अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले बड़े अपराधी नवप्रीत सिंह को तुर्किए से भारत प्रत्यर्पित करा लिया गया है। सीमा पार से भारत में भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले इस कुख्यात तस्कर की लंबे समय से भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तलाश थी। विदेश में बैठकर अपना नेटवर्क चला रहे इस अपराधी को वापस लाकर कानून के शिकंजे में कसना देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और कानूनी सफलता माना जा रहा है।
फर्जी पहचान बनाकर हासिल की थी विदेशी नागरिकता
जांच और सुरक्षा से जुड़े विवरण के अनुसार, नवप्रीत सिंह ने तुर्किए में नवाब विर्क नाम से एक फर्जी पहचान बना रखी थी। इसी जाली दस्तावेज और नए नाम के दम पर उसने वहां की नागरिकता भी हासिल कर ली थी ताकि वह भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच से दूर रह सके। विदेशी सरजमीं पर छिपकर रहने के बावजूद वह लगातार अवैध गतिविधियों में सक्रिय था और वहां से भारत में घातक नशीली दवाओं की खेप भेज रहा था।
हेरोइन और मेथमफेटामाइन के अवैध धंधे का संचालन
नवप्रीत सिंह मुख्य रूप से हेरोइन और मेथमफेटामाइन जैसे खतरनाक रासायनिक व पारंपरिक नशीले पदार्थों के सिंडिकेट से जुड़ा हुआ था। वह विदेशी ठिकानों से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता था और भारत के विभिन्न हिस्सों में इन प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाय करवाता था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का सीधा असर युवाओं और आंतरिक सुरक्षा पर पड़ता है, इसलिए इसके मुख्य कर्ताधर्ता को हिरासत में लेना बेहद आवश्यक था।
अमित शाह ने अभियान को बताया ऐतिहासिक मील का पत्थर
इस बड़ी सफलता के बाद अमित शाह ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि तुर्किए से नवप्रीत सिंह का प्रत्यर्पण करवाकर सरकार ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। उन्होंने रेखांकित किया कि जाली पहचान के सहारे छिपकर हेरोइन और मेथमफेटामाइन की तस्करी करने वाले इस शातिर अपराधी की वापसी कानून के राज को मजबूत करती है। कड़े प्रयासों और वैश्विक समन्वय के चलते यह कार्रवाई पूरी हो सकी है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर आम नागरिकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई। कई लोगों ने अंतरराष्ट्रीय समन्वय और नशा तस्करी पर सख्त नीति की सराहना करते हुए इसे युवाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने आंतरिक सुरक्षा, दबाव समूहों की गतिविधियों और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की।


























