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विदेशी विमान उड़ाकर भारतीय सीमा में दाखिल नहीं हो सकते पाकिस्तानी पायलट, नियमों का कड़ा चक्रव्यूहपाकिस्तान
1 अक्तू॰ 2026, 7:00 pm (23 मिनट पहले)· 0

विदेशी विमान उड़ाकर भारतीय सीमा में दाखिल नहीं हो सकते पाकिस्तानी पायलट, नियमों का कड़ा चक्रव्यूह

फ्लाईदुबई विमान में कॉकपिट विवाद के बाद उठे सवालों के बीच भारतीय विमानन और वीजा कानूनों की पड़ताल सामने आई है। एयरस्पेस प्रतिबंधों और कड़े इमिग्रेशन नियमों के चलते पाकिस्तानी पासपोर्ट धारक पायलटों का भारत आना व्यावहारिक रूप से असंभव है।

दुबई से इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान में कॉकपिट के भीतर हुई हिंसक झड़प की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नागरिक उड्डयन सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। इस घटना में ओमान के रहने वाले एक को-पायलट की हरकतों के चलते विमान में सवार 174 यात्रियों की जान पर गंभीर संकट खड़ा हो गया था। इस अभूतपूर्व विवाद के सामने आने के बाद दुनिया भर के कई देशों के विमानन नियमों की पड़ताल शुरू हो गई है। इसी पृष्ठभूमि में भारत को लेकर भी यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या किसी तीसरी या विदेशी एयरलाइन में सेवारत पाकिस्तानी नागरिक पायलट के तौर पर भारत के लिए विमान उड़ाकर ला सकता है। भारत के नागरिक उड्डयन नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि तकनीकी या कागजी बारीकियों से परे, व्यावहारिक धरातल पर ऐसे किसी भी प्रयास को देश के आव्रजन और कूटनीतिक नियम पूरी तरह नामुमकिन बना देते हैं।

फ्लाईदुबई के कॉकपिट में मची 30 सेकंड की अफरातफरी

इस पूरे मामले की शुरुआत 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ1073 के दौरान हुई, जिसने दुबई से उड़ान भरी थी और उसका गंतव्य इजराइल का प्रमुख शहर तेल अवीव था। इस वाणिज्यिक विमान के मुख्य कमांडर के रूप में भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मछार कमान संभाल रहे थे, जबकि उनके साथ सह-पायलट की सीट पर ओमान का एक नागरिक तैनात था। उड़ान जब अपने तय मार्ग पर आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मछार पर शारीरिक हमला बोल दिया। इस अप्रत्याशित हमले के कारण विमान का संतुलन तत्काल बिगड़ गया और महज 30 सेकंड के भीतर विमान करीब 14,000 फीट नीचे गिर गया, जिससे पूरे केबिन में हड़कंप मच गया।

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खतरे की इस नाजुक घड़ी में कैप्टन स्मित मछार ने तुरंत सूझबूझ दिखाई और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही केबिन क्रू और यात्रियों ने असाधारण साहस का परिचय दिया और अंदर घुसकर आक्रामक को-पायलट को मजबूती से दबोच लिया। उसी विमान में यात्री के रूप में सफर कर रहे फ्लाईदुबई के ही दो अन्य ऑफ-ड्यूटी पायलटों की मौजूदगी भी बेहद मददगार साबित हुई। उन दोनों की सहायता से स्थिति को काबू में लाया गया और विमान को आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित रूप से सऊदी अरब में उतारा गया। बाद में सभी 174 यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एक वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की गई, जिसके जरिए उन्हें इजराइल रवाना किया गया।

इजराइल का सुरक्षा प्रोटोकॉल और ओमान पर उठा विवाद

इस खतरनाक घटना के सामने आते ही इजराइल के भीतर विमानन सुरक्षा और कानूनी जवाबदेही को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। वहां मुख्य रूप से यह मुद्दा गहरा गया है कि क्या ओमान के किसी नागरिक को संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल के बीच संचालित होने वाले किसी यात्री विमान के कॉकपिट में बैठने की इजाजत दी जा सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए इजराइल की परिवहन मंत्री मिरी रेगेव ने तत्काल जांच का आदेश दिया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फ्लाईदुबई ने दोनों देशों के बीच हुए नागरिक उड्डयन समझौते की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन किया था या नहीं।

दोनों देशों के द्विपक्षीय समझौते के अंतर्गत पायलटों के पासपोर्ट को लेकर बेहद स्पष्ट प्रावधान तय किए गए हैं। इन नियमों के अनुसार इजराइल की ओर उड़ान भरने वाले विमानों के कॉकपिट क्रू के पास केवल उन्हीं देशों के वैध पासपोर्ट होने चाहिए, जिनके इजराइल के साथ पूर्ण और औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित हैं। चूंकि ओमान और इजराइल के बीच किसी प्रकार के औपचारिक कूटनीतिक संबंध मौजूद नहीं हैं, इसलिए एक ओमानी पायलट को इस संवेदनशील मार्ग पर तैनात किया जाना इजराइली सुरक्षा मानकों और तय विमानन प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।

भारतीय हवाई क्षेत्र के प्रतिबंध और विमान की रजिस्ट्री का नियम

जब इस तरह की स्थिति का भारत के संदर्भ में आकलन किया जाता है, तो यहां के कानूनी और प्रशासनिक ढांचे की रूपरेखा इजराइल से काफी अलग नजर आती है। भारत में किसी विदेशी उड़ान के आगमन अथवा उसके भारतीय आसमान से गुजरने का फैसला मुख्य रूप से दो अलग-अलग व्यवस्थाओं पर टिका होता है। इनमें से पहला पहलू एयरस्पेस प्रतिबंध यानी नोटम (NOTAM) से जुड़ा है, जबकि दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू देश के आव्रजन तथा वीजा कानून से संबंधित है।

भारत ने सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान के खिलाफ एयरस्पेस प्रतिबंध लागू किए हुए हैं। इस लिखित निर्देश में स्पष्ट उल्लेख है कि पाकिस्तान में पंजीकृत किसी भी विमान को भारतीय हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की कतई अनुमति नहीं है। इसके अलावा कोई भी ऐसी उड़ान, जिसे किसी पाकिस्तानी एयरलाइन द्वारा संचालित किया जा रहा हो, चाहे वह उनका खुद का विमान हो या फिर लीज अथवा किराए पर लिया गया विमान, वह भारत के आसमान से होकर नहीं गुजर सकती। इस व्यवस्था का मुख्य जोर विमान के पंजीकरण और उसका संचालन करने वाली एयरलाइन कंपनी पर रहता है।

लिखित एयरस्पेस प्रतिबंधों में सीधे तौर पर किसी पायलट की व्यक्तिगत नागरिकता का उल्लेख नहीं मिलता है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी गैर-पाकिस्तानी देश जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कतर या किसी यूरोपीय देश की एयरलाइन का विमान भारत आ रहा है और वह विमान पाकिस्तान में पंजीकृत नहीं है, तो केवल हवाई क्षेत्र से जुड़े तकनीकी नियम उस विमान को रास्ते से गुजरने या भारतीय जमीन पर उतरने से सीधे तौर पर नहीं रोकते, भले ही उसका पायलट वैध अंतरराष्ट्रीय लाइसेंस धारक पाकिस्तानी नागरिक क्यों न हो। लेकिन यह व्यवस्था सिर्फ एक पहलू है, क्योंकि असली रोक इसके बाद शुरू होती है।

इमिग्रेशन और क्रू वीजा की सख्त दीवार

कागजी तौर पर एयरस्पेस का तकनीकी दायरा भले ही पायलट की नागरिकता पर केंद्रित न हो, लेकिन किसी भी पाकिस्तानी पायलट का भारत में विमान उतारना या किसी उड़ान को लेकर भारतीय सीमा में दाखिल होना व्यावहारिक तौर पर पूरी तरह असंभव है। इसकी सबसे बुनियादी और अभेद्य वजह भारत के बेहद सख्त आव्रजन और वीजा कानून हैं, जो किसी भी बाहरी नागरिक के देश में प्रवेश को नियंत्रित करते हैं।

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक और रक्षात्मक मोर्चों पर कई कड़े फैसले लिए थे। इन कदमों के तहत भारत ने 24 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों के लिए अपनी तमाम वीजा सेवाएं पूरी तरह निलंबित कर दी थीं। इसके तुरंत बाद सख्ती को और बढ़ाते हुए 27 अप्रैल 2025 से पूर्व में जारी किए गए सभी पाकिस्तानी वीजा भी पूरी तरह रद्द कर दिए गए थे। इसके साथ ही पाकिस्तानी नागरिकों को सार्क (SAARC) वीजा छूट योजना के तहत मिलने वाली यात्रा संबंधी सभी सुविधाएं भी पूरी तरह समाप्त कर दी गई थीं।

जब भी किसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन का कोई विमान भारतीय हवाई अड्डे पर उतरता है, तो उसके पूरे ऑपरेटिंग क्रू और पायलटों को अनिवार्य रूप से भारत सरकार से क्रू वीजा, आव्रजन क्लीयरेंस और सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करनी होती है। मौजूदा कड़े प्रावधानों के तहत किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को भारतीय वीजा या क्रू-एंट्री परमिट जारी करने का कोई प्रावधान ही नहीं है। इस तरह इमिग्रेशन स्तर पर लगने वाली यह रोक किसी भी विदेशी एयरलाइन को ऐसा रोस्टर तैयार करने की अनुमति नहीं देती, जिसमें भारत आने वाली फ्लाइट के लिए किसी पाकिस्तानी पायलट को जिम्मेदारी दी गई हो।

विमान के नियम और इंसान के नियम का बुनियादी अंतर

इस पूरे कानूनी ताने-बाने को समझने के लिए एयरस्पेस प्रतिबंध और आव्रजन नियमों के बुनियादी अंतर को देखना जरूरी है। एयरस्पेस बैन सीधे तौर पर मशीन यानी विमान और उसका संचालन करने वाली कॉर्पोरेट कंपनी पर लागू होता है। उदाहरण के तौर पर अगर विमान फ्लाईदुबई या एमिरेट्स जैसी किसी तीसरे देश की एयरलाइन का है, तो विमान की बनावट या उसकी कॉर्पोरेट पहचान के आधार पर उस उड़ान को भारतीय आसमान में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता।

इसके विपरीत, इमिग्रेशन और सुरक्षा कानून विमान को नहीं बल्कि उसमें मौजूद इंसान यानी पायलट और क्रू सदस्यों की नागरिकता को परखते हैं। यदि विमान किसी वैश्विक एयरलाइन का भी हो, लेकिन कॉकपिट में बैठा पायलट पाकिस्तानी पासपोर्ट धारक हो, तो उसे भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के साथ ही सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का सामना करना पड़ेगा और उसे किसी भी सूरत में क्रू क्लीयरेंस नहीं मिल सकेगा। इस व्यवस्था के चलते कोई भी विदेशी एयरलाइन जानबूझकर ऐसा जोखिम नहीं उठाती, जिससे उसका विमान कानूनी पचड़े में फंसे या उसके पायलट को तुरंत हिरासत या वापसी की कार्रवाई झेलनी पड़े।

सवाल-जवाब

फ्लाईदुबई के विमान में क्या अप्रिय घटना हुई थी?
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में ओमानी को-पायलट ने भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मछार पर हमला कर दिया था, जिससे विमान 30 सेकंड में लगभग 14,000 फीट नीचे गिर गया था।
क्या भारतीय एयरस्पेस बैन में सीधे तौर पर पाकिस्तानी पायलटों का नाम शामिल है?
नहीं, भारत के लिखित एयरस्पेस बैन (NOTAM) में केवल पाकिस्तान में रजिस्टर्ड विमानों और पाकिस्तानी एयरलाइंस पर रोक लगाई गई है, उसमें सीधे तौर पर पायलट की नागरिकता का जिक्र नहीं है।
क्या कोई पाकिस्तानी पायलट विदेशी एयरलाइन का विमान उड़ाकर भारत आ सकता है?
व्यावहारिक रूप से यह संभव नहीं है, क्योंकि भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सभी वीजा सेवाएं और क्रू-एंट्री क्लीयरेंस निलंबित किए हुए हैं।
भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा कब निलंबित और रद्द किए थे?
22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 24 अप्रैल 2025 से सभी वीजा सेवाएं निलंबित कर दी थीं और 27 अप्रैल 2025 से पहले से जारी वीजा भी रद्द कर दिए थे।
इजराइल में ओमानी पायलट को लेकर क्या विवाद खड़ा हुआ है?
इजराइल और यूएई के समझौते के तहत केवल उन्हीं देशों के पायलट इजराइल की उड़ान भर सकते हैं जिनके इजराइल से राजनयिक संबंध हैं, जबकि ओमान के इजराइल से ऐसे संबंध नहीं हैं।
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