सऊदी अरब में सुरक्षा संकट के चलते रियाद जाने वाली उड़ानें 15 अक्टूबर तक स्थगितरणभूमि में भूख मिटाने के लिए फौजी कैसे करते थे पैकेटबंद खुराक का इस्तेमालराजस्थान के बूंदी जिला अस्पताल में सफाईकर्मियों का कार्य बहिष्कार, बकाया मानदेय को लेकर मुख्य द्वार पर प्रदर्शनकानपुर और लखनऊ के बीच जाजमऊ पुल की मरम्मत के साथ 100 मीटर संपर्क मार्ग का भी होगा कायाकल्पअरब सागर तक 27 घंटे से ज्यादा बंद रहेगा पाकिस्तान का एयरस्पेस, नए नोटिस से बढ़ी हलचलउत्तर और मध्य भारत में 12 अक्टूबर को बदलेगा मौसम, तेज आंधी और बारिश की चेतावनीराजस्थान के आमेर में फ्रांसीसी महिला से बदसलूकी, शीश महल में तैनात दो होमगार्ड्स पर लगा आरोपत्योहारों और खास मौकों के लिए बनाएं सेब का दानेदार हलवा, स्वाद के साथ सेहत भीझंडेवाला देवी धाम में सीएम रेखा गुप्ता ने नवाया शीश, महालया पर ईडन गार्डन्स में सजा लेजर शोतमिलनाडु में ढांचागत विकास को गति देने 13,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स शुरू, केंद्र ने गिनाए शहरी बदलाव के लाभ
आमेर के शिलामाता मंदिर में शारदीय नवरात्रि अनुष्ठान शुरू, शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के बाद खुले पटराजस्थान
11 अक्तू॰ 2026, 2:27 pm (2 घंटे पहले)· 0

आमेर के शिलामाता मंदिर में शारदीय नवरात्रि अनुष्ठान शुरू, शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के बाद खुले पट

जयपुर के आमेर महल स्थित शिलामाता मंदिर में सुबह 11:55 बजे शुभ मुहूर्त में घटस्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का आगाज हुआ, जिसके बाद दोपहर 1 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए।

राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित ऐतिहासिक आमेर महल के प्रसिद्ध शिलामाता मंदिर में शारदीय नवरात्रि का उत्सव पूरी धार्मिक निष्ठा के साथ प्रारंभ हो गया है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन शक्ति पर्व पर देवी के विग्रह के दर्शन करने के लिए भक्तों का भारी तांता लग रहा है। नवरात्रि के शुभारंभ पर मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी पारंपरिक विधि-विधानों का पालन करते हुए घटस्थापना की रस्म पूरी की गई, जिसके साथ ही नौ दिवसीय विशेष अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई।

शुभ मुहूर्त में संपन्न हुई घटस्थापना

आमेर स्थित इस पवित्र पीठ में नवरात्रि के पहले दिन का कार्यक्रम अत्यंत भव्य रहा। मंदिर के मुख्य पुजारियों ने सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर निकले शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की औपचारिक विधि संपन्न की। घटस्थापना के इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों का सस्वर पाठ किया गया और विशेष पूजा-अर्चना की गई।

ये भी पढ़ें

कलश स्थापना और आरंभिक पूजन पूरा होने के उपरांत माता रानी का मनोहारी और भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद दोपहर लगभग 1 बजे मंदिर के गर्भगृह के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही समूचा परिसर जय माता दी के उद्घोष से गूंज उठा और भक्तों ने शीश नवाकर आशीर्वाद लिया।

सोलहवीं शताब्दी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

आमेर का शिलामाता मंदिर स्थानीय नागरिकों के अलावा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, कछवाहा राजवंश के प्रतापी शासक महाराजा मानसिंह प्रथम सोलहवीं शताब्दी में माता की इस चमत्कारिक प्रतिमा को बंगाल के जसोर से लेकर आए थे, जो भूभाग वर्तमान समय में बांग्लादेश के अंतर्गत आता है।

मान्यताओं में ऐसा उल्लेख मिलता है कि देवी मां ने महाराजा मानसिंह प्रथम को स्वप्न में साक्षात दर्शन देकर मार्गदर्शन प्रदान किया था। इस ऐतिहासिक घटना के बाद से ही जयपुर के राजपरिवार और आम जनमानस में शिलामाता के प्रति प्रगाढ़ श्रद्धा कायम है। नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां पूजा-अर्चना करने का विशिष्ट महत्व माना जाता है, जिसके चलते नौ दिनों की इस अवधि में लाखों की तादाद में श्रद्धालु नतमस्तक होने पहुंचते हैं।

प्रथम दिन माता शैलपुत्री की आराधना

नवरात्रि के पहले दिवस पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की उपासना का विधान प्रचलित है। इस उपलक्ष्य में शिलामाता दरबार में भोर से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। जयपुर नगर के अतिरिक्त राजस्थान के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग माता के दर्शन के लिए आमेर पहुंचे।

कतारबद्ध होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करने वाले महिला, पुरुष और बाल श्रद्धालुओं ने माता के समक्ष शीश झुकाकर परिवार के कल्याण, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। इस पावन अवसर के लिए पूरे मंदिर परिसर को नयनाभिराम रंग-बिरंगे पुष्पों और भव्य रोशनी से सजाया गया है, जो वहां पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक सुविधाएं

नवरात्रि के दौरान उमड़ने वाली व्यापक भीड़ को सुव्यवस्थित रखने और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकने के लिए स्थानीय पुलिस व प्रशासनिक महकमे ने व्यापक प्रबंध किए हैं। आमेर महल, मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार तथा आसपास के पूरे क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

भीड़ प्रबंधन को पुख्ता बनाने के लिए होमगार्ड के जवानों के साथ राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी (आरएसी) के जवानों को भी सुरक्षा मोर्चे पर तैनात किया गया है। साथ ही मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में स्वच्छता तथा जनसुविधाएं बनाए रखने के लिए नगर निगम की टीमें लगातार कार्यरत हैं। किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए मौके पर विशेष मेडिकल टीम को भी तैनात किया गया है ताकि नौ दिवसीय महोत्सव शांतिपूर्वक और सुगमता से संपन्न हो सके।

सवाल-जवाब

आमेर के शिलामाता मंदिर में घटस्थापना किस समय संपन्न हुई?
शिलामाता मंदिर में घटस्थापना की रस्म सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुभ मुहूर्त में पुजारियों द्वारा संपन्न की गई।
श्रद्धालुओं के लिए माता के दर्शन कब शुरू किए गए?
घटस्थापना और माता के विशेष श्रृंगार के बाद दोपहर करीब 1 बजे से आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खोले गए।
शिलामाता की मूर्ति आमेर कौन और कब लाया था?
कछवाहा वंश के महाराजा मानसिंह प्रथम सोलहवीं शताब्दी में माता की प्रतिमा को बंगाल के जसोर से आमेर लाए थे।
नवरात्रि के पहले दिन देवी के किस रूप की पूजा की जाती है?
नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना का विधान है।
मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण के लिए कौन से सुरक्षा बल तैनात हैं?
भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल के साथ होमगार्ड और राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी (आरएसी) के जवानों को तैनात किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·13 मिनट पहले

सुबह 11:55 बजे घटस्थापना का मुहूर्त वाकई बहुत सटीक है। माँ शैलपुत्री के दिन ऐसे शुभ समय पर शुरुआत होना इस पूरे नौ दिन के अनुष्ठान को और भी ज्यादा ऊर्जावान और सकारात्मक बना देता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·53 मिनट पहले

महाराजा मानसिंह बंगाल से मूर्ति लेकर आए थे, यह इतिहास सच में बहुत दिलचस्प है।

Ravikash Gupta@ravikash·52 मिनट पहले

अर्जुन जी, इतिहास दिलचस्प तो है, पर क्या सच में मानसिंह जी को सपने में देवी आईं थीं या ये सिर्फ बाद की कहानियां हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

आमेर में घटस्थापना के साथ ही जयपुर में नवरात्रि की रौनक अलग ही दिख रही है। सुबह से ही मंदिर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग गईं, और पट खुलते ही माता के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन, रौनक तो ठीक है पर इतनी भीड़ में दर्शन करना सचमुच आसान नहीं होता।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp