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राजस्थान में औद्योगिक विस्तार की बड़ी पहल, तीन जिलों में बनेंगे नए प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्कराजस्थान
17 सित॰ 2026, 11:47 am (9 घंटे पहले)· 0

राजस्थान में औद्योगिक विस्तार की बड़ी पहल, तीन जिलों में बनेंगे नए प्राइवेट इंडस्ट्रियल पार्क

राजस्थान सरकार ने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत दौसा, बालोतरा और धौलपुर में कुल 552 एकड़ भूमि पर नए निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे।

प्रदेश में औद्योगिक विकास की गति को और तेज करने तथा निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य सरकार की राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इस योजना के तहत दौसा, बालोतरा और धौलपुर जिलों में आधुनिक सुविधाओं से युक्त निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसके लिए हाल ही में संपन्न हुई ऑनलाइन ई-बिड प्रक्रिया के जरिए कुल 552 एकड़ जमीन के आवंटन की कार्रवाई पूरी की जा रही है, जिससे आने वाले समय में इन क्षेत्रों की आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

ई-बिड प्रक्रिया के जरिए हुआ भूमि का चयन

इस पूरी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों से पारदर्शी तरीके से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। भूमि आवंटन प्रक्रिया के तहत 27 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन मंगाए गए थे, जिसमें योग्य निवेशकों को ईएमडी जमा करानी थी। इसके पश्चात निर्धारित तिथियों पर ई-बिड प्रक्रिया संपन्न हुई जिसमें देश के कई प्रमुख उद्यमियों ने गहरी दिलचस्पी दिखाई और बढ़-चढ़कर भाग लिया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दौसा के राजाहेड़ा, गुड़ा आशीकपुरा और नूरपुर इलाकों के लिए कुल 7 उद्यमियों ने दावेदारी पेश की। इसी प्रकार बालोतरा के वेदरलाई क्षेत्र के लिए 5 और धौलपुर के बिजौली क्षेत्र के लिए 2 उद्यमियों ने ई-बिड प्रक्रिया में अपनी हिस्सेदारी दर्ज कराई।

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अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे नए पार्क

इन चिन्हित स्थानों पर निजी विकासकर्ताओं द्वारा विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा। पार्कों के भीतर सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं जुटाने की जिम्मेदारी संबंधित विकासकर्ताओं की ही तय की गई है। इन औद्योगिक क्षेत्रों में पक्की सड़कों का नेटवर्क, निरंतर जलापूर्ति व्यवस्था, चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति, आधुनिक जल निकासी प्रणाली, वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग और प्रकाश व्यवस्था के लिए बेहतरीन स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त नीति के नियमों के अनुसार काम करते हुए इन परिसरों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट यानी सीईटीपी के लिए विशेष ग्रीन इंसेंटिव, साझा उपयोगिता केंद्र और प्लग-एंड-प्ले आधारित कार्यालय स्पेस जैसी व्यावसायिक सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।

अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

राज्य सरकार का मुख्य फोकस प्रदेश में ऐसा माहौल तैयार करना है जहां उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे के जरिए औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले और स्थानीय संसाधनों का सही ढंग से उपयोग हो सके। राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 के अंतर्गत निवेशकों की लगातार बढ़ती हुई भागीदारी इस बात की गवाही देती है कि देश-विदेश के निवेशकों का भरोसा प्रदेश की नीतियों पर मजबूत हो रहा है। इन तीन नए पार्कों के निर्माण से स्थानीय स्तर पर छोटे और मझोले उद्योगों को भी काफी सहायता मिलेगी। आसपास के इलाकों में सहायक उद्योगों का जाल बिछेगा जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे और राज्य की आर्थिक उन्नति को एक नई दिशा प्राप्त होगी।

सवाल-जवाब

इस योजना के तहत कुल कितने एकड़ भूमि आवंटित की जा रही है?
इस योजना के तहत कुल 552 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी।
यह निजी औद्योगिक पार्क किन जिलों में विकसित किए जाएंगे?
ये निजी औद्योगिक पार्क दौसा, बालोतरा और धौलपुर जिलों में विकसित किए जाएंगे।
इस आवंटन के लिए ई-बिड प्रक्रिया कब आयोजित की गई थी?
ई-बिड प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 को आयोजित की गई थी।
इन पार्कों में किस प्रकार की मुख्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी?
इन पार्कों में पक्की सड़कें, सुचारू जलापूर्ति, बिजली, ड्रेनेज सिस्टम और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 घंटे पहले

बड़े पैमाने पर औद्योगिक विस्तार से आर्थिक विकास तो होगा, लेकिन इसके साथ ही नए औद्योगिक क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और जनसुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी। 552 एकड़ में फैलने वाले इन पार्कों में श्रमिकों की सुरक्षा, भूमि संबंधी कानूनी विवादों से बचाव और पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन कराना जरूरी है। इन नए औद्योगिक गलियारों में अपराध नियंत्रण के लिए शुरुआती स्तर से ही समर्पित पुलिस गश्त, चौकियों की स्थापना और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·7 घंटे पहले

करण की बात सही है। 552 एकड़ में बनने वाले औद्योगिक पार्कों के मास्टर प्लान चरण में ही प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था के ढांचे का एकीकरण जरूरी है। भूमि सीमा विवादों और श्रमिक सुरक्षा को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और पर्यावरण निकायों के बीच एक समन्वित व्यवस्था होनी चाहिए। यदि शुरुआत से ही त्वरित विवाद निवारण केंद्र और समर्पित औद्योगिक सुरक्षा चौकियां स्थापित नहीं की गईं, तो संचालन में देरी और स्थानीय असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस नीति की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शासन आर्थिक प्रोत्साहनों के साथ पारदर्शी निगरानी और सुरक्षा को कितनी कुशलता से जोड़ता है।

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