लंबी छुट्टियों या 10 से 15 दिन के जरूरी सफर पर निकलते समय घर में सजे किचन गार्डन और गमलों की हरियाली को बचाना अक्सर एक बड़ी चुनौती बन जाता है। नियमित देखभाल और पानी न मिलने पर तेज धूप में पौधे सूखने लगते हैं। हालांकि, घर में पड़ी बेकार और पुरानी प्लास्टिक की बोतलों की मदद से एक बेहद कारगर और धीमा जल आपूर्ति तंत्र तैयार किया जा सकता है। यह देसी तरीका आपकी गैरमौजूदगी में भी पौधों की जड़ों तक लगातार जरूरी नमी पहुंचाता रहता है, जिससे हरियाली पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
बोतल को तैयार करने का तरीका
इस आसान व्यवस्था को बनाने के लिए सबसे पहले किसी भी खाली प्लास्टिक की बोतल को अच्छी तरह धोकर साफ कर लें। इसके बाद बोतल के ढक्कन में किसी नुकीली चीज से एक या दो छोटे छेद बना दें। यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि ढक्कन में किए गए सुराख ज्यादा बड़े न हों, वरना पूरी बोतल का पानी कुछ ही घंटों में बह जाएगा और लंबे समय के लिए नमी नहीं टिक पाएगी। आपके गमले की जरूरत और पौधे के फैलाव के आधार पर छोटी या बड़ी किसी भी आकार की बोतल चुनी जा सकती है।
मिट्टी में बोतल लगाने की विधि
ढक्कन तैयार हो जाने के बाद बोतल को साफ पानी से पूरा भरें और ढक्कन को कसकर बंद कर दें। अब जिस गमले में यह व्यवस्था लगानी है, उसकी मिट्टी में पौधे की मुख्य जड़ों से थोड़ी दूरी बनाकर एक छोटा सा गड्ढा तैयार करें। बोतल को उल्टा करके इस गड्ढे में इस तरह गाड़ना चाहिए कि ढक्कन वाला हिस्सा मिट्टी के भीतर पूरी तरह दब जाए। बोतल को मिट्टी का सहारा देकर सीधा और मजबूत खड़ा करें, ताकि हवा चलने या पानी का वजन बदलने से वह एक तरफ लुढ़क न जाए।
मिट्टी की नमी और पूर्व परीक्षण
बोतल के ढक्कन में बने बारीक छेदों के रास्ते पानी एकमुश्त बहने की बजाय धीरे-धीरे मिट्टी में रिसता रहता है। इस धीमी प्रक्रिया से पौधे की जड़ों को दिनभर पर्याप्त नमी मिलती रहती है और मिट्टी में दलदल भी नहीं बनता। पानी के निकलने की गति मुख्य रूप से ढक्कन के छेदों के आकार, गमले की मिट्टी की बनावट और वातावरण के तापमान पर निर्भर करती है। इसी वजह से सफर पर जाने से कम से कम एक या दो दिन पहले ही इस पूरी व्यवस्था को लगाकर इसका परीक्षण कर लेना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर पानी के बहाव को नियंत्रित किया जा सके।
किचन गार्डन के लिए पर्यावरण अनुकूल समाधान
यह तरीका पुराने प्लास्टिक कचरे के बेहतर पुनर्चक्रण में मदद करता है और छुट्टियों के दौरान सिंचाई की चिंता को पूरी तरह खत्म कर देता है। छोटे आकार के गमलों, फूलों और किचन गार्डन की हरी सब्जियों के लिए यह बेहद किफायती और टिकाऊ उपाय साबित होता है। हर पौधे की प्यास और गमले की मिट्टी की किस्म अलग होती है, इसलिए सफर से पहले पानी की मात्रा और छेद के फैलाव का सही तालमेल बिठाकर आप अपने बगीचे को बिना किसी परेशानी के हरा-भरा रख सकते हैं।

















