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फरीदाबाद के शिव एन्क्लेव में मां ने 2 साल के मासूम की गर्दन पर चलाया पेपर कटर, पुलिस ने भेजा जेलहरियाणा
29 अग॰ 2026, 12:19 am (70 दिन पहले)· 4

फरीदाबाद के शिव एन्क्लेव में मां ने 2 साल के मासूम की गर्दन पर चलाया पेपर कटर, पुलिस ने भेजा जेल

हरियाणा के फरीदाबाद में बच्चों की देखभाल के तनाव के चलते एक महिला ने अपने 2 साल के बेटे पर पेपर कटर से हमला कर दिया। पति की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया है।

हरियाणा के फरीदाबाद जिले से एक सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मां ने घरेलू तनाव और गुस्से में आकर अपने ही दो साल के मासूम बेटे पर पेपर कटर से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद सक्रिय हुई स्थानीय पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उसे शहर की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत के आदेश पर महिला को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

शिव एन्क्लेव में घटी खौफनाक वारदात

यह दर्दनाक घटना फरीदाबाद स्थित शिव एन्क्लेव पार्ट-3 इलाके की है। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार इसी मकान में रहता है। शिकायतकर्ता कृष्ण कुमार ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उनकी शादी को लगभग पांच साल का समय बीत चुका है। शादी के बाद से उनके तीन छोटे बच्चे हैं। कृष्ण कुमार ने अपनी पत्नी के व्यवहार को लेकर कई अहम खुलासे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी अक्सर छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ी हो जाती थी और बच्चों के प्रति उसका रवैया सामान्य नहीं था। वह अक्सर गुस्से में आकर अपने ही छोटे बच्चों के साथ मारपीट करती रहती थी।

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पति और सास के काम पर जाने के बाद हुआ हमला

मामले की विस्तृत जांच में सामने आया कि 26 अगस्त की दोपहर को यह वारदात अंजाम दी गई। उस समय घर के अन्य जिम्मेदार सदस्य मौजूद नहीं थे। रोजमर्रा की तरह कृष्ण कुमार और उनकी मां (मासूम की दादी) अपने-अपने काम के सिलसिले में घर से बाहर गए हुए थे। घर पर महिला अपने तीनों बच्चों के साथ अकेली मौजूद थी। इसी दौरान अचानक महिला का गुस्सा भड़क उठा और उसने अपने दो साल के मासूम बेटे की पिटाई शुरू कर दी। मारपीट का सिलसिला चल ही रहा था कि अचानक कृष्ण कुमार काम निपटाकर घर लौट आए।

बचाव की कोशिश के दौरान पेपर कटर से काटा गला

जब कृष्ण कुमार ने घर के अंदर अपनी पत्नी को बच्चे को पीटते हुए देखा, तो वे तुरंत मासूम को बचाने के लिए आगे बढ़े। उन्होंने अपनी पत्नी को शांत कराने और बच्चे को उसके चंगुल से छुड़ाने का प्रयास किया। हालांकि, गुस्से में आगबूला हुई महिला ने आपा खो दिया और घर में ही रखा एक तीखा पेपर कटर उठा लिया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, महिला ने कटर से अपने ही 2 साल के बेटे की गर्दन पर हमला कर दिया। इस जानलेवा वार से बच्चा लहूलुहान होकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

मासूम अस्पताल में भर्ती, पुलिस जांच में मानसिक तनाव की बात

घटना के तुरंत बाद लहुलूहान बच्चे को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार शुरू किया गया। इसके बाद पीड़ित पिता कृष्ण कुमार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला बच्चों के पालन-पोषण और उनकी देखभाल को लेकर काफी समय से परेशान और मानसिक तनाव में चल रही थी। इसी गुस्से और तनाव के चलते उसने 26 अगस्त को इस खौफनाक कदम को अंजाम दिया। पुलिस ने महिला को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

सवाल-जवाब

यह घटना फरीदाबाद के किस इलाके में हुई?
यह घटना फरीदाबाद के शिव एन्क्लेव पार्ट-3 इलाके में हुई।
महिला ने अपने दो साल के बेटे पर किस चीज से हमला किया?
महिला ने अपने दो साल के मासूम बेटे की गर्दन पर घर में रखे पेपर कटर से हमला किया।
पुलिस के अनुसार इस हमले की मुख्य वजह क्या थी?
पुलिस के मुताबिक महिला बच्चों की देखभाल और पालन-पोषण को लेकर अत्यधिक मानसिक तनाव और गुस्से में थी।
अदालत ने आरोपी महिला के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
कृष्ण कुमार की शादी को कितने साल हुए हैं और उनके कितने बच्चे हैं?
कृष्ण कुमार की शादी को लगभग पांच साल हो चुके हैं और उनके तीन छोटे बच्चे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·69 दिन पहले

यह घटना बाल गृह कलह और देखभाल के अत्यधिक मानसिक दबाव के कारण उपजे भयंकर तनाव का एक दुखद और गंभीर परिणाम है। इस मामले ने घरेलू स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता की तत्काल आवश्यकता को उजागर किया है, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·69 दिन पहले

यह घटना बाल-देखभाल और घरेलू तनाव से जुड़े गंभीर मनोवैज्ञानिक संकट को उजागर करती है। प्रशासनिक और सार्वजनिक स्तर पर ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए परामर्श केंद्रों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की सख्त आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे गंभीर अपराधों को रोका जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·69 दिन पहले

यह घटना न केवल एक पारिवारिक त्रासदी है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि अत्यधिक घरेलू दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की उपेक्षा किस तरह गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले सकती है। चूंकि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच लोगों पर मानसिक बोझ लगातार बढ़ रहा है, इसलिए कार्यस्थलों और आवासीय क्षेत्रों दोनों स्तरों पर सुलभ मनोवैज्ञानिक सहायता प्रणालियों का होना अनिवार्य हो गया है। यदि समय रहते ऐसे मामलों में पेशेवर परामर्श और चिकित्सीय हस्तक्षेप उपलब्ध न कराया जाए, तो इस प्रकार के तनाव परिवारों के भीतर ही हिंसक और जानलेवा रूप धारण कर सकते हैं, जिससे समाज के सबसे कमजोर वर्ग यानी छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·69 दिन पहले

यह घटना बाल गृह देखभाल और आधुनिक जीवन के बढ़ते मानसिक दबाव के बीच की गहरी खाई को उजागर करती है। फरीदाबाद की यह वारदात दिखाती है कि पारिवारिक और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी कितनी घातक हो सकती है। अदालती प्रक्रिया के साथ-साथ यह अनिवार्य है कि ऐसे मामलों में मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग को प्राथमिकता दी जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा और माता-पिता के मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर संतुलन बनाया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·69 दिन पहले

यह वीभत्स मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि घरेलू एकांत और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी का परिणाम है। जब माता-पिता, विशेषकर मां, तीन छोटे बच्चों के पालन-पोषण के भारी दबाव में अकेली होती हैं, तो समाज और समुदाय का सहयोग न मिलना इस तरह के जानलेवा हादसों को जन्म देता है। यह अनिवार्य है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ऐसी गृहणियों के लिए विशेष मानसिक स्वास्थ्य परामर्श शिविर और सहायता केंद्र घर-घर तक पहुँचाए, ताकि किसी अन्य मासूम को ऐसी भयानक हिंसा का शिकार न होना पड़े।

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