पंजाब के कपूरथला जिले में पुलिस और आबकारी विभाग की एक संयुक्त टीम ने अवैध शराब के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। न्यापिंड भठ्ठा गांव में की गई इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को शराब छिपाने का ऐसा अनोखा और सुनियोजित तरीका देखने को मिला जिसने जांच अधिकारियों को भी स्तब्ध कर दिया। दो घरों पर की गई छापेमारी के दौरान फर्श की टाइलों के नीचे विशेष रूप से तैयार की गई टंकियां मिलीं, जिनमें भारी मात्रा में अवैध देसी शराब जमा करके रखी गई थी। इन गुप्त ठिकानों से शराब को आसानी से बाहर निकालने के लिए आरोपियों ने बाकायदा मोटर पंप भी लगा रखे थे।
कमरों और बाथरूम के फर्श के नीचे बनाई गई थीं गुप्त टंकियां
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने अपने रिहायशी मकानों का निर्माण ही इस तरीके से कराया था कि किसी को अवैध धंधे का शक न हो। शुरुआती तलाशी में जब पुलिस टीम को घर के अंदर कोई संदेहास्पद वस्तु नहीं मिली, तो खुफिया जानकारी के आधार पर फर्श की सघन जांच की गई। अधिकारियों ने जब बाथरूम, रसोई और रिहायशी कमरों में लगी टाइलों को उखाड़ा, तो उनके नीचे बड़े आकार के टैंक और ड्रम स्थापित मिले। इन टंकियों में हजारों लीटर शराब भरी हुई थी और पंप के जरिए जरूरत के हिसाब से ग्राहकों को बेचने के लिए शराब निकाली जाती थी।
छापेमारी में 2,91,000 एमएल से अधिक अवैध देसी शराब जब्त
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस ने कुल 2,91,070 एमएल अवैध देसी शराब जब्त की है। यह अवैध कारोबार रिश्ते में चाचा और भतीजे लगने वाले दो व्यक्तियों द्वारा संचालित किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने चाचा अजीत सिंह को मौके से गिरफ्तार कर लिया। वहीं उसका भतीजा सुखजीत सिंह पुलिस की भनक लगते ही फरार होने में कामयाब रहा। बरामदगी का ब्योरा देते हुए अधिकारियों ने बताया कि सुखजीत सिंह के मकान में बाथरूम और रसोई के फर्श के नीचे छिपाए गए ड्रमों से 2,79,820 एमएल शराब मिली, जबकि अजीत सिंह के मकान के कमरों व बाथरूम के नीचे से 11,250 एमएल अवैध शराब बरामद की गई।
पहले भी हुई थीं रेड लेकिन टाइलों के कारण बच निकलते थे आरोपी
मामले का विस्तृत ब्योरा देते हुए पुलिस अधीक्षक हरिंदर सिंह गिल ने बताया कि इस ठिकाने पर अवैध शराब का कारोबार चलने की सूचनाएं लगातार मिल रही थीं। पुलिस और आबकारी विभाग की टीमों ने पहले भी कई बार इन मकानों पर रेड की थी, लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता था। आरोपियों ने शराब के टैंकों को टाइलों के नीचे इतनी सफाई से ढका था कि सामान्य जांच में उनका पता लगाना असंभव था। 28 जुलाई को मिली सटीक गुप्त सूचना के आधार पर जब टाइलें हटाकर गहराई से तलाशी ली गई, तब इस पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ।
सप्लाई नेटवर्क की जांच और पुलिस की आम जनता से अपील
पुलिस अधीक्षक हरिंदर सिंह गिल के अनुसार यह नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था और अब इस बात की पड़ताल की जा रही है कि यह शराब किन-किन क्षेत्रों में सप्लाई की जाती थी। इस अवैध धंधे में शामिल अन्य सहयोगियों और खरीदारों की पहचान के लिए आबकारी विभाग के साथ मिलकर विस्तृत जांच की जा रही है। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सस्ते दाम पर मिलने वाली किसी भी संदिग्ध देसी शराब को न खरीदें। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बिना जांच और अवैध रूप से निर्मित शराब में जानलेवा रसायनों का मिश्रण होता है जो सेहत के लिए अत्यंत घातक और जहरीला साबित हो सकता है। पुलिस ने फरार आरोपी सुखजीत सिंह की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया है।



















