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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 50,472 शिक्षकों के पद खाली, कृषि शिक्षक के भरोसे आईटी और बंद हो रहे गणित के कोर्सछत्तीसगढ़
21 सित॰ 2026, 1:08 pm (4 दिन पहले)· 0

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 50,472 शिक्षकों के पद खाली, कृषि शिक्षक के भरोसे आईटी और बंद हो रहे गणित के कोर्स

छत्तीसगढ़ में 38,256 से अधिक सरकारी विद्यालयों में 50,472 शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे कई जगह गणित के विषय बंद हो रहे हैं और कृषि के शिक्षक आईटी पढ़ाने को मजबूर हैं।

छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था इस समय शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर बुनियादी ढांचे के गहरे संकट से जूझ रही है। राज्य भर के सरकारी विद्यालयों में खाली पड़े पदों की वजह से शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर वहां पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी उच्च शिक्षा की योजनाओं पर पड़ रहा है। प्रशासनिक सुस्ती और नीतिगत कमियों के चलते कई विद्यालयों में अनिवार्य विषयों की कक्षाएं तक संचालित नहीं हो पा रही हैं।

गणित के पाठ्यक्रम बंद, कृषि के शिक्षक पढ़ा रहे तकनीकी विषय

इंजीनियरिंग और विज्ञान के क्षेत्र में भविष्य तलाशने वाले छात्रों को सरकारी विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। कई प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में बीते तीन वर्षों से अधिक समय से शिक्षकों की रिक्तियां बनी हुई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि शिक्षकों के अभाव में विद्यार्थियों को अपनी पसंद के विषय छोड़ने पड़ रहे हैं। कई संस्थानों में गणित की कक्षाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, जिससे छात्रों को मजबूरी में दूसरे वैकल्पिक विषय चुनने पड़ रहे हैं।

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कुछ विद्यालयों में विडंबना यह है कि कृषि पृष्ठभूमि वाले शिक्षक विद्यार्थियों को सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी की पढ़ाई करवा रहे हैं। हैरानी की बात यह भी है कि जिन कक्षाओं में कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं हैं, वहां छात्र तकनीकी विषयों की थ्योरी पढ़ने को विवश हैं। ऐसी परिस्थितियों में दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के पास खुद से पढ़ाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। उचित मार्गदर्शन न मिलने से कई छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी है, जबकि कुछ ने अपने पसंदीदा विषय बदल लिए हैं।

आंकड़ों की जुबानी: 36 लाख से अधिक छात्र और 50,472 रिक्त पद

राज्य के सार्वजनिक शिक्षा तंत्र का आकार बेहद विशाल है, लेकिन संसाधनों का आवंटन उसी अनुपात में कमजोर नजर आता है। पूरे प्रदेश में 38,256 से अधिक सरकारी स्कूल संचालित हैं, जहां कुल 36 लाख से अधिक बच्चे नामांकित हैं। इन स्कूलों को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्वीकृत पदों में से 50,472 शिक्षकों के पद खाली पड़े हुए हैं। इतना ही नहीं, बुनियादी स्तर पर बच्चों को तैयार करने वाले 30,172 सहायक शिक्षकों की भी भारी कमी बनी हुई है।

शिक्षकों की कमी के साथ-साथ विद्यालयों का ढांचागत संकट भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। कई क्षेत्रों में बच्चे जर्जर और असुरक्षित भवनों में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं। बरसात के मौसम में कक्षाओं की छतों से लगातार पानी टपकता है और बुनियादी सुविधाओं का अभाव विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति और सीखने की प्रक्रिया को बाधित करता है।

प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार की भर्ती योजना

शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस जमीनी हकीकत को स्वीकार कर रहे हैं। रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार, शिक्षकों के खाली पदों का सीधा असर विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में अलग-अलग स्कूलों में स्थानीय तालमेल और समायोजन के जरिए कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह के कामचलाऊ इंतजाम लंबे समय तक नहीं चलने चाहिए और शिक्षकों की स्थाई नियुक्ति बेहद आवश्यक है।

दूसरी ओर, शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शासन स्तर पर कदम उठाने की बात कही जा रही है। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि जिन-जिन क्षेत्रों और स्कूलों में शिक्षकों की अनुपलब्धता है, वहां से पूरा ब्योरा तलब किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में 5 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी है, जिससे कुछ हद तक शिक्षकों की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

सवाल-जवाब

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कितने शिक्षकों के पद खाली हैं?
राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के कुल 50,472 पद रिक्त हैं, जबकि 30,172 सहायक शिक्षकों की भी कमी है।
राज्य में कुल कितने सरकारी स्कूल और छात्र हैं?
छत्तीसगढ़ में 38,256 से अधिक सरकारी स्कूल संचालित हैं, जिनमें 36 लाख से अधिक बच्चे अध्ययनरत हैं।
शिक्षकों की कमी से छात्रों की पढ़ाई पर क्या असर पड़ रहा है?
शिक्षकों के अभाव में कई स्कूलों में गणित जैसे कोर्स बंद हो गए हैं, छात्रों को विषय बदलने पड़ रहे हैं और कुछ ने स्कूल छोड़ दिया है।
सरकार शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए क्या कदम उठा रही है?
शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव के अनुसार सभी प्रभावित स्कूलों से जानकारी मंगाई गई है और 5 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में है।
स्कूलों में बुनियादी ढांचे की क्या स्थिति है?
कई स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, जहां बारिश में छतों से पानी टपकता है और आईटी पढ़ाने के बावजूद कंप्यूटर तक मौजूद नहीं हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·3 दिन पहले

पचास हजार से ज्यादा पद खाली होना और कृषि पढ़ाने वाले से आईटी पढ़वाना बहुत डरावना है। बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा जब बुनियादी पढ़ाई ही भगवान भरोसे चल रही हो?

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पचास हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त होना और कृषि शिक्षकों द्वारा आईटी पढ़ाया जाना सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली की बुनियादी प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गणित जैसी अनिवार्य कक्षाओं का बंद होना और बुनियादी सुविधाओं का अभाव इस बात का संकेत है कि नीतिगत स्तर पर सुधार न होने से ग्रामीण और गरीब परिवारों के लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक रहा है। यदि समय रहते बड़े पैमाने पर पारदर्शी शिक्षक भर्तियां और ढांचागत निवेश नहीं किया गया, तो राज्य की युवा कार्यबल की क्षमता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

अजय मेहता के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना होगा कि 50,472 रिक्त पदों और जर्जर बुनियादी ढांचे का यह संकट सीधे तौर पर राज्य के आर्थिक भविष्य और मानव पूंजी के विकास को बाधित करता है। जब सरकारी विद्यालयों में गणित और आईटी जैसे तकनीकी विषयों की नींव ही कमजोर कर दी जाएगी, तो आने वाले समय में वित्तीय बाज़ार, कॉर्पोरेट जगत या तकनीकी स्टार्टअप के लिए आवश्यक कुशल युवा कार्यबल कहाँ से तैयार होगा? शिक्षा में यह निवेश की कमी और प्रशासनिक सुस्ती अंततः राज्य की उत्पादकता और आर्थिक गतिशीलता को दीर्घकालिक नुकसान पहुँचाएगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में 50,472 शिक्षकों के पद खाली होना और कृषि शिक्षकों द्वारा आईटी पढ़ाया जाना सिर्फ एक प्रशासनिक लाचारी नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जब गणित जैसे बुनियादी विषय बंद होने लगें और बिना कंप्यूटर के थ्योरी पढ़ाई जाए, तो यह शिक्षा व्यवस्था की नाकामी है। ऐसे माहौल में छात्रों का स्कूल छोड़ना तय है, जिससे आने वाले समय में अपराध दर और बेरोजगारी जैसी सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं, क्योंकि युवा भटकाव की ओर जा सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

यह संकट केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी ग्रामीण और अर्ध-शहरी सरकारी शिक्षा प्रणाली की इसी तरह की पोल खोलता है। जब बुनियादी स्तर पर ही शिक्षकों की ऐसी भारी कमी हो और छात्र बिना प्रयोगशाला या कंप्यूटर के तकनीकी विषय पढ़ने को मजबूर हों, तो यह केवल पठन-पाठन की विफलता नहीं बल्कि नीतिगत प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते इन 50 हजार से अधिक रिक्त पदों को पारदर्शी तरीके से नहीं भरा गया, तो यह स्थिति आने वाले वर्षों में कुशल मानव संसाधन की भारी कमी का कारण बनेगी, जिसका सीधा असर राज्य के समग्र विकास पर पड़ेगा।

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