देश की राजधानी में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है क्योंकि विपक्षी गठबंधन ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक एक विशाल और शांतिपूर्ण मार्च निकालने की योजना तैयार की है। कांग्रेस पार्टी ने इस बड़े विरोध प्रदर्शन को दूसरी आजादी की लड़ाई करार देते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए नागरिकों को एकजुट होने का संदेश दिया है। राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं।
राहुल गांधी की सार्वजनिक अपील
इस प्रस्तावित मार्च को लेकर राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि 12 अक्टूबर को पूरा देश एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से देश की शीर्ष अदालत की तरफ बढ़ेगा। उन्होंने इस प्रदर्शन में छात्रों, नागरिक अधिकार संगठनों और तमाम विपक्षी दलों से सीधे तौर पर भागीदारी निभाने की अपील की है। अपने संदेश में उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा करने का स्पष्ट आह्वान करते हुए एकजुटता पर जोर दिया।
विपक्षी दलों की लामबंदी और उद्देश्य
विपक्षी गठबंधन के घटक दल इस प्रदर्शन के जरिए कई ज्वलंत मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि वर्तमान माहौल में सांविधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं को बचाना बेहद जरूरी हो चुका है। इसी रणनीति के तहत राजधानी के प्रमुख मार्गों से होते हुए शीर्ष अदालत तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की रूपरेखा बनाई गई है ताकि व्यापक जनसमर्थन जुटाया जा सके।
जनता की प्रतिक्रिया
इस बड़े मार्च के आह्वान पर सोशल मीडिया पर लोगों की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। जहां कई समर्थकों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस कदम का जोरदार स्वागत किया, वहीं अन्य उपयोगकर्ताओं ने राजधानी में कानून व्यवस्था और आम नागरिकों की आवाजाही को लेकर सवाल उठाए।



























