झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने सूबे की सियासत को गरमा दिया है। मतदान और मतगणना दोनों ही 18 जून को एक साथ होंगे, और जैसे-जैसे यह तारीख करीब आ रही है, राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। पेच इस बात का है कि सिर्फ दो सीटें खाली हैं, लेकिन उन पर तीन कद्दावर उम्मीदवार ताल ठोक रहे हैं। ऐसे में हर दल अपनी जीत पक्की करने के लिए हर मुमकिन सियासी दांव आजमा रहा है और कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा।
इसी खींचतान के बीच एक बयान ने माहौल को और भड़का दिया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर के एक सनसनीखेज दावे से झारखंड की राजनीति में हलचल मच गई है, और भाजपा ने इस पर उतनी ही तीखी प्रतिक्रिया दी है।
राजेश ठाकुर का दावा- भाजपा खेमे में नाराजगी
राजेश ठाकुर का कहना है कि सत्ताधारी गठबंधन को अपनी जीत पर पूरा भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कई विधायक अपनी ही पार्टी से खफा हैं, और उम्मीदवारी न मिलने की वजह से पार्टी के अंदर असंतोष गहरा गया है। ठाकुर यहीं नहीं रुके—उन्होंने दावा किया कि भाजपा के 10 से 12 विधायक इधर से उधर हो सकते हैं। उनके इस बयान का सीधा इशारा यही था कि वोटिंग के दौरान भाजपा के कुछ विधायक कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
भाजपा का पलटवार- ले जाएं हमारे विधायक
कांग्रेस के इस दावे पर भाजपा ने करारा जवाब दिया है। पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने तंज कसते हुए कहा कि अगर राजेश ठाकुर को सचमुच लगता है कि भाजपा के 10 से 12 विधायक उनके संपर्क में हैं, तो वे उन विधायकों को ले जाकर दिखाएं। जायसवाल ने जोर देकर कहा कि भाजपा के विधायक एक कार्यकर्ता की तरह काम करते हैं और पार्टी जो भी फैसला लेती है, सभी नेता और कार्यकर्ता उसी के साथ खड़े रहते हैं—यही पार्टी का आचरण है।
जायसवाल ने आगे कहा कि राजेश ठाकुर असल में ऐसी बातें अपने ही विधायकों को दिखाने के लिए कर रहे हैं—यह जताने के लिए कि अगर कांग्रेस का कोई विधायक पाला बदलने की सोच रहा है, तो उधर भी उनकी पहुंच है। उन्होंने दो टूक कहा कि दरअसल कांग्रेस को हार का डर सता रहा है, और इसी छटपटाहट में वह इस तरह के बयान दे रही है।
संख्या बल और हर वोट की कीमत
झारखंड में राज्यसभा चुनाव हमेशा से बेहद दिलचस्प और अप्रत्याशित रहे हैं। सदन के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए यहां एक-एक वोट निर्णायक साबित हो सकता है। यही कारण है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही अपने विधायकों को एकजुट रखने में पूरी ताकत लगा रहे हैं।
एक ओर कांग्रेस भाजपा के भीतर की कथित नाराजगी को भुनाने की फिराक में है, तो दूसरी ओर भाजपा भी सत्ताधारी गठबंधन के असंतुष्ट विधायकों पर पैनी नजर गड़ाए हुए है। दावों और पलटवार के इस दौर के बाद अब दोनों ही खेमे अपने-अपने विधायकों की घेराबंदी और सख्त कर चुके हैं, ताकि 18 जून को कोई चूक न हो।













