अजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंतुला राशिफल 1 अक्टूबर 2026: जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचें, वित्तीय और कार्यक्षेत्र के फैसलों में रखें सजगताकन्या राशिफल 1 अक्टूबर 2026: आत्मविश्वास से बनेंगे काम, रिश्तों में संवाद और आराम पर दें ध्यानबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकानवजात को दूध पिलाने में थोड़ी सी लापरवाही भी बन सकती है जानलेवा, बाल रोग विशेषज्ञ ने बताए जरूरी नियमअमेरिका ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को देश छोड़ने का दिया आदेश, कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों में हलचलअमेरिकी सीनेट में क्लैरिटी एक्ट अटकने से डिजिटल एसेट बाजार को मिली नई ऊर्जा, मैट हॉगन ने गिनाए फायदेराजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अंतिम चरण में, जानिए कब से सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभजिमीकंद और सूरन काटने पर नहीं होगी हाथों में खुजली, शेफ रणवीर बरार ने बताए पकाने के आसान नुस्खे
पूर्वोत्तर में एक जैसी शिक्षा नीति नहीं चलेगी, मिजोरम ने केंद्र से भौगोलिक चुनौतियों के आधार पर मांगी विशेष मददमिजोरम
20 सित॰ 2026, 7:25 pm (11 दिन पहले)· 0

पूर्वोत्तर में एक जैसी शिक्षा नीति नहीं चलेगी, मिजोरम ने केंद्र से भौगोलिक चुनौतियों के आधार पर मांगी विशेष मदद

मिजोरम के शिक्षा मंत्री वानलालथलाना ने नगालैंड में आयोजित शिक्षा सम्मेलन के दौरान केंद्र सरकार से पूर्वोत्तर की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखकर नीतियां तैयार करने की अपील की है।

पूर्वोत्तर के छोटे और पहाड़ी राज्यों में पूरे देश के लिए तैयार की जाने वाली सामान्य नीतियां ज़मीनी स्तर पर पूरी तरह सटीक नहीं बैठती हैं। इसी मुद्दे को उठाते हुए मिजोरम के शिक्षा मंत्री वानलालथलाना ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए शिक्षा से जुड़ी योजनाएं बनाते समय वहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सामाजिक-आर्थिक माहौल का विशेष ध्यान रखा जाए। नगालैंड के चुमौकेदिमा जिले में आयोजित नॉर्थ ईस्ट एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 के दौरान उन्होंने यह बात रखी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतें

सम्मेलन में वानलालथलाना ने अपने राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में हुए कार्यों का ब्योरा दिया और साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी एनईपी 2020 को जमीन पर उतारने के दौरान पेश आ रही कठिनाइयों को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी राज्यों पर एक जैसी नीति लागू करने से पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों की जरूरतें पूरी नहीं हो सकतीं।

ये भी पढ़ें

मंत्री ने बताया कि सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में घटता छात्रों का नामांकन इस वक्त एक बड़ी चिंता का विषय है। इसके अलावा दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में माध्यमिक स्कूलों की भारी कमी बनी हुई है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डीआईईटी) और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषदों (एससीईआरटी) में आवश्यक कर्मचारियों और विशेषज्ञों का अभाव भी कामकाज को प्रभावित कर रहा है। इसके साथ ही सुदूर पहाड़ी इलाकों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी और शिक्षण संस्थानों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने में आने वाली दिक्कतें भी पढ़ाई-लिखाई के आधुनिक तंत्र में रुकावट पैदा कर रही हैं।

वित्तीय दबाव और बुनियादी ढांचे का विस्तार

वानलालथलाना ने इस बात पर जोर दिया कि पूर्वोत्तर के राज्यों के पास सीमित राजस्व संसाधन हैं। इस वित्तीय तंगी के कारण राज्य सरकारें न तो जरूरी संख्या में नए शिक्षकों व कर्मचारियों की भर्ती कर पा रही हैं और न ही स्कूलों के बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार कर पा रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह इन समस्याओं को केवल किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की साझा चुनौती माने और उस हिसाब से उचित आर्थिक व नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराए।

इस अवसर पर मिजोरम के प्रतिनिधिमंडल ने समग्र शिक्षा 3.0 और पीएम-उषा योजनाओं को लेकर अपने प्रस्ताव भी सौंपे। प्रतिनिधिमंडल का सुझाव था कि शिक्षा की रणनीतियों को मिजोरम के स्थानीय रीति-रिवाजों, जनजीवन और वहां की वास्तविक भौगोलिक स्थिति के अनुकूल ढाला जाना चाहिए।

राज्य स्तर पर शुरू किए गए नवाचार

कठिनाइयों के बीच मिजोरम सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में प्राथमिक स्तर के विद्यालयों के लिए मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली शुरू की गई है। इसके साथ ही शैक्षणिक निगरानी और समीक्षा तंत्र को पारदर्शी व मजबूत बनाने के लिए विद्या समीक्षा केंद्र का सक्रिय उपयोग किया जा रहा है।

विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'इनतोदेलह' (Intodelh) परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसका मकसद छात्रों को वित्तीय प्रबंधन और उद्यमिता के व्यावहारिक गुण सिखाना है ताकि वे भविष्य में स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा सकें। अंत में उन्होंने दोहराया कि देश की प्रमुख शैक्षिक योजनाओं को आकार देते समय पूर्वोत्तर के अनूठे परिवेश को प्राथमिकता मिलना बेहद जरूरी है।

सवाल-जवाब

मिजोरम के शिक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार से मुख्य रूप से क्या मांग की है?
उन्होंने केंद्र से मांग की है कि पूर्वोत्तर के लिए नीतियां बनाते समय वहां की कठिन भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।
नॉर्थ ईस्ट एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन कहां किया गया था?
यह सम्मेलन नगालैंड के चुमौकेदिमा जिले में आयोजित किया गया था।
पूर्वोत्तर के स्कूलों में कौन सी प्रमुख चुनौतियां सामने आ रही हैं?
सरकारी स्कूलों में घटता नामांकन, ग्रामीण इलाकों में माध्यमिक स्कूलों की कमी, कमजोर इंटरनेट और प्रशिक्षण संस्थानों में कर्मियों का अभाव प्रमुख समस्याएं हैं।
मिजोरम की 'इनतोदेलह' (Intodelh) परियोजना का क्या उद्देश्य है?
इस परियोजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को वित्तीय प्रबंधन और उद्यमिता का ज्ञान देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है।
मिजोरम ने प्राथमिक स्कूलों में मूल्यांकन के लिए क्या व्यवस्था शुरू की है?
मिजोरम ने प्राथमिक स्कूलों के लिए मानकीकृत मूल्यांकन प्रणाली शुरू की है और समीक्षा के लिए विद्या समीक्षा केंद्र का उपयोग किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·10 दिन पहले

एक मनोरंजन और मीडिया विश्लेषक के रूप में, मैं देखती हूँ कि इंटरनेट और तकनीकी बुनियादी ढांचे की कमी केवल पारंपरिक शिक्षा को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि बच्चों तक आधुनिक 'एडुटेनमेंट' (शैक्षणिक-मनोरंजन) और क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया की पहुँच को भी रोकती है। पूर्वोत्तर की अनूठी लोक-संस्कृति और कहानियों को जब तक स्थानीय भाषा में बने मनोरंजक डिजिटल कंटेंट के ज़रिए बढ़ावा नहीं मिलेगा, तब तक मुख्यधारा के मीडिया में उनकी भागीदारी सीमित रहेगी। भौगोलिक चुनौतियों को हल करके ही हम वहां डिजिटल साक्षरता और रचनात्मक कंटेंट का विकास कर सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

यह रिपोर्ट भारतीय सहकारी संघवाद की एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती को रेखांकित करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे बड़े नीतिगत बदलावों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वे क्षेत्रीय विविधताओं को कितना समाहित करते हैं। मिजोरम की भौगोलिक और वित्तीय सीमाएं यह दर्शाती हैं कि केंद्र सरकार को पूर्वोत्तर के सीमावर्ती राज्यों के लिए सभी के लिए एक जैसी नीति के बजाय लचीले नीतिगत ढांचे को अपनाना होगा। जब तक पर्वतीय क्षेत्रों की ढांचागत और कनेक्टिविटी संबंधी चुनौतियों के अनुरूप बजट और नियमों में ढील नहीं दी जाएगी, तब तक शिक्षा का समान विकास संभव नहीं है।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·10 दिन पहले

जैसे गणित ज्योतिष में सटीक गणना के लिए स्थानीय अक्षांश-रेखांश अनिवार्य हैं, और वास्तु शास्त्र स्थानीय भूगोल के साथ संतुलन पर बल देता है, वैसे ही राष्ट्रीय नीतियों में भी क्षेत्रीय वास्तविकताओं का समन्वय आवश्यक है। मिजोरम की भौगोलिक और ढांचागत चुनौतियां—जैसे इंटरनेट कनेक्टिविटी और सौर ऊर्जा की कमी—यह दर्शाती हैं कि सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों पर थोपी गई एकरूपता सटीक परिणाम नहीं दे सकती। नीतिगत ढांचे को स्थानीय पर्यावरण और वित्तीय संसाधनों के 'सटीक स्थानिक समन्वय' की आवश्यकता है, तभी शैक्षिक सुधारों का वास्तविक प्रभाव धरातल पर दिखाई देगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

शिक्षा व्यवस्था की ये बुनियादी कमियां केवल अकादमिक संकट नहीं हैं, बल्कि ये मिजोरम जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती हैं। दूरदराज के क्षेत्रों में स्कूलों की कमी और गिरता नामांकन युवाओं को मुख्यधारा से काट सकता है, जिससे वे सीमा पार के अपराधों, विशेषकर नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे गैर-कानूनी नेटवर्कों के प्रभाव में आ सकते हैं। अपराध नियंत्रण के लिए इस शिक्षा नीति के व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

करण की बात को आगे बढ़ाते हुए, बुनियादी शिक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की यह कमी मिजोरम के आर्थिक भविष्य और निवेश की संभावनाओं को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है। कमजोर इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की कमी के कारण राज्य का युवा डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और वित्तीय साक्षरता से दूर रह जाएगा। यदि इस क्षेत्रीय अंतर को पाटा नहीं गया, तो यह न केवल सुरक्षा संकट पैदा करेगा बल्कि राज्य को देश के आर्थिक विकास की मुख्यधारा से भी अलग कर देगा। दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए केंद्र का विशेष नीतिगत व वित्तीय सहयोग आवश्यक है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp