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जोधपुर के मसूरिया मेले में दशमी पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, 51 ज्योतों से संपन्न हुई गुरु बालीनाथ की समाधि पर महाआरतीराजस्थान
21 सित॰ 2026, 12:07 pm (4 दिन पहले)· 0

जोधपुर के मसूरिया मेले में दशमी पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़, 51 ज्योतों से संपन्न हुई गुरु बालीनाथ की समाधि पर महाआरती

भाद्रपद शुक्ल दशमी के मौके पर जोधपुर के मसूरिया स्थित बाबा रामदेव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा, जहां तड़के 51 ज्योतों के साथ गुरु बालीनाथ की समाधि पर भव्य महाआरती की गई। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पूरे इलाके पर 56 कैमरों से नजर रखी गई और शाम को 351 किलो पेड़े का प्रसाद बांटा जाएगा।

जोधपुर स्थित मसूरिया धाम में भाद्रपद शुक्ल दशमी के उपलक्ष्य में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी, जहां तड़के सुबह से ही पूरा वातावरण भक्तिमय जयकारों से गुंजायमान रहा। मारवाड़ के महाकुंभ के रूप में पहचाने जाने वाले इस वार्षिक मेले के प्रमुख दिन गुरु बालीनाथ की समाधि पर 51 ज्योतों को प्रज्वलित करके सुबह 6 बजे विशेष महाआरती उतारी गई। आरती के समय उपस्थित जनसमूह ने गुरु बालीनाथ और लोकदेवता बाबा रामदेव के जयघोष लगाए और अपने परिवार की खुशहाली तथा संपन्नता की प्रार्थना की।

गुरु बालीनाथ की समाधि और दर्शन की परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा रामदेव के दर्शन का पुण्य तभी पूर्ण माना जाता है जब भक्त पहले उनके गुरु बालीनाथ की समाधि के समक्ष शीश नवाएं। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र चौहान ने स्पष्ट किया कि इसी प्राचीन परंपरा का पालन करने के लिए देश-प्रदेश के दूरदराज इलाकों से श्रद्धालु मसूरिया पहुंचते हैं। मंदिर प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी रंजन दईया ने जानकारी दी कि मेले की शुरुआत से लेकर अब तक लाखों भक्त मसूरिया धाम में शीश नवा चुके हैं और दशमी के खास दिन भी सुबह के पहले पहर से लंबी कतारें लगी रहीं।

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संध्या आरती और 351 किलो पेड़े का भोग

सोमवार को दिनभर चलने वाले भजन, संकीर्तन और पूजा-अर्चना के दौर के बाद शाम को विशेष संध्या आरती का आयोजन तय किया गया है। मसूरिया मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित इस मेले का औपचारिक समापन इसी सांझ की आरती के साथ संपन्न होगा। इसके तुरंत बाद दर्शनार्थियों को 351 किलोग्राम पेड़े का विशेष महाप्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर में जलने वाली अखंड पावन ज्योत के दर्शन करने के लिए भी श्रद्धालु घंटों अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।

56 कैमरों से निगरानी और कालिका टीम की तैनाती

दशमी पर्व पर आने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। मेला क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर निगाह रखने के लिए 56 सीसीटीवी कैमरे सक्रिय किए गए हैं, जबकि स्थानीय पुलिस बल के जवान भी प्रमुख मार्गों पर तैनात हैं। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सहायता को प्राथमिकता देते हुए विशेष कालिका टीम को मैदान में उतारा गया है।

प्रशासनिक मदद के साथ-साथ श्री पीपा क्षत्रिय समस्त न्याति सभा ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और सैकड़ों स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला हुआ है। ट्रस्ट के सचिव नरेंद्र गोयल, उपाध्यक्ष शिव प्रकाश दईया, दिनेश गोयल, दिनेश प्रकाश पंवार तथा कोषाध्यक्ष पुरुषोत्तम राखेचा व्यवस्थाओं का संचालन करने में जुटे हैं। यह पावन आयोजन न केवल धार्मिक निष्ठा को दर्शाता है, बल्कि समाज के सभी वर्गों के बीच आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक समरसता का अनुपम संदेश भी दे रहा है।

सवाल-जवाब

मसूरिया मेले में महाआरती कब और कितनी ज्योतों से हुई?
सोमवार सुबह 6 बजे गुरु बालीनाथ जी की समाधि पर 51 ज्योतों के साथ भव्य महाआरती संपन्न हुई।
गुरु बालीनाथ जी की समाधि के दर्शन क्यों महत्वपूर्ण माने जाते हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु बालीनाथ जी की समाधि के दर्शन करने के बाद ही बाबा रामदेव के दर्शन का पुण्य फल मिलता है।
मेले के समापन पर श्रद्धालुओं को क्या प्रसाद बांटा जाएगा?
सोमवार शाम संध्या आरती के बाद श्रद्धालुओं को 351 किलो पेड़े का विशेष प्रसाद वितरित किया जाएगा।
मेला परिसर में सुरक्षा के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं?
पूरे क्षेत्र में 56 सीसीटीवी कैमरे, पुलिस बल, महिला सुरक्षा के लिए विशेष कालिका टीम और सैकड़ों स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·3 दिन पहले

जोधपुर के मसूरिया मेले में 351 किलो पेड़े के महाप्रसाद का वितरण केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मारवाड़ की समृद्ध सामुदायिक भोजन संस्कृति और मेलों की आतिथ्य परंपरा का जीवंत उदाहरण है। ऐसे बड़े आयोजनों में स्थानीय मिठाइयों की यह सांस्कृतिक भूमिका क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पाक-विरासत को भी मजबूती देती है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि मारवाड़ क्षेत्र के स्थानीय आतिथ्य, लघु व्यापार और परिवहन अर्थव्यवस्था को भी एक बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन देता है। मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, खुदरा बिक्री और प्रसाद निर्माण जैसे स्थानीय उद्योगों में तेज मांग और कारोबारी गतिविधियों का विस्तार होता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

यह वार्षिक मेला राजस्थान के पश्चिमी अंचल में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का एक बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। मसूरिया धाम जैसी धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखलाएं न केवल स्थानीय लोक परंपराओं को जीवंत रखती हैं, बल्कि क्षेत्र के जनसांख्यिकीय दायरे में धार्मिक पर्यटन को भी एक नई दिशा प्रदान करती हैं, जिसका सीधा प्रभाव क्षेत्रीय सांस्कृतिक गतिशीलता पर पड़ता है।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

मारवाड़ के इस महाकुंभ में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और 56 सीसीटीवी कैमरों के साथ विशेष कालिका टीम की तैनाती यह साबित करती है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में अब सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन सर्वोच्च प्राथमिकता बन गए हैं। इस विशाल मेले के समापन के बाद अब जिला प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट को स्थानीय बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले दबाव और स्वच्छता व्यवस्था का भी बारीकी से आकलन करना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

भीड़ प्रबंधन के इस उन्नत मॉडल में 56 कैमरों और कालिका टीम की तैनाती से कानून-व्यवस्था पर दबाव अवश्य कम हुआ है, लेकिन इस प्रकार के भारी आयोजनों के बाद वीआईपी आवाजाही और आपातकालीन निकास मार्गों का सुरक्षा ऑडिट होना अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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