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त्रिपुरा में बिना पंजीकरण चल रहे 19 पुनर्वास केंद्रों पर कार्रवाई, स्वास्थ्य विभाग ने थमाया नोटिसत्रिपुरा
13 सित॰ 2026, 2:32 pm (44 दिन पहले)· 1

त्रिपुरा में बिना पंजीकरण चल रहे 19 पुनर्वास केंद्रों पर कार्रवाई, स्वास्थ्य विभाग ने थमाया नोटिस

त्रिपुरा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने 19 गैर-पंजीकृत निजी पुनर्वास केंद्रों को नोटिस जारी कर 7 दिनों में जवाब मांगा है। एक केंद्र में मरीज की मौत के बाद प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है।

त्रिपुरा राज्य में बिना किसी वैध पंजीकरण और तय सुरक्षा मानकों के चल रहे निजी पुनर्वास केंद्रों पर राज्य प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। त्रिपुरा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने नियम उल्लंघन के आरोप में 19 निजी पुनर्वास केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन सभी केंद्रों पर आरोप है कि वे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के तहत निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना ही नशा मुक्ति तथा मानसिक रोगों से ग्रस्त मरीजों का इलाज और पुनर्वास कर रहे थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत रूप से संचालित ऐसे संस्थानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

स्वप्ना फाउंडेशन और 18 अन्य संस्थानों को कारण बताओ नोटिस

प्राधिकरण द्वारा यह प्रशासनिक कार्रवाई 9 सितंबर को अमल में लाई गई। जिन 19 संस्थानों को नोटिस थमाया गया है, उनमें अगरतला के उजान अभयनगर स्थित स्वप्ना फाउंडेशन का नाम भी शामिल है। इस केंद्र पर बिना पंजीकरण के मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास सेवा संचालित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि संस्थान में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। प्राधिकरण ने स्वप्ना फाउंडेशन के प्रबंधन को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस मिलने की तिथि से केवल 7 दिनों का समय दिया है। उनसे पूछा गया है कि कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

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इसके साथ ही प्राधिकरण ने 18 अन्य निजी संगठनों को भी अलग से नोटिस जारी किए हैं। इन संस्थानों पर भी बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और वैध लाइसेंस के मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं व नशा मुक्ति कार्यक्रम चलाने के समान आरोप हैं। इन सभी 18 संस्थानों को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए 7 दिनों का समय दिया गया है। राज्य प्राधिकरण ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है या जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया जाता है, तो बिना कोई अतिरिक्त सूचना दिए एकतरफा कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

धारा 65(1) और 12 अनिवार्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन

मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 65(1) के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी के पास पंजीकृत हुए बिना किसी भी प्रकार का मानसिक स्वास्थ्य संस्थान चलाना कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि त्रिपुरा में नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्र चलाने वाली हर संस्था के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके अलावा, ऐसे सभी केंद्रों को अधिनियम के तहत तैयार की गई 12 मुख्य नियमावलियों का पूरी तरह से अनुपालन करना अनिवार्य बनाया गया है।

इन 12 अनिवार्य दिशा-निर्देशों में मरीजों की शारीरिक सुरक्षा, भोजन की गुणवत्ता, कमरों के तय मानक व आयाम, दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुगम पहुंच और बायोमेडिकल कचरे का सुरक्षित निपटान शामिल हैं। विभाग द्वारा हाल ही में किए गए निरीक्षणों और जमीनी जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कई निजी केंद्र इन बुनियादी मानकों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे थे। इससे वहां भर्ती मरीजों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और बुनियादी अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। अधिकारियों का कहना है कि दी गई समयावधि में कमियों को दूर न करने वाले केंद्रों के खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कदम उठाए जाएंगे।

कार्रवाई का मुख्य कारण: नशामुक्त केंद्र में युवक की मौत और गिरफ्तारियां

निजी पुनर्वास केंद्रों पर यह कड़ी निगरानी और कानूनी शिकंजा राज्य में हाल ही में घटी एक दुखद घटना के बाद कसा गया है। दरअसल, एक निजी नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती एक युवक के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। इस वारदात के सामने आने के बाद राज्य के निजी पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली की व्यापक जांच शुरू हुई।

इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए त्रिपुरा पुलिस ने चालू महीने की शुरुआत में एक निजी नशा मुक्ति केंद्र के मालिक समेत कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में स्वप्ना फाउंडेशन ड्रग डी-एडिक्शन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर का मालिक शुभम बिस्वास और संस्थान के कई कर्मचारी शामिल हैं।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शहाना दास भट्टाचार्जी ने 16 अगस्त को एनसीसी पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति तुहिनसुभ्र भट्टाचार्जी को 9 अगस्त को इस केंद्र में भर्ती कराया गया था, जहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल अगरतला गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड गोविंद वल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से ही राज्य भर के पुनर्वास केंद्रों की सुरक्षा और उनकी वैधता को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है।

सवाल-जवाब

त्रिपुरा में कितने पुनर्वास केंद्रों को नोटिस जारी किया गया है?
त्रिपुरा राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण ने बिना पंजीकरण और नियमों के उल्लंघन पर 19 निजी पुनर्वास केंद्रों को नोटिस जारी किया है।
पुनर्वास केंद्रों को जवाब देने के लिए कितना समय दिया गया है?
सभी 19 पुनर्वास केंद्रों को नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 7 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है।
कानून के किस प्रावधान के तहत यह नोटिस भेजा गया है?
यह कार्रवाई मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 की धारा 65(1) के तहत की गई है, जो बिना पंजीकरण के ऐसे केंद्र चलाने को प्रतिबंधित करती है।
किस घटना के बाद प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया?
स्वप्ना फाउंडेशन नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती मरीज तुहिनसुभ्र भट्टाचार्जी की कथित मारपीट के बाद हुई मौत के मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन हरकत में आया।
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