन्हीं घटनाक्रमों के चलते अंततः आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। मायावती के अनुसार, इस पूरे प्रकरण के बाद लोगों ने आकाश आनंद के व्यक्तित्व और कार्यशैली में काफी बदलाव महसूस किया है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर माफी मांगते हुए पार्टी में सेवा का अवसर मांगने वाली आकाश की पोस्ट ने भी इस बदलाव को प्रमाणित किया, जिसकी राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा रही। इससे पूर्व मायावती ने यह टिप्पणी भी की थी कि आकाश आनंद अभी भी अपने दिमाग से काम नहीं कर रहे हैं, जिसके बाद आकाश ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सार्वजनिक तौर पर पार्टी में लौटने की गुहार लगाई थी।

परिवार और पार्टी कार्यकर्ताओं की सहमति से बना फैसला

संगठन के भीतर रायशुमारी का जिक्र करते हुए मायावती ने बताया कि पार्टी के अधिकांश नेताओं और कार्यकर्ताओं का यही रुख था कि आकाश आनंद के अनुरोध को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्हें पहले सौंपी गई जिम्मेदारियों के साथ दोबारा कार्य करने का मौका देने की पैरवी की गई थी। इस फैसले पर आकाश आनंद के पिता आनंद कुमार और उनके छोटे भाई ईशान आनंद ने भी पूरी सहमति जताई। ईशान आनंद ने मिशनरी भावना पेश करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि वे संगठन में किसी भी औपचारिक पद के बिना बहनजी के दिशा-निर्देशों में काम करने को तैयार हैं और जो भी काम उन्हें सौंपा जाएगा, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे।

राष्ट्रीय संयोजक पद की जिम्मेदारी और भविष्य की उम्मीदें

गहन विचार-विमर्श के बाद बहुजन समाज पार्टी और आंदोलन के व्यापक हित को देखते हुए आकाश आनंद को पुनः राष्ट्रीय संयोजक बनाने का अंतिम निर्णय लिया गया। मायावती ने उम्मीद जताई कि अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद अब पार्टी का कामकाज सुचारू रूप से आगे बढ़ेगा और संगठन में बार-बार फेरबदल करने की नौबत नहीं आएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि व्यवस्था का सुचारू संचालन बहुत हद तक खुद आकाश आनंद के आचरण और कार्यशैली पर निर्भर करेगा। अंत में मायावती ने आकाश आनंद के उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की कामना करते हुए उन्हें, उनके छोटे भाई ईशान आनंद और पिता आनंद कुमार को अपना आशीर्वाद दिया, साथ ही हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने वाले बहुजन समाज के समर्थकों और शुभचिंतकों का आभार जताया।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

बसपा में वापसी के बाद आकाश आनंद को कौन सा पद दिया गया है?
मायावती ने आकाश आनंद को पुनः बहुजन समाज पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) नियुक्त किया है।
आकाश आनंद की वापसी का फैसला किन चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया है?
यह फैसला आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा आम चुनाव की तैयारियों और संगठन को मजबूत करने के मद्देनजर लिया गया है।
आकाश आनंद की वापसी में किन पारिवारिक सदस्यों की सहमति रही?
उनके पिता आनंद कुमार और छोटे भाई ईशान आनंद दोनों ने इस फैसले पर अपनी पूरी सहमति जताई।
ईशान आनंद ने पार्टी में काम करने को लेकर क्या कहा?
ईशान आनंद ने कहा कि वे बिना किसी पद के मायावती के दिशा-निर्देशन में पूरी निष्ठा और ईमानदारी से सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाएंगे।
मायावती ने पार्टी के आंतरिक बदलावों के संदर्भ में अशोक सिद्धार्थ के बारे में क्या बताया?
मायावती ने बताया कि पूर्व की परिस्थितियों के चलते आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·23 दिन पहले

परिवार और राजनीति का रिश्ता हमेशा पेचीदा होता है, जहाँ सुधार की गुंजाइश और गलतियों से सीखना बहुत जरूरी है। जब अपनों को भी नियमों के दायरे में रखा जाता है, तभी रिश्ते और संगठन दोनों मजबूत होते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 दिन पहले

मुझे थोड़ा शक है कि इतनी जल्दी सब ठीक हो गया होगा। राजनीति में परिवार और अनुशासन का यह मेल संभालना मायावती के लिए भी आसान नहीं रहने वाला है।

Ravikash Gupta@ravikash·23 दिन पहले

अर्जुन, बात तो सही है आपकी। यूपी चुनाव सिर पर हैं, इसलिए मायावती को यह कदम उठाना ही पड़ा ताकि पार्टी में जोश आए।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

लखनऊ में बसपा दफ्तर के बाहर जब भी जाते थे, आकाश और उनके ससुर का दबदबा साफ़ दिखता था। अब बहनजी ने तेवर दिखाकर साफ कर दिया कि पार्टी में अनुशासन से बड़ा कोई नहीं है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

रोहन भाई, बात बिल्कुल सही है। बहनजी ने ये साबित कर दिया कि पार्टी में दबदबा किसी का भी हो, अनुशासन से ऊपर कोई नहीं जा सकता।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp