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मध्य प्रदेश में UCC बिल पेश: लिव-इन संबंधों के कड़े नियम और संपत्ति में समान अधिकार का प्रस्तावराजनीति
2 दिन पहले· 0

मध्य प्रदेश में UCC बिल पेश: लिव-इन संबंधों के कड़े नियम और संपत्ति में समान अधिकार का प्रस्ताव

मोहन यादव सरकार ने भारी हंगामे के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश किया है। इस बिल में बहुविवाह पर रोक, तलाक के नए नियम और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए सख्त पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य विधानसभा में अपना बहुचर्चित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर दिया है। इस विधायी कदम ने विपक्ष के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है। सरकार जहां इसे एक ऐतिहासिक सुधार मान रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का आरोप है कि इस मसौदे को सप्लीमेंट्री सूची के जरिए सदन में लाया गया। विपक्ष के जोरदार हंगामे और आपत्तियों के बावजूद, विधानसभा अध्यक्ष ने इस बिल को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर ले लिया है। इस प्रस्तावित कानून में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े कई बड़े बदलाव शामिल किए गए हैं।

लिव-इन संबंधों पर होगी सख्त निगरानी

प्रस्तावित कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बहुत कड़े नियम बनाए गए हैं। साथ रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के सामने अपने रिश्ते की आधिकारिक घोषणा करनी होगी। इसके लिए दोनों भागीदारों की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और उनका पहले से विवाहित न होना अनिवार्य है। नियम न मानने वालों के लिए सख्त सजा का भी प्रावधान है। पंजीकरण के बिना एक महीने से ज्यादा समय तक लिव-इन में रहने पर अधिकतम तीन महीने की जेल या ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत जानकारी देने पर तीन महीने की सजा या ₹25,000 तक का जुर्माना तय किया गया है। अगर नोटिस मिलने के बाद भी जानकारी छिपाई जाती है, तो छह महीने तक की जेल या ₹25,000 का जुर्माना हो सकता है।

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इस बिल में पहले से शादीशुदा होने के बावजूद लिव-इन में रहने को गंभीर अपराध माना गया है, जिसके लिए पांच साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर को छोड़कर जाता है, तो उसे उस महिला को भरण-पोषण की रकम देनी पड़ सकती है।

जनजातीय समुदाय कानून से बाहर

यह बिल राज्य में सभी के लिए एक समान कानून बनाने की बात करता है, लेकिन कुछ खास वर्गों को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजातियों (ST), संरक्षित पारंपरिक समुदायों के साथ-साथ घुमंतू और अर्धघुमंतू जनजातियों पर यूसीसी लागू नहीं होगा। वे अपने पारंपरिक और प्रथागत कानूनों का पालन करना जारी रख सकते हैं।

विवाह और तलाक के नए नियम

यह कानून सभी समुदायों के लिए बहुविवाह को पूरी तरह अवैध बनाता है। इसके तहत एक समय में केवल एक ही विवाह को कानूनी मान्यता मिलेगी। विवाह के लिए न्यूनतम उम्र भी तय कर दी गई है, जिसमें पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष होना आवश्यक है।

तलाक की प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। किसी भी तरह के मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को अब कोई कानूनी मान्यता नहीं दी जाएगी। विवाह केवल उन्हीं आधारों पर खत्म किया जा सकेगा जो कानून में स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। इसके साथ ही निकाह हलाला को एक दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए निकाह हलाला करवाना या इसे बढ़ावा देना अब कानूनी अपराध होगा। यूसीसी के लागू होने के बाद राज्य में विवाह और तलाक, दोनों का पंजीकरण अनिवार्य हो जाएगा।

बच्चों और वारिसों को समान अधिकार

नए कानून के तहत 'अवैध संतान' जैसी किसी भी अवधारणा को खत्म कर दिया गया है। विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, गोद लेने की प्रक्रिया, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) से पैदा होने वाले सभी बच्चों को बिल्कुल समान कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।

संपत्ति के बंटवारे के मामले में भी बड़े सुधार किए गए हैं। मसौदे में बेटे और बेटी दोनों को संपत्ति में एक समान उत्तराधिकार दिया गया है, और उनकी वैवाहिक स्थिति का इस अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही, माता और पिता दोनों को प्रथम श्रेणी का वारिस माना गया है। हालांकि, यह बिल एक कड़ी शर्त भी जोड़ता है। हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति का उत्तराधिकार का अधिकार तुरंत समाप्त हो जाएगा। यदि किसी व्यक्ति का कोई कानूनी वारिस नहीं बचता है, तो उसकी पूरी संपत्ति सीधे राज्य सरकार के पास चली जाएगी।

विपक्ष का भारी विरोध

इस बिल के सदन में आते ही राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया। कांग्रेस नेताओं ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चोरों ने चोरों की तरह छिपकर यह बिल पेश किया है।

विरोध दर्ज कराने के लिए भोपाल मध्य क्षेत्र के कांग्रेस विधायक आतिफ अकील सदन में पूरी तरह काले कपड़े पहनकर पहुंचे। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो चुकी है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जब विधानसभा में इस मसौदे पर चर्चा होगी, तो सदन का माहौल और भी ज्यादा गरम रह सकता है।

सवाल-जवाब

मध्य प्रदेश के UCC बिल में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए क्या नियम हैं?
जोड़ों को साथ रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास अपना पंजीकरण कराना होगा। ऐसा न करने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है।
क्या मध्य प्रदेश का यूसीसी बिल जनजातियों पर लागू होगा?
नहीं, अनुसूचित जनजातियों, संरक्षित पारंपरिक समुदायों और घुमंतू जनजातियों को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
UCC बिल के तहत विवाह और तलाक को लेकर क्या बदलाव हुए हैं?
बहुविवाह और मौखिक तलाक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है, और सभी विवाहों तथा तलाकों का कानूनी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
संपत्ति के अधिकारों को लेकर मध्य प्रदेश के यूसीसी में क्या है?
बेटे और बेटी दोनों को संपत्ति में एक समान अधिकार दिया गया है, और माता-पिता दोनों को प्रथम श्रेणी का वारिस माना गया है।
पहले से शादीशुदा व्यक्ति के लिव-इन में रहने पर क्या सजा है?
मसौदे के अनुसार, यदि कोई पहले से विवाहित व्यक्ति लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो उसे पांच साल तक की जेल हो सकती है।
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