फरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगाझुंझुनू में तेज रफ्तार थार ने बरपाया कहर, तीन राहगीरों को कुचलने के बाद चालक फरारकोडरमा में बैग का कारोबार कैसे शुरू करें, जानिए निवेश से लेकर संभावित मुनाफे का पूरा गणितरॉबिनहुड के साथ रिपल की नई साझेदारी के बीच 1.33 डॉलर पर थमी एक्सआरपी की बढ़तसेबू में रक्षा सहयोग मजबूत करने पर भारत और फिलीपींस के बीच बनी सहमतिनागौर में मूंछों वाले नाचते बालाजी से लेकर एक आंख वाली प्रतिमा तक, जानिए इन प्रसिद्ध धामों का इतिहासराजौरी में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामदब्रिटिश पाउंड में लगातार चौथे दिन फिसलन, 1.3300 के स्तर पर टिका स्टर्लिंगसर्दियों में दुधारू मवेशियों के घटते दूध से बचाएंगे ये जरूरी उपाय, जाने बचाव और खानपान की सही तकनीक
ग्वादर के रास्ते INSTC में दाखिल होने की फिराक में पाकिस्तान, रूस ने बढ़ाया हाथ — समझिए भारत के लिए इसके मायनेपाकिस्तान
13 जून 2026, 4:38 am (138 दिन पहले)· 0

ग्वादर के रास्ते INSTC में दाखिल होने की फिराक में पाकिस्तान, रूस ने बढ़ाया हाथ — समझिए भारत के लिए इसके मायने

जिस ट्रेड कॉरिडोर को भारत ने ईरान और रूस के साथ मिलकर पाकिस्तान को किनारे करने के लिए खड़ा किया था, अब उसी INSTC में ग्वादर पोर्ट के जरिए घुसने की कोशिश पाकिस्तान कर रहा है और रूस इसका समर्थन कर रहा है।

एक ऐसा व्यापारिक रास्ता, जिसे भारत ने सोच-समझकर पाकिस्तान को बाहर रखने के मकसद से तैयार किया था, अब वही पाकिस्तान की प्राथमिकता बन गया है। इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC में दाखिल होने के लिए इस्लामाबाद रास्ते तलाश रहा है, और हैरानी की बात यह है कि भारत का पुराना साझेदार रूस इस कोशिश के पीछे खुलकर खड़ा दिख रहा है।

पाकिस्तान का इरादा और रूस का साथ

पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री सरदार अवैस अहमद खान लेघारी ने एक वेबिनार के दौरान साफ कहा कि उनका देश INSTC का हिस्सा बनना चाहता है। उन्होंने रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्सी ओवरचुक के उस बयान की तारीफ की, जिसमें पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को इस कॉरिडोर से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था। यानी जिस गलियारे की बुनियाद ही पाकिस्तान को दरकिनार करने पर रखी गई थी, अब उसमें सेंध लगाने की पूरी तैयारी चल रही है।

ये भी पढ़ें

आखिर है क्या यह INSTC

यह करीब 7200 किलोमीटर लंबा एक मल्टी-मोडल व्यापारिक नेटवर्क है, जिसमें समुद्री, रेल और सड़क — तीनों तरह के रास्ते शामिल हैं। इसकी पूरी सोच यही है कि भारत, ईरान, रूस, मध्य एशिया और उत्तरी यूरोप के बीच माल की आवाजाही तेज भी हो और सस्ती भी। भारत इस परियोजना के संस्थापक देशों में गिना जाता है और ईरान के चाबहार पोर्ट के जरिए इसे आगे बढ़ा रहा है। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यही रहा है कि पाकिस्तान को बीच में लाए बगैर मध्य एशिया और रूस तक सीधी पहुंच बन जाती है।

ग्वादर के जरिए घुसने की कोशिश क्यों

पाकिस्तान चाहता है कि ग्वादर पोर्ट इस नेटवर्क की चाबी बन जाए। ग्वादर पहले से ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे CPEC और चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव BRI का अहम केंद्र है। ऐसे में अगर रूस की योजना के मुताबिक ग्वादर को INSTC से जोड़ दिया गया, तो चीन, पाकिस्तान और रूस के बीच एक नया और मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क आकार ले सकता है। यही वजह है कि यह खबर रणनीतिक नजरिए से अहम मानी जा रही है।

क्या भारत की बढ़त पर असर पड़ेगा

फौरी तौर पर ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा, फिर भी यह घटनाक्रम भारत को रणनीतिक रूप से सतर्क रहने का इशारा जरूर देता है। INSTC की असली रीढ़ आज भी भारत-ईरान-रूस का रास्ता ही है। ईरान का चाबहार पोर्ट इस परियोजना का केंद्रीय हिस्सा बना हुआ है, जहां भारत ने भारी निवेश किया है और उसकी रणनीतिक अहमियत ज्यों की त्यों कायम है। हां, पाकिस्तान की यह कवायद इतना जरूर बताती है कि वह खुद को क्षेत्रीय व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने के लिए नए दरवाजे खटखटा रहा है।

भारत के पास और भी विकल्प

जानकारों की राय में कनेक्टिविटी की इस होड़ में भारत किसी एक परियोजना के भरोसे नहीं बैठा है। उसके पास विशाल घरेलू बाजार, मजबूत समुद्री नेटवर्क, हिंद महासागर में दबदबा, पश्चिम एशिया से गहरे रिश्ते और कई वैकल्पिक कनेक्टिविटी परियोजनाएं मौजूद हैं। इसके साथ ही भारत, मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे IMEC जैसी बड़ी योजनाओं पर भी काम कर रहा है, जिन्हें आने वाले समय के व्यापारिक मार्गों के तौर पर देखा जा रहा है।

रूस-पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी

लेघारी ने यह भी बताया कि रूस और पाकिस्तान 2030 तक के लिए एक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर दस्तखत करने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तान और रूस के संबंध 'अनफ्रेंडली कंट्री' के दर्जे से निकलकर 'ट्रस्टेड फ्रेंड' तक पहुंच गए हैं। दोनों देश संयुक्त राष्ट्र और शंघाई सहयोग संगठन SCO जैसे मंचों पर भी आपसी तालमेल लगातार बढ़ा रहे हैं।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp