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भारी बारिश की आशंका से झालावाड़ के स्कूलों में कल की छुट्टी घोषित, पहली से बारहवीं तक प्रभावितराजस्थान
6 सित॰ 2026, 10:09 pm (19 दिन पहले)· 2

भारी बारिश की आशंका से झालावाड़ के स्कूलों में कल की छुट्टी घोषित, पहली से बारहवीं तक प्रभावित

मौसम विभाग की भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी के बाद झालावाड़ जिला प्रशासन ने कल सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है, हालांकि शिक्षकों और स्टाफ को स्कूल आना अनिवार्य होगा.

राजस्थान के झालावाड़ जिले में मौसम फिर करवट लेने जा रहा है और इसका सीधा असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने वाला है. मौसम विभाग ने आगामी कल जिले में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन सभी स्कूलों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है. बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला जिला कलक्टर के निर्देश पर लिया गया है.

निर्णय के मुताबिक जिला कलक्टर के निर्देशानुसार मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी यानी सीडीईओ ने औपचारिक आदेश जारी किया, जिसका मकसद खराब मौसम के दौरान बच्चों को किसी भी तरह के हादसे से बचाना है.

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किन स्कूलों और कक्षाओं पर लागू होगा यह अवकाश

प्रशासन की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक यह छुट्टी जिले के हर सरकारी और हर निजी स्कूल पर समान रूप से लागू रहेगी. पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक पढ़ने वाला कोई भी विद्यार्थी कल स्कूल नहीं जाएगा. पिछले कई दिनों से जिले में रुक-रुककर हो रही बारिश और अब मौसम विभाग के भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि सड़कों पर जलभराव या किसी अनहोनी में बच्चे न फंसें.

शिक्षकों और स्टाफ के लिए कोई राहत नहीं

छात्रों को भले ही घर पर रहने की छूट मिली हो, लेकिन आदेश में यह साफ कर दिया गया है कि यह छूट शिक्षकों और बाकी स्टाफ पर लागू नहीं होगी. हर स्कूल के अध्यापक, प्रधानाचार्य और प्रशासनिक कर्मचारी को तय समय पर अपने स्कूल पहुंचना ही होगा. इसके पीछे सोच यह है कि अगर बारिश से स्कूल भवन या परिसर को किसी तरह का नुकसान होता है या कोई आपात स्थिति बनती है, तो स्टाफ तुरंत मौके पर मौजूद रहकर उसका जायजा ले सके और राहत कार्य में हाथ बंटा सके.

कलक्टर के अलर्ट पर हरकत में आया पूरा तंत्र

मौसम विभाग की चेतावनी सामने आते ही जिला कलक्टर ने इसे गंभीरता से लिया और आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दे दिए. इन्हीं निर्देशों के आधार पर सीडीईओ ने बिना देरी किए स्कूलों के लिए आधिकारिक आदेश जारी कर दिया. इस आदेश की प्रतियां तुरंत सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और जिले के हर संबंधित स्कूल तक भेज दी गई हैं, ताकि निर्देशों का पालन सख्ती से हो और कहीं कोई भ्रम की स्थिति न बने.

अभिभावकों को दी गई खास सलाह

प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान वे अपने बच्चों को जलभराव वाले इलाकों और नदी-नालों के आसपास बिल्कुल न जाने दें, क्योंकि तेज बारिश में ऐसी जगहें खतरनाक साबित हो सकती हैं.

कुल मिलाकर झालावाड़ जिला प्रशासन इस समय पूरी तरह मुस्तैद दिख रहा है और भारी बारिश के संभावित खतरे से निपटने के लिए हर जरूरी इंतजाम किया जा रहा है. समय रहते उठाया गया यह कदम न सिर्फ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि प्रशासन आपदा प्रबंधन को लेकर कितना संवेदनशील है.

सवाल-जवाब

झालावाड़ में कल स्कूल क्यों बंद हैं?
मौसम विभाग की भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी के चलते यह फैसला लिया गया है.
क्या यह छुट्टी सभी स्कूलों पर लागू होगी?
हां, जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर यह आदेश लागू होगा.
कौन सी कक्षाओं के छात्र इस अवकाश में शामिल हैं?
कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी छात्र इसमें शामिल हैं.
क्या शिक्षकों की भी छुट्टी रहेगी?
नहीं, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को तय समय पर स्कूल जाना होगा.
यह आदेश किसने जारी किया?
जिला कलक्टर के निर्देश पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी यानी सीडीईओ ने यह आदेश जारी किया.
प्रशासन ने अभिभावकों से क्या अपील की है?
बच्चों को जलभराव वाले इलाकों और नदी-नालों के पास न जाने देने की अपील की गई है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 दिन पहले

झालावाड़ प्रशासन द्वारा उठाया गया यह एहतियाती कदम आपदा प्रबंधन की उस प्रशासनिक तत्परता को दर्शाता है जिसकी अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी जिलों में कमी देखी जाती है। मौसम विभाग की चेतावनी पर तुरंत अमल करते हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक सराहनीय निर्णय है, हालांकि शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य रखना यह भी रेखांकित करता है कि जिला प्रशासन किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर पूरी मशीनरी को सक्रिय रखना चाहता है।

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

झालावाड़ जिला प्रशासन का यह निर्णय न केवल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि यह जिला स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने वाले अप्रत्यक्ष असर को भी नियंत्रित करने में मदद करता है। इस तरह के समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप से बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान का आकलन तुरंत संभव होता है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक निरंतरता बनी रहती है।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

झालावाड़ प्रशासन का यह समय पर उठाया गया कदम आपदा प्रबंधन और स्कूली बच्चों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। हालांकि, मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच जिला स्तर पर केवल एक दिन की छुट्टी से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे, विशेषकर ग्रामीण और जलभराव वाले क्षेत्रों में दीर्घकालिक ड्रेनेज सिस्टम और स्कूल भवनों की मजबूती पर भी प्रशासनिक ध्यान देना आवश्यक होगा, ताकि हर मानसूनी संकट से स्थायी रूप से निपटा जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

एक क्राइम संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि केवल प्रशासनिक आदेश जारी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित करना भी अनिवार्य है कि आपात स्थिति में सभी राहत एजेंसियां जमीनी स्तर पर कितनी तत्परता से काम करती हैं। बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ यह भी देखना होगा कि किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए जिला प्रशासन के नियंत्रण कक्ष कितने सक्रिय हैं।

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