रविवार को प्रयागराज पहुंचे समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। राम मंदिर दान चोरी और पेपर लीक जैसे गंभीर विषयों पर बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की शब्दकोश में न तो धर्म का स्थान है और न ही नैतिकता का। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी दल की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से केवल धन संचय पर केंद्रित हैं। अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा कि उनके लिए 'नेशन फर्स्ट' का नारा महज दिखावा है, जबकि असलियत 'डोनेशन फर्स्ट' की नीति है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वोट चोरी का काम करने वालों का पर्दाफाश हो चुका है और उत्तर प्रदेश में अब उनका प्रवेश वर्जित है।
राम मंदिर में दान की चोरी और सीसीटीवी विवाद
अखिलेश यादव ने राम मंदिर ट्रस्ट में दान के पैसों की कथित चोरी को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में कैद ये घटनाएं उनकी चालाकी और साजिश को उजागर करती हैं। अखिलेश ने सवाल किया कि बार-बार सीसीटीवी कैमरा क्यों बंद हो जाते हैं और अब तक इसका सही आंकड़ा सामने क्यों नहीं आया है। उनके अनुसार, यह महज एक इत्तेफाक नहीं बल्कि सुनियोजित ढंग से बार-बार की जा रही चोरी है।
लखनऊ अग्निकांड और सुरक्षा के इंतजाम
लखनऊ में हाल ही में हुए कोचिंग अग्निकांड का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सोमवार को वे इस मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि अगर वहां सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त होते और रेस्क्यू टीम के पास आधुनिक फायरफाइटिंग इक्विपमेंट मौजूद होते, तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने साफ कहा कि आग से कम और धुएं तथा दम घुटने से अधिक मौतें हुई हैं, जो प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
भाजपा का रिक्रूटमेंट मॉडल और पेपर लीक की साजिश
उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुए पेपर लीक को लेकर भी अखिलेश ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि देश भर में परीक्षाओं की शुचिता भंग हो रही है और सरकार इसका ऑडिट कराने से बच रही है। भाजपा के कथित 'रिक्रूटमेंट मॉडल' को लेकर उन्होंने 11 पन्नों का एक दस्तावेज भी जारी किया। अखिलेश के अनुसार, इस मॉडल में सबसे पहले युवाओं की आवाज को लाठीचार्ज के जरिए दबाया जाता है, फिर मामला अदालतों (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) तक खींचकर लंबा किया जाता है और अंत में पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया जाता है, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में चला जाता है।













