चेन्नई में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति, चुनावी पारदर्शिता और नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हाल ही में हुए घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने के लिए प्रशासनिक ताकत का अनुचित इस्तेमाल किया जा रहा है।
नई दिल्ली के प्रदर्शन और पाबंदियों का उठाया मुद्दा
राहुल गांधी ने नई दिल्ली में छात्रों के आंदोलन के दौरान बने हालात को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पूरे शहर में कड़े प्रतिबंध लगाए गए, जिसके तहत कई इलाकों में आवाजाही रोकी गई और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे छात्र समूहों पर पुलिस बल का प्रयोग हुआ और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया।
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और चुनावी व्यवस्था पर सवाल
चेन्नई के मंच से बोलते हुए कांग्रेस नेता ने देश की चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रियाओं में हेरफेर करके और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का दमन करके लोकतांत्रिक ढांचे की नींव कमजोर की जा रही है। राहुल गांधी ने फिल्मी चरित्र का संदर्भ देते हुए प्रधानमंत्री के कामकाज के तरीके की तुलना 'मोगैम्बो' से की और कहा कि सत्ता के नशे में जनता के असंतोष को नजरअंदाज किया जा रहा है।
आंदोलनों से जुड़े आरोपों और सुरक्षा कारणों पर चर्चा
कार्यक्रम और सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि भय का माहौल बनाकर युवाओं को डराने की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने और जनता की आवाज दबाने जैसे कृत्यों की भारी राजनीतिक और नैतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। दूसरी तरफ, राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का तर्क रहा है कि पूर्व के प्रदर्शनों में हुई गड़बड़ियों और कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए गए थे।
जनता की प्रतिक्रिया
इस बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद जनता के बीच मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई नागरिकों और समर्थकों ने छात्रों पर हुई कार्रवाई और इंटरनेट पाबंदियों का कड़ा विरोध करते हुए राहुल गांधी के रुख का समर्थन किया, वहीं आलोचकों ने इसे कानून-व्यवस्था बहाल रखने वाली पुलिस कार्रवाई पर बेवजह की राजनीति और आपत्तिजनक बयानबाजी करार दिया।

























