यूट्यूब एक्सपर्ट के आसान टिप्स: प्रूनिंग और खास खाद से गुड़हल में आएंगे ढेरों फूलभारत NCAP सेफ्टी असेसमेंट में टाटा की इस इलेक्ट्रिक कार का जलवा, पंच ईवी को मिली 5 स्टार रेटिंगअमेरिकी आव्रजन एजेंसी आईसीई के नए अनुबंधों में डिटेंशन सेंटरों पर राज्य कानून लागू न होने का दावाडायबिटीज कंट्रोल और तेजी से वजन घटाने में असरदार है क्विनोआ-वेजिटेबल खिचड़ी, देखें पूरी रेसिपीग्लासगो में जैस्मीन लांबोरिया ने क्वार्टरफाइनल जीतकर पक्का किया 10वां पदक, मुक्केबाजी में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनग्लास्गो में भारतीय मुक्केबाजों का शानदार रिकॉर्ड, साक्षी और नरेंदर समेत 5 और खिलाड़ी सेमीफाइनल में पहुंचेकाठमांडू को क्यों कहते हैं मोमो का गढ़ और हर दिन इसे खाने के क्या हैं सेहत संबंधी खतरेन्यू मेक्सिको में ठंडे पड़े जिओथर्मल वेल को एआई और एडवांस ड्रिलिंग से मिला नया जीवनरात में बाइक चलाते वक्त कम दिख रही सड़क? रोशनी दोगुनी करने के लिए आजमाएं ये 5 असरदार तरीकेइथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के खिलाफ टाउनहॉल रोकने का आरोप, अरविंद केजरीवाल ने कहा पुलिस कार्रवाई से नहीं डरेगा देश
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कॉलेजियम की नियुक्ति प्रक्रिया RTI और न्यायिक समीक्षा से बाहरभारत
23 जून 2026, 7:05 am (37 दिन पहले)· 4

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कॉलेजियम की नियुक्ति प्रक्रिया RTI और न्यायिक समीक्षा से बाहर

जजों की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम के निर्णयों में अदालत कोई दखल नहीं देगी और यह प्रक्रिया RTI के दायरे में भी नहीं आती है।

जजों की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों के चयन के लिए अपनाई जाने वाली कॉलेजियम प्रणाली पूरी तरह न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है। शीर्ष अदालत ने साफ तौर पर कहा कि कॉलेजियम की चयन प्रक्रिया को सूचना के अधिकार यानी RTI के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती और न ही अदालत इस आंतरिक प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप करना चाहती है।

मामले की पृष्ठभूमि

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अवकाशकालीन पीठ हिमाचल प्रदेश के न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका पर विचार कर रही थी। अरविंद मल्होत्रा ने आरोप लगाया था कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट कॉलेजियम ने उनकी उम्मीदवारी को सही तरीके से नहीं देखा और हाईकोर्ट के जज पद के लिए उन्हें नजरअंदाज कर दिया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि 6 सितंबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उनकी योग्यता पर उचित विचार नहीं हुआ। उनके वकील बलबीर सिंह ने दलील दी कि पिछला फैसला सामूहिक निर्णय की बात करता है, न कि एकतरफा चयन की।

ये भी पढ़ें

न्यायिक समीक्षा का दायरा

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि वे कोई विवादों का नया पिटारा नहीं खोलना चाहते। पीठ ने स्पष्ट किया कि जजों का चयन कॉलेजियम की व्यक्तिपरक संतुष्टि (Subjective Satisfaction) पर निर्भर करता है। कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि किसी अधिकारी की वरिष्ठता का मतलब यह नहीं है कि उसे हाईकोर्ट का जज बनने का कानूनी अधिकार मिल गया है। अगर किसी जूनियर का नाम आगे बढ़ाया जाता है, तो वरिष्ठ अधिकारी को इसे अदालत में चुनौती देने का स्वतः अधिकार नहीं मिलता।

प्रक्रिया और भविष्य

अदालत ने दोहराया कि जब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम सभी दस्तावेजों और सरकारी सामग्री को परखकर अंतिम फैसला ले लेता है, तो उस निर्णय की शुद्धता पर बहस की कोई गुंजाइश नहीं बचती। गौरतलब है कि 2 जून को कॉलेजियम ने चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल को हाईकोर्ट जज के तौर पर मंजूरी दी थी। हालांकि, अदालत ने अरविंद मल्होत्रा को यह छूट दी है कि वे अपनी लंबित विभागीय जांच को तेजी से पूरा कराने के लिए संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। पीठ ने उन्हें धैर्य रखने की सलाह देते हुए कहा कि आप अभी युवा हैं, थोड़ा इंतजार करें।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम के निर्णयों पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉलेजियम द्वारा जजों की चयन प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा और RTI के दायरे से बाहर है।
अरविंद मल्होत्रा ने क्या आरोप लगाया था?
उन्होंने आरोप लगाया था कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट कॉलेजियम ने उनकी उम्मीदवारी को सही ढंग से नहीं देखा और उन्हें नजरअंदाज किया।
क्या वरिष्ठता के आधार पर जज बनना अनिवार्य है?
नहीं, अदालत ने कहा कि केवल वरिष्ठता किसी व्यक्ति को हाई कोर्ट का जज बनाए जाने का कानूनी अधिकार नहीं देती है।
अदालत ने अरविंद मल्होत्रा को क्या सलाह दी?
अदालत ने उन्हें धैर्य रखने और लंबित विभागीय जांच को शीघ्र पूरा कराने के लिए संबंधित हाई कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता दी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR