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सोशल मीडिया से सीखा कोरियन स्ट्रीट फूड, बोकारो के सेक्टर-4 में विशाल का हॉट कॉर्न डॉग स्टॉल हुआ हिटझारखंड
21 सित॰ 2026, 12:24 pm (4 दिन पहले)· 0

सोशल मीडिया से सीखा कोरियन स्ट्रीट फूड, बोकारो के सेक्टर-4 में विशाल का हॉट कॉर्न डॉग स्टॉल हुआ हिट

बोकारो के सेक्टर-4 में विशाल ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब की मदद से कोरियन हॉट कॉर्न डॉग का नया स्टॉल शुरू किया है, जहां रोजाना 50 से 100 पीस की बिक्री हो रही है।

झारखंड के बोकारो में खान-पान के शौकीनों के लिए एक नया और अनोखा स्वाद चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के सेक्टर-4 में शुरू हुए एक खास स्टॉल पर लोगों को कोरियन स्ट्रीट फूड हॉट कॉर्न डॉग परोसा जा रहा है। इस अनोखे व्यंजन को चखने के लिए स्थानीय फूड लवर्स और खासकर युवा पीढ़ी बड़ी संख्या में पहुंच रही है। अलग-अलग स्वादों में उपलब्ध यह स्ट्रीट फूड बहुत ही कम समय में इलाके के लोगों की पसंद बन चुका है।

इंटरनेट से मिली प्रेरणा और सीखी गई रेसिपी

इस स्टॉल का संचालन विशाल नाम के एक स्थानीय युवा कर रहे हैं। उन्होंने साझा किया कि उन्हें कोरियन स्ट्रीट फूड का यह कांसेप्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वीडियो देखने के बाद मिला। जब उन्होंने देखा कि वैश्विक स्तर पर और बड़े शहरों में कोरियन डिशेज को काफी पसंद किया जा रहा है, तो उन्होंने अपने शहर बोकारो में भी इस ट्रेंड को लाने का फैसला किया।

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व्यवसाय की शुरुआत करने के लिए विशाल ने यूट्यूब का सहारा लिया। उन्होंने वीडियो देखकर हॉट कॉर्न डॉग बनाने की पूरी रेसिपी सीखी, घर पर इसका अभ्यास किया और फिर बाजार में स्टॉल लगाने का निर्णय लिया।

मेनू में चार वेरायटी और उनकी कीमतें

विशाल के स्टॉल पर आने वाले ग्राहकों के लिए चार अलग-अलग किस्मों के कोरियन हॉट डॉग उपलब्ध कराए गए हैं। हर वेरायटी का स्वाद और तैयारी अलग है, जिनकी कीमतें भी बजट के अनुकूल रखी गई हैं

  • क्लासिक चीज कॉर्न डॉग: इसकी कीमत 99 रुपए निर्धारित की गई है।
  • कोरियन पोटैटो कॉर्न डॉग: इसे 109 रुपए में ग्राहकों को दिया जा रहा है।
  • मोजरेला चीज फुल हॉट डॉग: इस पूरी तरह चीज से भरपूर वेरायटी का दाम 119 रुपए है।
  • डबल चीज क्रंच कोरियन हॉट डॉग: इस क्रंची विकल्प की कीमत 129 रुपए रखी गई है।

तैयारी की प्रक्रिया और ग्राहकों की पसंद

हॉट कॉर्न डॉग बनाने की प्रक्रिया के बारे में विशाल ने बताया कि सबसे पहले मैदे का एक खास बैटर तैयार किया जाता है। इसके बाद सामग्री पर चीज और ब्रेड क्रंब्स की परत चढ़ाई जाती है, जिससे उसे बढ़िया क्रंच मिल सके। फिर इसे उस विशेष बैटर में पूरी तरह कोट किया जाता है। इसके बाद इसे खौलते हुए गर्म तेल में डीप फ्राई किया जाता है। जब यह सुनहरा और कुरकुरा हो जाता है, तब इसे विभिन्न प्रकार के सॉस और खास टॉपिंग्स के साथ गर्मागर्म ग्राहकों को परोसा जाता है।

बिक्री के आंकड़ों की बात करें तो विशाल के अनुसार उनके स्टॉल पर सबसे ज्यादा मांग क्लासिक चीज कॉर्न डॉग की रहती है। प्रतिदिन इस एक आइटम के 50 से लेकर 100 पीस तक बिक जाते हैं। युवाओं के साथ-साथ परिवार और बच्चे भी इस नए स्वाद को चाव से खा रहे हैं।

कम लागत में शुरुआत और भविष्य की योजनाएं

विशाल ने अपने इस काम की शुरुआत लगभग 50 हजार रुपए की लागत से की है। उनका यह स्टॉल रोजाना शाम 4:30 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहता है। स्टॉल पर पहुंचे नैतिक पटनायक नाम के एक ग्राहक ने बताया कि उन्होंने बोकारो में पहली बार कोरियन हॉट डॉग खाया और इसका कुरकुरा स्वाद उन्हें बेहद पसंद आया। सीमित पूंजी से सफल शुरुआत करने के बाद अब विशाल का अगला सपना भविष्य में अपना एक स्वतंत्र रेस्टोरेंट खोलने का है।

सवाल-जवाब

यह कोरियन हॉट डॉग स्टॉल बोकारो में कहां स्थित है?
यह स्टॉल बोकारो के सेक्टर-4 में संचालित किया जा रहा है।
स्टॉल के संचालन का समय क्या है?
यह स्टॉल हर दिन शाम 4:30 बजे से लेकर रात 9 बजे तक खुला रहता है।
स्टॉल पर कोरियन हॉट डॉग की शुरुआती कीमत क्या है?
यहां सबसे किफायती क्लासिक चीज कॉर्न डॉग 99 रुपए में मिलता है, जबकि अधिकतम कीमत 129 रुपए है।
स्टॉल पर सबसे ज्यादा बिकने वाली वेरायटी कौन सी है?
क्लासिक चीज कॉर्न डॉग की मांग सबसे ज्यादा है, जिसके रोजाना 50 से 100 पीस बिक जाते हैं।
विशाल को यह बिजनेस शुरू करने का विचार कहां से आया?
उन्हें यह आइडिया इंस्टाग्राम से मिला और रेसिपी उन्होंने यूट्यूब वीडियो देखकर सीखी।
इस स्टॉल को शुरू करने में कितनी लागत आई?
विशाल ने इस काम की शुरुआत लगभग 50 हजार रुपए के खर्च के साथ की थी।
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टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·3 दिन पहले

सिर्फ पचास हजार रुपए में ऐसा सेटअप और रोज सौ पीस निकल जाना थोड़ा मुश्किल लगता है। अगर सच में इतना मार्जिन है, तो दो-चार दिन में भीड़ संभालनी भारी पड़ जाएगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

यह खबर केवल एक खान-पान के स्टॉल की सफलता नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंटरनेट और सोशल मीडिया आधारित अर्थव्यवस्था के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। महज पचास हजार रुपये के शुरुआती निवेश से छोटे शहरों का युवा वर्ग वैश्विक ट्रेंड्स को अपनी आजीविका का साधन बना रहा है। यह मॉडल इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स किस तरह पारंपरिक रोजगार के दायरे से बाहर निकलकर स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास के नए रास्ते खोल रहे हैं, जो आने वाले समय में छोटे शहरों के सेवा क्षेत्र को एक नया आकार दे सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह घटना टियर-2 और टियर-3 शहरों में माइक्रो-एंटरप्रेन्योरशिप और डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते समावेशन का सशक्त उदाहरण है। महज़ 50,000 रुपये के शुरुआती निवेश से वैश्विक रुझान को स्थानीय बाज़ार में उतारना यह साबित करता है कि सोशल मीडिया अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पूंजी निर्माण और स्वरोजगार का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है। ऐसे उपक्रम आने वाले समय में छोटे शहरों के वित्तीय परिदृश्य और सेवा क्षेत्र को नई गति देंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया कैसे छोटे शहरों के युवाओं को आजीविका के नए अवसर दे रहे हैं। मात्र पचास हजार की पूंजी से शुरू हुआ यह उद्यम स्थानीय स्तर पर आर्थिक आत्मनिर्भरता की एक सकारात्मक तस्वीर पेश करता है। आने वाले समय में ऐसे अनौपचारिक व्यवसायों के विस्तार के लिए खाद्य सुरक्षा मानकों और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को सुगम बनाना आवश्यक होगा, ताकि यह स्टार्टअप सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सके।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

बोकारो के इस युवा उद्यमी की सफलता टियर-2 और टियर-3 शहरों में बदलते उपभोक्ता रुझानों को स्पष्ट करती है। मात्र पचास हजार के निवेश से शुरू हुआ यह मॉडल दर्शाता है कि डिजिटल साक्षरता और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किस प्रकार पारंपरिक रोजगार के दायरों से बाहर निकलकर आजीविका के नए रास्ते तैयार कर रहे हैं। हालांकि, ऐसे अनौपचारिक खाद्य स्टार्टअप्स की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए स्थानीय शहरी निकायों द्वारा सूक्ष्म उद्यम ऋण योजनाओं और आसान फिक्की-नुमा पंजीकरण की सुलभता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होगा, ताकि ये छोटे प्रयास बड़े आर्थिक बदलाव की नींव बन सकें।

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