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चंबल नदी में बाढ़ का टला खतरा, घड़ियालों के बच्चों के जीवित रहने की संभावना 70 प्रतिशत तक पहुंचीराजस्थान
27 अग॰ 2026, 9:04 am (29 दिन पहले)· 3

चंबल नदी में बाढ़ का टला खतरा, घड़ियालों के बच्चों के जीवित रहने की संभावना 70 प्रतिशत तक पहुंची

धौलपुर के पास चंबल नदी में इस बार मानसून कमजोर रहने के कारण भीषण बाढ़ की आशंका टल गई है, जिससे घड़ियालों के नवजात बच्चों को जीवन बचाने का बड़ा अवसर मिल रहा है।

राजस्थान के धौलपुर जिले से गुजरने वाली चंबल नदी में इस बार मानसून की सुस्त चाल और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में कम बारिश के चलते भयंकर बाढ़ आने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। हालांकि, कुछ समय पहले काली सिंध बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर चेतावनी रेखा के नजदीक पहुंच गया था, लेकिन मौजूदा समय में धारा पूरी तरह शांत और सामान्य बनी हुई है। अगस्त का महीना समाप्ति की ओर है और इस अवधि तक चंबल आमतौर पर अपने उग्र रूप में आ जाती है। इस वर्ष बाढ़ का संकट न आने से नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र और विशेष रूप से जलीय जीवों को बड़ी राहत मिलती दिखाई दे रही है।

घड़ियालों के नौनिहालों के लिए जीवनदान

बाढ़ का खतरा टल जाने का सबसे अधिक और प्रत्यक्ष लाभ चंबल में पलने वाले घड़ियालों के नन्हे बच्चों को मिलने की पूरी उम्मीद है। हर साल मई और इसके बाद जून के महीने में घड़ियाल के बच्चे अंडों से बाहर आते हैं। इसके तुरंत बाद शुरू होने वाला मानसून का उफान इन छोटे जीवों के सामने सबसे गंभीर प्राकृतिक संकट बन जाता है। नदी के अत्यधिक वेग और तेज बहाव के कारण हर साल बड़ी संख्या में नवजात घड़ियाल बह जाते हैं, जिससे उनकी असमय मौत हो जाती है।

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प्राकृतिक आवास में अस्तित्व बचाने की कड़ी जंग

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक माहौल में घड़ियाल के बच्चों के जीवित बच पाने की सामान्य दर केवल 1 से 2 फीसदी ही होती है। तेज पानी के बहाव के अलावा चील, सियार और अन्य मांसाहारी जीव भी इन छोटे बच्चों और उनके अंडों का शिकार कर लेते हैं। कई बार ये नौनिहाल तस्करों के जाल में भी उलझ जाते हैं और उग्र बाढ़ इस नुकसान को कई गुना बढ़ा देती है। इसी खतरे से इस दुर्लभ प्रजाति को महफूज रखने के वास्ते धौलपुर के देवरी स्थित घड़ियाल प्रजनन केंद्र में लगभग 200 अंडे लाकर बच्चों को सुरक्षित माहौल में पाला जाता है और बाद में नदी में छोड़ा जाता है।

इस साल 70 फीसदी तक बच्चों के बचने की उम्मीद

वन विभाग और वन्यजीव जानकारों का मानना है कि यदि इस बार चंबल में भयंकर उफान नहीं आता है, तो प्राकृतिक आवास में ही घड़ियाल के बच्चों के सुरक्षित रहने की दर बढ़कर 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इससे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में इन जीवों की संख्या में अच्छी खासी वृद्धि दर्ज होने की संभावना है, जो पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से एक बहुत ही सकारात्मक विकास है।

मौजूदा जलस्तर और केंद्रीय जल आयोग की पैनी नजर

चंबल का सामान्य गेज स्तर लगभग 120 मीटर होता है और अगस्त के आखिरी हफ्ते में यह करीब 121.66 मीटर पर बना हुआ है। इसकी तुलना में वर्ष 2025 में इसी समय के दौरान चंबल में भयंकर बाढ़ आई थी, जिसके कारण नदी किनारे बसे करीब 20 गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट गया था। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक जलस्तर पर चौबीसों घंटे कड़ी नजर रखी जा रही है। भले ही आने वाले दिनों में बारिश होने से पानी की आवक थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए किसी भी विनाशकारी बाढ़ की आशंका न के बराबर है।

सवाल-जवाब

चंबल नदी में इस बार बाढ़ का खतरा कम क्यों है?
मानसून की धीमी रफ्तार और कैचमेंट एरिया में कम बारिश के कारण इस बार बाढ़ के आसार बेहद कम हैं।
घड़ियालों के बच्चों के जीवित रहने की दर कितनी बढ़ने की उम्मीद है?
अनुकूल परिस्थितियों के चलते इस वर्ष घड़ियाल के बच्चों के बचने की दर 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
धौलपुर में घड़ियाल संरक्षण के लिए क्या उपाय किए जाते हैं?
देवरी स्थित प्रजनन केंद्र में लगभग 200 अंडे लाकर बच्चों को सुरक्षित माहौल में बड़ा किया जाता है और बाद में नदी में छोड़ा जाता है।
चंबल नदी का मौजूदा जलस्तर कितना दर्ज किया गया है?
अगस्त के अंतिम सप्ताह में चंबल नदी का जलस्तर लगभग 121.66 मीटर के आसपास बना हुआ है।
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टिप्पणियाँ 1

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

चंबल नदी में बाढ़ का टलना और घड़ियाल के बच्चों के जीवित रहने की संभावना का 70 प्रतिशत तक पहुँचना वन्यजीव संरक्षण के लिए एक दुर्लभ और सकारात्मक अवसर है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में फैले इस अभयारण्य में यदि प्राकृतिक आवास में उत्तरजीविता दर सुधरती है, तो इससे भविष्य में जलीय जीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा सकेगी। हालांकि, वन विभाग को तस्करों और अवैध गतिविधियों पर भी उतनी ही सख्ती से नजर रखनी होगी।

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