देश की राजधानी में जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर एक और बड़ी और दमनकारी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसके लिए नई दिल्ली इलाके में असामान्य रूप से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए धरने पर बैठे युवाओं की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर लगातार डटे हुए हैं।
कनाट प्लेस में बंदी और भारी पुलिस बल
प्रशासनिक कदमों की ओर ध्यान दिलाते हुए अरविंद केजरीवाल ने बताया कि आज शाम 6.30 pm तक कनाट प्लेस की सभी दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बंद करने के सख्त आदेश जारी किए गए हैं। देश के सबसे व्यस्त, ऐतिहासिक और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में से एक को इस तरह अचानक शाम के समय बंद करवाने से पूरे इलाके में एक अज्ञात भय और तनाव का माहौल बन गया है। केजरीवाल के अनुसार, न केवल बाजार बंद करवाए जा रहे हैं, बल्कि पूरे इलाके में जबरदस्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के भारी जमावड़े के अलावा वहां बड़ी संख्या में एम्बुलेंस भी स्टैंडबाय पर खड़ी की गई हैं। यह पूरी तैयारी किसी बड़ी आपातकालीन स्थिति या व्यापक पुलिस कार्रवाई की ओर स्पष्ट इशारा करती है।
केंद्र सरकार पर 'हमले' का सीधा आरोप
अपने आधिकारिक हैंडल से जमीनी हालात का ब्यौरा देते हुए केजरीवाल ने सीधा निशाना केंद्र की सत्ताधारी पार्टी पर साधा है। उन्होंने जंतर मंतर पर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे युवाओं को देश के बच्चे बताते हुए चिंता जताई कि क्या पुलिस बल का इस्तेमाल करके उनकी आवाज को कुचला जाएगा। उन्होंने अपनी पोस्ट में एक बेहद तल्ख और सवालिया लहजे में लिखा, "क्या मोदी सरकार आज फिर जंतर मंतर पर अपने बच्चों पर बर्बर हमला करेगी?" इस बयान के जरिए उन्होंने न केवल आज की भारी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पिछले दिनों हुई कार्रवाइयों की याद दिलाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश भी की है।
सोशल मीडिया पर जनता की तीखी प्रतिक्रिया
केजरीवाल के इस बयान के इंटरनेट पर आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की त्वरित और तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ उपयोगकर्ताओं ने पुलिस द्वारा आम लोगों को डराने और झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियों का आरोप लगाते हुए उनके बयान का समर्थन किया है। हालांकि, एक बहुत बड़ा वर्ग केजरीवाल की आलोचना करते हुए उन पर पलटवार कर रहा है। कई लोगों ने उन्हें पंजाब के खन्ना में हुए उस वाकये की याद दिलाई, जहां अपने 6 से 8 महीने के बकाया वेतन की मांग कर रहे सरकारी कर्मचारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया था, और उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। आलोचकों का साफ कहना है कि वे छात्रों के इस संवेदनशील विरोध प्रदर्शन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी राजनीति के लिए कर रहे हैं, और शांतिपूर्ण माहौल को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं।


























