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मिजोरम में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए ब्लू मिजोरम मिशन की तैयारी, 2030 तक 20 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्यमिजोरम
29 सित॰ 2026, 8:58 am (2 दिन पहले)· 1

मिजोरम में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए ब्लू मिजोरम मिशन की तैयारी, 2030 तक 20 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य

मिजोरम सरकार ने राज्य में मछली उत्पादन 2030 तक 20,000 मीट्रिक टन पहुंचाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस संबंध में मत्स्य विभाग को एक समर्पित मिशन तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

मिजोरम सरकार ने राज्य में जलीय कृषि को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की आजीविका को सशक्त करने के उद्देश्य से एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। राज्य ने वर्ष 2030 तक कुल मछली उत्पादन को 20,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मत्स्य पालन विभाग को इस दिशा में तेजी से काम करने और एक समर्पित 'ब्लू मिजोरम मिशन' का मसौदा तैयार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

समीक्षा बैठक में बनी कार्ययोजना

मुख्यमंत्री लालदुहोमा की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री सम्मेलन कक्ष में मत्स्य विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक सोमवार को आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में मत्स्य पालन मंत्री लालथानसांगा के अलावा वित्त, मत्स्य विभाग और डीपीएंडएआर विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान विभाग की मौजूदा गतिविधियों, भविष्य की विकास योजनाओं और जमीनी चुनौतियों की गहन समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने सभी योजनाओं के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए खुले और रचनात्मक विचार-विमर्श पर विशेष जोर दिया।

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उत्पादन और उत्पादकता में दर्ज हुई महत्वपूर्ण वृद्धि

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मिजोरम में मछली उत्पादन में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। वर्ष 2020-21 में राज्य का मछली उत्पादन 4,304.69 मीट्रिक टन दर्ज किया गया था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 8,020 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। उत्पादन का यह वर्तमान स्तर राज्य की कुल मछली मांग का लगभग 58.28 प्रतिशत हिस्सा पूरा करने के लिए पर्याप्त आंका गया है।

उत्पादन के साथ-साथ प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में भी निरंतर सुधार हुआ है। वर्ष 2020-21 में वार्षिक उत्पादकता 0.78 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में सुधरकर 1.21 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष हो गई। इसके अलावा जलीय कृषि से जुड़ने वाले किसानों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है। मछली पालकों की संख्या 2020-21 में 16,486 थी, जो 2025-26 में बढ़कर 22,661 हो गई। बैठक में इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया गया कि केवल नए तालाब खोदने के बजाय मौजूदा जल क्षेत्रों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाकर भी कुल उत्पादन में व्यापक बढ़ोतरी हासिल की जा सकती है।

जल संसाधन और अप्रयुक्त क्षमता का दोहन

प्राकृतिक संसाधनों की बात करें तो मिजोरम में 16 प्रमुख नदियों समेत लगभग 6,000 हेक्टेयर में फैले जल निकाय मौजूद हैं, जबकि प्रमुख जलाशयों का कुल फैलाव 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र में है। राज्य में मछली पालन के लिए कुल संभावित क्षेत्र लगभग 24,000 हेक्टेयर आंका गया है। हालांकि वर्तमान समय में इस कुल क्षमता का केवल 26.3 प्रतिशत हिस्सा ही उपयोग में लाया जा रहा है। इसी कारण समीक्षा बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि राज्य में मत्स्य पालन की वास्तविक क्षमता का सटीक डेटा तैयार किया जाए, ताकि संसाधनों का समुचित इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके।

हैचरी, नदी संरक्षण और वित्तीय सहयोग

बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए विभाग के पास वर्तमान में 14 सक्रिय मछली हैचरी संचालित हैं। इसके साथ ही नदी संरक्षण के प्रयासों को गति देते हुए यंग मिजो एसोसिएशन (वाईएमए) के सहयोग से 95 अलग-अलग स्थानों पर नदी संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां चलाई जा रही हैं।

स्थानीय परिवारों को आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के लिए बाना काइह योजना के तहत भी सहायता दी जा रही है। बाना काइह के पहले चरण में मुख्यमंत्री विशेष पैकेज के तहत 201 परिवारों को शामिल किया गया, जिनमें से 13 परिवारों को ऋण सहायता प्रदान की गई। वहीं योजना के दूसरे चरण में 84 परिवारों को कवर किया गया है, जिनमें से पांच परिवारों को ऋण वितरित किए जा चुके हैं।

सवाल-जवाब

मिजोरम ने 2030 तक मछली उत्पादन का क्या लक्ष्य तय किया है?
मिजोरम सरकार ने वर्ष 2030 तक कुल मछली उत्पादन को 20,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
ब्लू मिजोरम मिशन शुरू करने का निर्देश किसने दिया?
मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मत्स्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस मिशन को तैयार करने के निर्देश दिए।
मिजोरम में वर्तमान में कितना मछली उत्पादन हो रहा है?
वर्ष 2025-26 में राज्य का मछली उत्पादन 8,020 मीट्रिक टन दर्ज किया गया, जो राज्य की आवश्यकता का 58.28 प्रतिशत पूरा करता है।
राज्य में प्रति हेक्टेयर मछली उत्पादकता कितनी है?
मिजोरम में मछली उत्पादकता 2020-21 के 0.78 मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 1.21 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष हो गई है।
मिजोरम में जलीय कृषि के लिए कितना संभावित क्षेत्र मौजूद है?
राज्य में मछली पालन के लिए लगभग 24,000 हेक्टेयर संभावित क्षेत्र है, जिसमें से अभी केवल 26.3 प्रतिशत क्षेत्र ही उपयोग में लाया जा रहा है।
बाना काइह योजना के तहत कितने परिवारों को सहायता मिली है?
पहले चरण में 201 परिवारों को शामिल कर 13 को ऋण दिया गया, जबकि दूसरे चरण में 84 परिवारों को शामिल कर पांच परिवारों को ऋण वितरित किया गया है।
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टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·1 दिन पहले

2030 तक 20 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य बड़ा तो है, पर बिना पानी के इस्तेमाल को बढ़ाए यह कैसे होगा समझ नहीं आया।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

मिजोरम में मछली उत्पादन बढ़ाने का यह लक्ष्य वाकई बढ़िया है। अगर पोटेंशियल का सिर्फ छब्बीस परसेंट ही इस्तेमाल हो रहा है, तो सही प्लानिंग और निवेश से राज्य बहुत आगे जा सकता है।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·1 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात सही है। पिछली बार जब मैं आज़वल गया था, वहाँ के स्थानीय लोगों ने बताया था कि अगर नदियों और तालाबों का सही इस्तेमाल हो, तो मछली बाहर से मंगवाने की जरूरत ही न पड़े।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

अगर राज्य अपने संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करे तो बाहर से मछली मंगवाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

करण, बात तो सही है आपकी। पर ये बताइए कि सिर्फ 26 प्रतिशत इस्तेमाल हो रही क्षमता को 2030 तक पूरा करने के लिए क्या सरकार के पास कोई तय समयसीमा है?

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