स्लोवाकिया का सर्वोच्च सम्मान, NDA ने बताया देश का गौरव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)' से नवाजे जाने को सत्तारूढ़ NDA के नेताओं ने पूरे देश के लिए गर्व का पल करार दिया है. नेताओं का कहना है कि यह उपलब्धि भारत की कूटनीतिक सफलता और दुनिया में लगातार बढ़ते प्रभाव का साफ संकेत है.
'140 करोड़ भारतीयों का सम्मान'
पटना में मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि जब किसी देश का सर्वोच्च सम्मान प्रधानमंत्री को मिलता है, तो वह सिर्फ उनका नहीं रहता, बल्कि पूरे भारत और 140 करोड़ नागरिकों का सम्मान बन जाता है. उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व, वैश्विक स्तर पर मजबूत होती भारत की पहचान और शांति व मानव कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का नतीजा बताया.
चिराग पासवान के मुताबिक यह प्रधानमंत्री को मिला 33वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है, जो इस बात की गवाही देता है कि आज दुनिया में भारत की आवाज पहले से कहीं ज्यादा असरदार और सम्मानित मानी जा रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के विकास को नई रफ्तार दी है, यही वजह है कि तमाम देश भारत की नीतियों और कामयाबियों की सराहना कर रहे हैं. अमेरिका-ईरान समझौते पर उन्होंने कहा कि हर देश यही चाहता था कि तनाव जल्द खत्म हो, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कारोबार पर पड़ रहा था.
जदयू सांसद संजय झा ने भी इस सम्मान का स्वागत करते हुए कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत की साख दुनिया भर में बढ़ी है. उन्होंने कहा कि 30 से अधिक देशों की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना यह साबित करता है कि भारत वैश्विक मंच पर आज बेहद मजबूत स्थिति में खड़ा है. झा के अनुसार यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव से जुड़ा हुआ है.
ब्रातिस्लावा में दिखी बनारस की झलक
मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रातिस्लावा के प्रेसिडेंशियल पैलेस में वाराणसी पर केंद्रित एक प्रदर्शनी देखी. इस पेंटिंग प्रदर्शनी में उन स्लोवाक कलाकारों की कृतियां भी थीं, जो हाल ही में वाराणसी की यात्रा करके लौटे थे. प्रदर्शनी देखने के बाद प्रधानमंत्री ने भारत और स्लोवाकिया के सांस्कृतिक रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि कला और संस्कृति में लोगों और देशों को एक-दूसरे के करीब लाने की अनोखी ताकत होती है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने लिखा, 'ब्रातिस्लावा में बनारस का जुड़ाव! कल ब्रातिस्लावा के प्रेसिडेंशियल पैलेस में राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और मैंने वाराणसी पर आधारित एक शानदार प्रदर्शनी देखी, जिसमें हाल ही में शहर की यात्रा करने वाले स्लोवाक कलाकारों के कार्य भी शामिल थे. कला और संस्कृति में सचमुच लोगों को करीब लाने की अनोखी क्षमता होती है. इस प्रदर्शनी में जिन लोगों के कार्य प्रदर्शित किए गए, उन सभी को मेरी शुभकामनाएं.'
स्कूली बच्चों के योग प्रदर्शन से अभिभूत हुए मोदी
प्रधानमंत्री ने बताया कि वह और स्लोवाक राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी, स्लोवाकिया के स्कूली बच्चों की ओर से पेश किए गए खास योग प्रदर्शन को देखकर बेहद खुश हुए. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से ठीक पहले हुई इस प्रस्तुति ने दिखाया कि दुनिया भर में योग का आकर्षण और स्वीकार्यता कितनी तेजी से बढ़ रही है.
एक्स पर उन्होंने लिखा, 'राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और मैं स्लोवाकिया के स्कूली बच्चों का खास योग प्रदर्शन देखकर बहुत खुश हुए. जैसे-जैसे दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के करीब आ रही है, युवाओं को योग अपनाते देखना बहुत अच्छा लग रहा है. यह देखकर भी खुशी हो रही है कि योग लोगों को सेहत की साझा कोशिश में साथ ला रहा है.'
जिनेवा से रवाना, अब एवियन में G7 की बारी
स्विट्जरलैंड के जिनेवा दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी अब फ्रांस के एवियन के लिए निकल चुके हैं. जिनेवा पहुंचने पर स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने उनका स्वागत किया और इस मौके पर दोनों देशों के रिश्तों तथा आपसी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई. एवियन में होने वाले G7 Summit में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, ऊर्जा और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर मंथन करेंगे. भारत भले ही G7 का सदस्य न हो, लेकिन एक अहम साझेदार देश के तौर पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी पर पूरी दुनिया की निगाह रहेगी.
17 जून को ट्रंप से सबसे अहम बैठक
इस फ्रांस दौरे में सबसे ज्यादा ध्यान 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली मुलाकात पर है. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के बदलते हालात, अमेरिका-ईरान समझौते, होर्मुज संकट, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और कारोबारी रिश्तों जैसे मुद्दों पर अहम चर्चा होगी.
इसके बाद भारतीय समय के अनुसार रात 8:50 बजे प्रधानमंत्री कनाडा के प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे. फिर रात 9:25 बजे यूनाइटेड किंगडम और रात 10:05 बजे संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के साथ अलग-अलग बातचीत तय है. इन बैठकों में व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े विषयों पर चर्चा की संभावना है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेजबानी में होने वाले एक खास गाला डिनर में भी प्रधानमंत्री शामिल होंगे. भारतीय समयानुसार यह कार्यक्रम 17 जून की मध्यरात्रि 12 बजे शुरू होगा, जहां दुनिया के कई शीर्ष नेता अनौपचारिक माहौल में आपस में बातचीत करेंगे.
G7 में साझेदार देशों में सबसे पहले भारत का स्वागत
एवियन पहुंचने पर भारतीय समय के मुताबिक शाम 6:15 बजे फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी का आधिकारिक स्वागत करेंगे. खास बात यह है कि G7 देशों के बाद आमंत्रित साझेदार देशों में सबसे पहले भारत के प्रधानमंत्री का स्वागत किया जाएगा, जिसे वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद की झलक माना जा रहा है.
इसके बाद शाम 6:45 बजे से रात 8:45 बजे तक वर्क मीटिंग होगी, जिसमें G7 देशों के नेताओं के साथ साझेदार देश, विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे. इस बैठक का मुख्य फोकस नई वैश्विक साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने पर रहेगा.













