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कुंभलगढ़ अब होगा देश का 59वां टाइगर रिजर्व: मेवाड़ में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा नया आयामराजस्थान
19 जून 2026, 1:22 pm (131 दिन पहले)· 2

कुंभलगढ़ अब होगा देश का 59वां टाइगर रिजर्व: मेवाड़ में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की टेक्निकल कमेटी ने कुंभलगढ़ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह राजस्थान का छठा और देश का 59वां टाइगर रिजर्व होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

राजस्थान के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। कुंभलगढ़ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को टाइगर रिजर्व घोषित करने की बहुप्रतीक्षित मांग अब पूरी होने जा रही है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की टेक्निकल कमेटी ने इस प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद आगामी 8 से 10 दिनों में इसका आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। यह उपलब्धि कुंभलगढ़ को राजस्थान का छठा और देश का 59वां टाइगर रिजर्व बना देगी।

मेवाड़ और मारवाड़ के लिए ऐतिहासिक फैसला

इस निर्णय को मेवाड़ और मारवाड़ क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। लंबे समय से कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिलाने की मुहिम चल रही थी, जिसे वर्ष 2015 में नई गति मिली थी। अब यह सपना साकार हो गया है। इस कदम से अरावली पर्वतमाला के क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण और जैव विविधता को एक नई मजबूती मिलेगी। टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां बाघों के पुनर्वास और उनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में प्रभावी काम शुरू हो सकेगा।

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समृद्ध वन्यजीवों का घर

कुंभलगढ़ अभयारण्य का विस्तार राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों में है। अरावली की गहरी घाटियों, पहाड़ियों और घने जंगलों से आच्छादित यह क्षेत्र पहले से ही कई प्रजातियों के वन्यजीवों के लिए एक अनुकूल आवास रहा है। यहां तेंदुआ, भालू, भेड़िया, लकड़बग्घा, सांभर, चिंकारा, नीलगाय और दुर्लभ चौसिंगा जैसे जानवर पाए जाते हैं। हालांकि वर्तमान में इस क्षेत्र में बाघ मौजूद नहीं हैं, लेकिन टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से उनके लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा और उनकी वापसी का मार्ग प्रशस्त होगा।

पर्यटन और रोजगार के नए अवसर

कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से क्षेत्र में पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उदयपुर और मेवाड़ अपनी झीलों, महलों और हेरिटेज टूरिज्म के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन अब वाइल्डलाइफ टूरिज्म का एक नया अध्याय भी इसमें जुड़ जाएगा। देश और विदेश से आने वाले पर्यटक कुंभलगढ़ किले की ऐतिहासिक यात्रा के साथ-साथ टाइगर सफारी और जंगल पर्यटन का आनंद ले सकेंगे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कुंभलगढ़ देश का सबसे पश्चिमी टाइगर रिजर्व होगा, जिससे पुराने और खंडित टाइगर कॉरिडोर को फिर से विकसित करने में मदद मिलेगी। पर्यटन के बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए होटल, ट्रैवल एजेंसियों और गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा।

सवाल-जवाब

किस प्राधिकरण ने कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व बनाने की मंजूरी दी है?
नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की टेक्निकल कमेटी ने कुंभलगढ़ वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को टाइगर रिजर्व बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
कुंभलगढ़ कब तक आधिकारिक तौर पर टाइगर रिजर्व बन जाएगा?
आगामी 8 से 10 दिनों में इसका गजट नोटिफिकेशन जारी होने की संभावना है, जिसके बाद यह आधिकारिक तौर पर टाइगर रिजर्व बन जाएगा।
कुंभलगढ़ भारत का कौन सा और राजस्थान का कौन सा टाइगर रिजर्व होगा?
कुंभलगढ़ राजस्थान का छठा और देश का 59वां टाइगर रिजर्व होगा।
कुंभलगढ़ अभयारण्य किन जिलों में फैला हुआ है?
कुंभलगढ़ अभयारण्य राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों में फैला हुआ है।
वर्तमान में कुंभलगढ़ में कौन से वन्यजीव पाए जाते हैं?
यहां तेंदुआ, भालू, भेड़िया, लकड़बग्घा, सांभर, चिंकारा, नीलगाय और दुर्लभ चौसिंगा जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।
टाइगर रिजर्व बनने से पर्यटन को कैसे लाभ होगा?
पर्यटक अब कुंभलगढ़ किला देखने के साथ-साथ टाइगर सफारी और जंगल पर्यटन का भी आनंद ले सकेंगे, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और संबंधित व्यवसायों में वृद्धि होगी।
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