बिहार के कई जिलों में उफनती नदियों और टूटे तटबंधों ने विकराल रूप ले लिया है, जिससे लाखों नागरिकों का जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। भारी बारिश और पड़ोसी देश नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार आ रहे पानी के कारण प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इस जलप्रलय के बीच सैकड़ों ग्रामीण इलाकों में पानी भर चुका है, कई जगह बस्तियों का मुख्य मार्गों से संपर्क कट गया है और बड़े पैमाने पर लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं।
कई जिलों में तटबंध टूटने से बिगड़े हालात
उत्तर बिहार और सीमावर्ती क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से कई स्थानों पर सुरक्षा बांध जवाब दे गए हैं। गोपालगंज में रिंग बांध टूटने और बेतिया के पास चंपारण तटबंध का करीब 200 फीट हिस्सा बह जाने से गंडक का तेज बहाव रिहायशी बस्तियों में फैल गया। वैशाली में भी 25 फीट रिंग बांध टूटने से लगभग 400 घरों में पानी घुस गया। इसके अलावा, पुनपुन नदी के बढ़ते दबाव के बीच ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभालते हुए बांस और बोरियों की मदद से तेज धार को रोकने का प्रयास किया। राज्य के करीब 11 जिलों में 16 लाख से अधिक आबादी इस आपदा से गंभीर रूप से प्रभावित बताई जा रही है, जबकि राजधानी पटना में गंगा नदी के जलस्तर ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बागमती नदी के तेज बहाव में करीब 50 फीट सड़क बह जाने से कई गांवों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है और लोगों को आने-जाने के लिए नावों अथवा जोखिम भरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने आपदा और मौतों पर जताया गहरा दुख
बाढ़ के इस गंभीर संकट के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य में बाढ़ फिर से भारी तबाही लेकर आई है, जिसके चलते लाखों लोग संकट में हैं और सैकड़ों गांव पानी में डूब चुके हैं। कई लोगों की जान जाने और लापता होने की दुखद घटनाओं पर उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपना समर्थन जताया। राहुल गांधी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि यह कोई नया संकट नहीं है बल्कि हर साल आने वाली ऐसी विपदा है जो भारी जनहानि और बर्बादी लेकर आती है।
बिहार का भौगोलिक परिचय और नदियों का तंत्र
बिहार भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से के मध्य में बसा एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है, जिसकी राजधानी पटना है। जनसंख्या के लिहाज से यह देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, जबकि क्षेत्रफल के मामले में यह बारहवें स्थान पर आता है। वर्ष 2000 में इसके दक्षिणी भाग को अलग कर झारखंड राज्य का गठन किया गया था। बिहार के उत्तर में नेपाल, दक्षिण में झारखंड, पूर्व में पश्चिम बंगाल और पश्चिम में उत्तर प्रदेश की सीमाएं लगती हैं। यह पूरा क्षेत्र गंगा और उसकी सहायक नदियों के बेहद उपजाऊ मैदानी इलाके में स्थित है, जहां गंगा नदी पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। यही सघन नदी तंत्र मानसूनी बारिश के दौरान अक्सर विकराल रूप ले लेता है।
जनता की प्रतिक्रिया
इस संकट और बयानों पर आम लोगों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई नागरिकों ने बाढ़ पीड़ितों तक तुरंत चिकित्सा दल, दवाइयां और स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की मांग की, जबकि अन्य लोगों ने हर साल दोहराई जाने वाली इस त्रासदी के लिए मजबूत जल प्रबंधन और स्थायी नीतिगत समाधान तैयार करने पर बल दिया।


























