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राजस्थान में मानसून का दौर जारी, मौसम विभाग ने अगले 3-4 दिन भारी बारिश और तेज हवाओं की दी चेतावनीराजस्थान
16 सित॰ 2026, 6:03 am (9 दिन पहले)· 0

राजस्थान में मानसून का दौर जारी, मौसम विभाग ने अगले 3-4 दिन भारी बारिश और तेज हवाओं की दी चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग ने राजस्थान के कई हिस्सों में आगामी तीन से चार दिनों के लिए भारी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम में यह बदलाव आया है, जिससे किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

राजस्थान में मानसून की विदाई से पहले मौसम का मिजाज एक बार फिर से बदल गया है और राज्य के तमाम हिस्सों में तेज बारिश का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की तरफ से जारी चेतावनियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में झमाझम बारिश के साथ आंधी और तेज हवाएं चलने की पूरी संभावना बनी हुई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान और उसके पास स्थित कच्छ क्षेत्र के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय हो चुका है, जिसके असर से वातावरण में नमी बढ़ गई है और बादलों की आवाजाही तेज हो गई है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान उदयपुर, कोटा, जोधपुर और अजमेर संभागों में व्यापक स्तर पर पानी बरसा है, जिसमें सर्वाधिक 88 मिलीमीटर बारिश का आंकड़ा उदयपुर के कोटड़ा इलाके में दर्ज किया गया है।

नया पश्चिमी विक्षोभ और मानसून का संयुक्त प्रभाव

आने वाली 16 और 17 तारीख को उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की उम्मीद है, जो मानसून की धाराओं के साथ मिलकर राज्य के मौसम को पूरी तरह से प्रभावित करेगा। इस मौसमी हलचल के कारण पूर्वी राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा और भरतपुर संभागों के अधिकांश इलाकों में अगले तीन से चार दिनों तक हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। इस दौरान अचानक तेज हवाएं चलने और बादलों की तेज गर्जना के साथ वज्रपात की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं, जिसे देखते हुए आम नागरिकों और विशेष रूप से किसानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में 19 सितंबर के बाद से इस मूसलाधार पानी से राहत मिलने के आसार जताए गए हैं, क्योंकि उस समय तक मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने लगेंगी।

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जयपुर और उदयपुर संभाग का हाल

राजधानी जयपुर में आज सुबह से ही आसमान बादलों से घिरा हुआ है और मौसम विभाग ने यहाँ हल्की से मध्यम वर्षा होने की प्रबल संभावना जताई है। जयपुर मौसम केंद्र के मुताबिक शहर और आसपास के क्षेत्रों में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झकोरेदार हवाएं चल सकती हैं, इसलिए निवासियों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित जगहों पर रहने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की सलाह दी गई है। दूसरी तरफ, झीलों के शहर उदयपुर में भी बादलों का डेरा बना हुआ है और कोटड़ा में हुई रिकॉर्ड 88 mm बारिश के बाद से ही जनजीवन प्रभावित हुआ है। यहाँ अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बौछारें गिरने का दौर चलता रहेगा, जिससे पहाड़ी इलाकों में जलस्तर अचानक बढ़ने का खतरा बना रह सकता है और पर्यटकों को नदी-नालों से दूर रहने की हिदायत दी गई है।

बीकानेर और शेखावाटी क्षेत्र में चेतावनी

पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर संभाग में भी मौसम का मिजाज काफी उग्र रहने वाला है जहाँ 16 और 17 सितंबर को आने वाले पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर दिखाई देगा। बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू के जिलों में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, साथ ही मध्यम बारिश भी दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए यह वक्त अपनी कटी हुई या पककर तैयार फसलों को बचाने का है ताकि किसी भी तरह के नुकसान से बचा जा सके। इसके अलावा हाड़ौती के कोटा संभाग और सीकर तथा झुंझुनू वाले शेखावाटी क्षेत्र में भी येलो अलर्ट जारी कर दिया गया है, जहाँ तेज हवाओं और पानी के गिरने से उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिलेगी और तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।

सवाल-जवाब

राजस्थान में वर्तमान बारिश का मुख्य कारण क्या है?
दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान और कच्छ के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण राज्य में बारिश हो रही है।
पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक बारिश कहाँ दर्ज की गई?
पिछले 24 घंटों के दौरान सबसे ज्यादा 88 मिलीमीटर बारिश उदयपुर संभाग के कोटड़ा में दर्ज की गई है।
नया पश्चिमी विक्षोभ कब सक्रिय होने की संभावना है?
उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर नया पश्चिमी विक्षोभ आगामी 16 और 17 सितंबर को सक्रिय होगा।
जयपुर में हवा की संभावित गति क्या हो सकती है?
जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
राजस्थान से मानसून की विदाई कब से शुरू हो सकती है?
मौसम विभाग के अनुसार 19 सितंबर के बाद पश्चिमी राजस्थान से मानसून की विदाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने लगेंगी।
किन क्षेत्रों में येलो अलर्ट जारी किया गया है?
मौसम विभाग ने कोटा, शेखावाटी और बीकानेर संभागों सहित कई जिलों में मेघगर्जन और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·8 दिन पहले

मौसम विभाग द्वारा जारी भारी बारिश और तेज हवाओं की यह चेतावनी राज्य में आयोजित होने वाले स्थानीय खेल आयोजनों, आउटडोर ट्रेनिंग कैंपों और क्रिकेट अकादमियों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। जयपुर और उदयपुर जैसे संभागों में खराब मौसम के कारण खेल मैदानों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है, जिससे अभ्यास सत्र और मैच प्रभावित होंगे। ऐसे में खेल आयोजकों और अकादमियों को खुले स्टेडियमों में सुरक्षा उपाय पुख्ता करने चाहिए और अगले तीन-चार दिनों के लिए बाहरी गतिविधियों का समय पुनर्निर्धारित करने पर विचार करना चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

मौसम विभाग द्वारा राजस्थान के विभिन्न संभागों के लिए जारी यह अलर्ट केवल एक सूचना नहीं है, बल्कि यह राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र की प्रशासनिक तैयारियों की परीक्षा है। 16-17 सितंबर को पश्चिमी विक्षोभ और मानसून के मिले-जुले असर से जलभराव और तेज हवाओं का जोखिम बढ़ेगा। ऐसे समय में स्थानीय निकायों, कृषि विभागों और ज़िला प्रशासन के बीच त्वरित नीतिगत समन्वय बेहद आवश्यक हो जाता है। किसानों तक समय पर सही दिशा-निर्देश पहुँचाना और पहाड़ी व शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना ही सुशासन का असली मापदंड साबित होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

अर्जुन की प्रशासनिक तत्परता वाली बात से आगे बढ़ते हुए, आर्थिक और कृषि दृष्टिकोण से मानसून का यह अंतिम दौर अत्यंत संवेदनशील है। कटाई से ठीक पहले उदयपुर, बीकानेर और जयपुर संभागों में भारी बारिश और वज्रपात से बाजरा, तिलहन और दलहन जैसी खरीफ फसलों को नुकसान पहुँचने का सीधा जोखिम है। यदि स्थानीय मंडियों में आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है, तो इसका तात्कालिक प्रभाव ग्रामीण मांग और खाद्य मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर देखने को मिल सकता है। इसलिए आपदा प्रबंधन के साथ-साथ फसल क्षति के त्वरित मूल्यांकन और कृषि-बीमा दावों के निस्तारण की नीतिगत रूपरेखा अभी से तैयार रखी जानी चाहिए ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

यह खबर स्पष्ट करती है कि पश्चिमी विक्षोभ और मानसून के मेल से मौसम अचानक बदल रहा है, जिससे कृषि और जनजीवन पर सीधा असर पड़ेगा। आने वाले दिनों में खासकर पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में तेज हवाओं, वज्रपात और भारी बारिश की संभावना से किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर त्वरित कदम उठाने होंगे। 19 सितंबर के बाद ही मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने से इस दौर से राहत मिलने की उम्मीद है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

यह मौसमी बदलाव और पश्चिमी विक्षोभ का मेल सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से एक संवेदनशील स्थिति पैदा कर रहा है। मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों के बीच, जलभराव वाले क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की आशंका और ग्रामीण इलाकों में वज्रपात का जोखिम बढ़ गया है। जिला प्रशासन को चाहिए कि वो निचले इलाकों और पर्यटकों की आवाजाही वाले स्थलों पर विशेष निगरानी रखे, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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