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उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव का प्रचार थमा, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने झोंकी पूरी ताकतउत्तर प्रदेश
21 अक्तू॰ 2026, 7:30 pm (7 दिन पहले)· 4

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव का प्रचार थमा, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने झोंकी पूरी ताकत

उत्तर प्रदेश की 11 शिक्षक और स्नातक एमएलसी सीटों के लिए चुनाव प्रचार बुधवार को समाप्त हो गया है। इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा और 27 अक्टूबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों का प्रचार अभियान बुधवार को आधिकारिक रूप से थम गया है। राज्य के कुल 11 निर्वाचन क्षेत्रों में शिक्षक और स्नातक खंड के एमएलसी पदों के लिए यह मुकाबला हो रहा है। इन चुनावों के लिए मतदान की तिथि 23 अक्टूबर तय की गई है, जबकि डाले गए वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को पूरी की जाएगी। निर्वाचन प्रक्रिया में इस बार भी मतपत्रों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज बनी हुई है।

इन 11 सीटों पर होना है मतदान

कुल ग्यारह विधान परिषद सीटों में से पांच सीटें स्नातक निर्वाचन खंड से जुड़ी हैं, जबकि शेष छह सीटें शिक्षक निर्वाचन खंड के अंतर्गत आती हैं। स्नातक खंड की सीटों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी क्षेत्र शामिल हैं। दूसरी ओर शिक्षक खंड की सीटों में लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद निर्वाचन क्षेत्र आते हैं। ये सभी निर्वाचन क्षेत्र मिलकर उत्तर प्रदेश के कुल 75 जिलों को पूरी तरह से कवर करते हैं।

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भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की पूरी ताकत

इन एमएलसी चुनावों में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद, गोरखपुर, वाराणसी, आगरा, मिर्जापुर और बरेली समेत सभी ग्यारह सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में चुनावी सभाएं की हैं। इसके अलावा दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ-साथ सरकार के कई अन्य मंत्री और भाजपा विधायक भी चुनाव मैदान में सक्रिय रूप से डटे रहे हैं।

पिछले चुनाव के आंकड़े और मतदाताओं की योग्यता

गौरतलब है कि पिछले विधान परिषद चुनावों में इन ग्यारह सीटों में से समाजवादी पार्टी ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी के खाते में पांच सीटें आई थीं। इन चुनावों की प्रक्रिया आम विधानसभा चुनावों से काफी भिन्न होती है क्योंकि इसमें केवल वही लोग वोट डाल सकते हैं जो बतौर शिक्षक या स्नातक विधिवत पंजीकृत और पात्र हैं। हालांकि विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हो रहे इन विधान परिषद चुनावों को राजनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समाजवादी पार्टी ने बदले अपने उम्मीदवार

चुनाव प्रचार के अंतिम चरणों में समाजवादी पार्टी ने ऐन वक्त पर अपने दो प्रत्याशी बदलकर सबको चौंका दिया। पार्टी ने डॉक्टर आकाश अग्रवाल और डॉक्टर संजय त्रिपाठी को अपनी सदस्यता दिलाने के बाद तत्काल चुनावी मैदान में उतार दिया। पार्टी ने गोरखपुर-फैजाबाद डिवीजन शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉक्टर संजय त्रिपाठी को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है, जबकि डॉक्टर आकाश अग्रवाल को आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रत्याशी के रूप में टिकट दिया गया है।

पहले के उम्मीदवारों को लेकर नेतृत्व का रुख

प्रत्याशी बदलने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि पार्टी ने आपसी विचार-विमर्श के बाद यह सामूहिक निर्णय लिया है कि ये दोनों ही नेता चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि जिन लोगों के नाम पहले घोषित किए गए थे, उनकी पूरी सहमति और आपसी सहयोग से ही यह बदलाव किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी जगह दूसरों को मौका देने वाले दोनों साथियों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

सवाल-जवाब

यूपी में एमएलसी चुनाव के लिए प्रचार कब खत्म हुआ?
यूपी में एमएलसी चुनाव का प्रचार बुधवार को समाप्त हो गया है।
एमएलसी चुनाव के लिए मतदान कब होगा?
इन चुनावों के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग की जाएगी।
वोटों की गिनती किस तारीख को होगी?
डाले गए वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को की जाएगी।
कुल कितनी सीटों पर चुनाव हो रहे हैं?
उत्तर प्रदेश की कुल 11 सीटों पर शिक्षक और स्नातक खंड के एमएलसी चुनाव हो रहे हैं।
इन चुनावों में किस प्रकार मतदान कराया जा रहा है?
इन चुनावों में वोट डालने के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
समाजवादी पार्टी ने किन उम्मीदवारों को ऐन मौके पर टिकट दिया?
सपा ने डॉक्टर आकाश अग्रवाल और डॉक्टर संजय त्रिपाठी को पार्टी में शामिल कर टिकट दिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·7 दिन पहले

चुनाव से ठीक पहले अचानक दो उम्मीदवार बदल देना थोड़ा अजीब लगा। अगर रणनीति पहले से पक्की होती तो अंत समय में ऐसा फेरबदल क्यों करना पड़ता?

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

एमएलसी चुनाव का प्रचार तो थम गया, लेकिन स्नातक और शिक्षक सीटों का यह मुकाबला आम विधानसभा से कम कड़ा नहीं है। 27 को आने वाले नतीजे बताएंगे कि जमीन पर किसकी पकड़ मजबूत है।

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा। पिछली बार जब मैं लखनऊ में था, तब भी शिक्षक सीटों पर ऐसा ही घमासान देखा था, यहाँ वोटिंग का गणित वाकई अलग होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

चुनाव से ठीक पहले दो उम्मीदवार बदलना कौन सा मास्टरस्ट्रोक है, आखिरी वक्त में तो पार्टी की भगदड़ ही लगती है!

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं लखनऊ कवरेज के सिलसिले में गया था, तो देखा था कि अंतिम समय की ऐसी उथल-पुथल से कैडर का उत्साह काफी टूट जाता है।

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