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दफ्तर जाने के लिए केवल 15 फीसदी भारतीय करते हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल, दोपहिया वाहनों पर निर्भरता सबसे अधिकभारत
6 अक्तू॰ 2026, 10:31 am (57 मिनट पहले)· 0

दफ्तर जाने के लिए केवल 15 फीसदी भारतीय करते हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल, दोपहिया वाहनों पर निर्भरता सबसे अधिक

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के पहले घरेलू यात्रा सर्वेक्षण के अनुसार, देश में सिर्फ 15 प्रतिशत कामकाजी लोग सार्वजनिक परिवहन अपनाते हैं, जबकि 46 प्रतिशत निजी वाहनों पर निर्भर हैं।

त्यौहारी मौसम की दस्तक के साथ ही सड़कों पर बढ़ती आवाजाही और प्रदूषण की चिंताएं एक बार फिर गंभीर चर्चा का विषय बनने लगी हैं। सरकारों द्वारा पटाखों पर पाबंदियां लगाए जाने के बावजूद नियमों की अनदेखी के चलते दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित आसपास के दर्जनों शहरों में हवा जहरीली हो जाती है तथा आसमान में स्मॉग की गहरी चादर छा जाती है। ऐसी स्थिति पैदा होते ही प्रशासन कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपीलें करने लगता है। हालांकि, धरातल पर स्थिति यह है कि देश भर में कामकाजी आबादी का एक बेहद छोटा हिस्सा ही बसों, रेलगाड़ियों या मेट्रो जैसे सार्वजनिक साधनों पर भरोसा करता है।

कामकाजी आबादी के सफर के साधन और निजी वाहनों का दबदबा

सड़कों पर लगने वाले घंटों लंबे जाम अब केवल राष्ट्रीय राजधानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के अमूमन हर हिस्से में यह रोजाना की दिनचर्या बन चुके हैं। नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (एनएसओ) द्वारा करवाए गए पहले राष्ट्रीय घरेलू यात्रा सर्वेक्षण (एनएचटीएस) के ताजा आंकड़े इस स्थिति की वजह साफ करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में केवल 15 फीसदी कर्मचारी ही काम पर आने-जाने के लिए बस, ट्रेन, ट्राम अथवा ऑटो-रिक्शा जैसे सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। इसके उलट, 46 फीसदी कर्मचारी अपने कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए दोपहिया वाहनों या निजी कारों का सहारा लेते हैं।

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कार्यस्थल तक आवागमन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की पाई गई है। आंकड़ों के अनुसार, समूचे देश में 43 फीसदी कर्मचारी अपनी बाइक या स्कूटर से दफ्तर जाते हैं, जबकि कार का उपयोग करने वालों का आंकड़ा महज 3 फीसदी है। शहरी इलाकों में निजी वाहनों पर यह निर्भरता और भी अधिक गहरी दिखाई देती है। शहरों के भीतर 53 फीसदी कर्मचारी दोपहिया साधनों से सफर तय करते हैं, जबकि 5.7 फीसदी लोग निजी कार चलाते हैं। हालांकि, निजी दोपहिया अथवा कार का उपयोग करने के मामले में गोवा और पंजाब की आबादी दिल्ली से कई गुना आगे दर्ज की गई है।

पैदल चलना बना दूसरा सबसे बड़ा साधन

इस अध्ययन से यह भी साफ हुआ है कि कार्यस्थल तक पहुंचने के लिए पैदल चलना देश भर में दूसरा सबसे आम जरिया बना हुआ है। कुल मिलाकर 28.3 फीसदी कर्मचारी पैदल ही अपने दफ्तर या काम की जगह पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 36 फीसदी के स्तर पर है, जबकि शहरी आबादी में 14 फीसदी लोग काम पर जाने के लिए पैदल चलना पसंद करते हैं। इसके अलावा, रोजाना साइकिल चलाकर दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी 10.7 फीसदी दर्ज की गई है।

यह व्यापक सर्वेक्षण जुलाई 2025 से जून 2026 की अवधि के दौरान संचालित किया गया था। अध्ययन में एक किलोमीटर से अधिक की दूरी वाली यात्राओं को दर्ज किया गया, जिसमें घर से जाने और वापस लौटने को दो अलग-अलग स्वतंत्र यात्राएं माना गया। अध्ययन के अनुसार, किसी कर्मचारी को घर से अपने कार्यस्थल तक पहुंचने में औसतन 25 मिनट का समय लगता है। शहरों में यह सफर औसतन 27 मिनट लेता है, जबकि गांवों में कामगारों को पहुंचने में करीब 23 मिनट लगते हैं। सर्वेक्षण यह भी स्पष्ट करता है कि सुबह 10 बजे से पहले लगभग 95 फीसदी कामकाजी लोग अपने घरों से दफ्तरों के लिए रवाना हो चुके होते हैं।

मासिक खर्च और लैंगिक आधार पर अंतर

कार्यस्थल तक आने-जाने पर होने वाले आर्थिक खर्च के लिहाज से भी कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। देश में एक कर्मचारी अपनी दैनिक आवाजाही पर औसतन 785 रुपये प्रति माह खर्च करता है। इस आवागमन खर्च में पुरुषों और महिलाओं के बीच बड़ा फासला देखने को मिला है। पुरुष कामगार अपने सफर पर औसतन 835 रुपये प्रति माह खर्च करते हैं, जबकि महिला कर्मचारियों का यह औसत केवल 533 रुपये है।

ग्रामीण अंचलों में पुरुषों और महिलाओं के बीच यात्रा खर्च का यह अंतर और भी गहरा हो जाता है। ग्रामीण इलाकों में पुरुष कर्मचारियों का मासिक यात्रा खर्च औसतन 674 रुपये बैठता है, जबकि वहां महिला कर्मचारी सफर पर औसतन सिर्फ 307 रुपये ही खर्च करती हैं।

छात्रों का सफर और संस्थानों तक पहुंचने का समय

दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों की तुलना में स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों का यात्रा व्यवहार काफी अलग पाया गया। अपनी पढ़ाई के संस्थानों तक जाने के लिए छात्र मुख्य रूप से पैदल दूरी तय करते हैं। अध्ययन के अनुसार, स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों में सबसे बड़ा समूह यानी 37 फीसदी छात्र पैदल ही आते-जाते हैं। इसके बाद 29.5 फीसदी विद्यार्थी बस सेवा का उपयोग करते हैं, जबकि 15.8 फीसदी छात्र साइकिल के जरिये अपने शिक्षण संस्थान पहुंचते हैं।

समय की बात करें तो लगभग 88 फीसदी छात्र घर से निकलने के आधे घंटे के भीतर अपने स्कूल या कॉलेज पहुंच जाते हैं। विद्यार्थियों की औसत यात्रा अवधि 23 मिनट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, लगभग चार में से तीन छात्र सुबह 7 बजे से 10 बजे के समयांतराल में अपने घरों से निकल पड़ते हैं।

परिवहन नीति और भविष्य का ढांचा

एनएसओ के अनुसार, इस सर्वेक्षण के आंकड़े रेल मंत्रालय की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के अलावा यात्रियों की आदतों, यात्रा के समय और कारणों का विश्लेषण करने के मकसद से जुटाए गए हैं। इस डेटा से सार्वजनिक परिवहन तंत्र की मौजूद कमियों को चिन्हित करने, नेटवर्क की पहुंच को बढ़ाने, रूट्स की रूपरेखा सुधारने और सेवाओं की फेरियों को अधिक सुगम बनाने में सहायता मिलेगी।

समग्र निष्कर्ष यही संकेत देते हैं कि भारत में सार्वजनिक परिवहन का प्रसार अभी भी सीमित है और नागरिकों की निर्भरता निजी वाहनों तथा पैदल चलने पर अत्यधिक है। शहरों में लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम का सीधा संबंध निजी वाहनों की इसी संख्या से जुड़ा है। यदि सार्वजनिक बस और ट्रेन नेटवर्क को अधिक व्यापक, सुलभ और समयबद्ध बनाया जाए, तो न केवल सड़कों से जाम की समस्या घटेगी, बल्कि यात्रियों का मासिक यात्रा खर्च भी कम होगा और पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी घटेगा।

सवाल-जवाब

भारत में कितने प्रतिशत कर्मचारी सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं?
एनएसओ के सर्वेक्षण के अनुसार केवल 15 फीसदी कर्मचारी बस, ट्रेन, ट्राम या ऑटो-रिक्शा जैसे सार्वजनिक साधनों से दफ्तर जाते हैं।
काम पर जाने के लिए सबसे ज्यादा किस साधन का इस्तेमाल किया जाता है?
देश भर में 43 फीसदी कर्मचारी दोपहिया वाहनों से और 3 फीसदी कार से ऑफिस पहुंचते हैं, जबकि शहरों में 53 फीसदी लोग दोपहिया पर निर्भर हैं।
कितने प्रतिशत लोग पैदल चलकर दफ्तर पहुंचते हैं?
कुल 28.3 फीसदी कर्मचारी पैदल काम पर जाते हैं, जिनमें ग्रामीण इलाकों में यह संख्या 36 फीसदी और शहरों में 14 फीसदी है।
एक कर्मचारी को ऑफिस पहुंचने में औसतन कितना समय लगता है?
एक कर्मचारी को दफ्तर पहुंचने में औसतन 25 मिनट लगते हैं, जिसमें शहरों में 27 मिनट और गांवों में 23 मिनट का समय लगता है।
कर्मचारी अपनी यात्रा पर हर महीने औसतन कितना खर्च करते हैं?
कर्मचारी आवागमन पर औसतन 785 रुपये प्रति माह खर्च करते हैं, जिसमें पुरुषों का खर्च 835 रुपये और महिलाओं का 533 रुपये है।
छात्रों के सफर का सबसे आम जरिया क्या है?
स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्रों में 37 फीसदी पैदल चलते हैं, 29.5 फीसदी बस का इस्तेमाल करते हैं और 15.8 फीसदी साइकिल से जाते हैं।
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