भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश की समुद्री सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी विदेशी साजिश को नाकाम करते हुए 'ऑपरेशन फायरवॉल 2026' के तहत व्यापक कार्रवाई की है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के इशारे पर चलाए जा रहे जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए जांच अधिकारियों ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान विशाखापट्टनम से नौसेना के एक कर्मी और एक चालक को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर संवेदनशील रक्षा जानकारियां सरहद पार साझा करने का आरोप है।
विशाखापट्टनम और पूर्वी नौसेना कमान था मुख्य निशाना
जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी खुफिया तंत्र मुख्य रूप से विशाखापट्टनम स्थित पूर्वी नौसेना कमान से जुड़े गोपनीय रक्षा विवरण हासिल करने की फिराक में था। काउंटर इंटेलिजेंस सेल और आंध्र प्रदेश पुलिस की संयुक्त निगरानी के बाद इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खोली गईं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कुल 18 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें से 13 भारतीय नौसेना के जवान और अधिकारी शामिल हैं। यह गिरोह सोशल मीडिया पर हनीट्रैप और अन्य माध्यमों से जवानों को फांसकर सामरिक दस्तावेज और ठिकाने की जानकारियां जुटाने की कोशिश कर रहा था।
10 राज्यों में काउंटर इंटेलिजेंस का समन्वित सर्च ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने देश के 10 अलग-अलग राज्यों में समन्वित छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान संदिग्धों के डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि किन संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी लीक हुई है और क्या इस जासूसी के बदले हवाला अथवा ऑनलाइन खातों से रकम भेजी गई थी।
सख्त निगरानी और विस्तृत जांच जारी
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में कौन-कौन लोग थे। संदेह के दायरे में आए सभी 13 नौसैनिकों की गतिविधियों की भी आंतरिक समीक्षा की जा रही है। रक्षा प्रतिष्ठानों ने अपने सभी केंद्रों पर सोशल मीडिया दिशा-निर्देशों और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी सेंधमारी को रोका जा सके।




















