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राजस्थान में ऑनलाइन ठगी का विकराल रूप, 9 महीनों में गंवाए 574 करोड़ रुपये और वापस मिले केवल 9.93 करोड़राजस्थान
15 अक्तू॰ 2026, 10:11 am (1 घंटे पहले)· 0

राजस्थान में ऑनलाइन ठगी का विकराल रूप, 9 महीनों में गंवाए 574 करोड़ रुपये और वापस मिले केवल 9.93 करोड़

राजस्थान में जनवरी से सितंबर 2026 के बीच साइबर अपराधियों ने 1,48,820 लोगों से 574 करोड़ रुपये हड़प लिए, जबकि पुलिस केवल 9.93 करोड़ रुपये ही पीड़ितों को वापस दिला पाई है।

राजस्थान भर में डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी का दायरा तेजी से फैलता जा रहा है, जिससे हजारों नागरिकों की मेहनत की कमाई डूब रही है। जनवरी 2026 से सितंबर 2026 तक के 9 महीनों के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साइबर अपराधियों ने प्रदेश के 1,48,820 सीधे-सादे लोगों को अपने जाल में फंसाकर कुल 574 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि लूट ली है। इस बड़े वित्तीय नुकसान के सामने कानूनी एजेंसियों की वास्तविक धन वापसी की गति बेहद धीमी साबित हो रही है, जिससे पीड़ितों में गहरी मायूसी देखी जा रही है।

बैंक खातों में रकम फ्रीज, लेकिन वास्तविक रिफंड बेहद सीमित

धोखाधड़ी की सूचना मिलते ही पुलिस तंत्र ने तत्परता दिखाते हुए विभिन्न बैंकिंग चैनलों में 162.59 करोड़ रुपये को होल्ड यानी फ्रीज कराने में कामयाबी हासिल की। इसके बावजूद, कानूनी प्रक्रियाओं और जटिल औपचारिकताओं के चलते पीड़ितों के निजी बैंक खातों में अब तक केवल 9.93 करोड़ रुपये की राशि ही वास्तव में लौटाई जा सकी है। इससे स्पष्ट होता है कि अपराधियों द्वारा उड़ाई गई रकम पर तुरंत रोक लगाना तो संभव हो रहा है, परंतु उसे कानूनी तौर पर वास्तविक खाताधारकों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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राजधानी जयपुर में 28 हजार पीड़ित, एक ही दिन में छह नए मामले

अकेले जयपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में इन 9 महीनों के भीतर लगभग 28 हजार नागरिक ऑनलाइन ठगी के चंगुल में फंस चुके हैं। राजधानी में अपराधियों की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में केवल एक ही दिन के भीतर 6 अलग-अलग नागरिकों से कुल 13.88 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। पीड़ितों द्वारा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने और ई-एफआईआर दर्ज होने के बाद स्थानीय पुलिस थानों ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर तफ्तीश शुरू की है।

शहर के विभिन्न थानों में दर्ज हुई ठगी की विस्तृत घटनाएं

जयपुर शहर के चार प्रमुख पुलिस थाना क्षेत्रों में सामने आई इन छह वारदातों में नागरिकों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाया गया

  • मुरलीपुरा थाना: आर्य नगर के रहने वाले ताराचंद सोनी के साथ जालसाजों ने 1,49,998 रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
  • करणी विहार थाना (पहला मामला): इलाके के निवासी दीपक मिश्रा ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि उनसे 2,64,162 रुपये ठगे गए हैं।
  • वैशाली नगर थाना: बिहार के मुंगेर जिले के मूल निवासी संजीव कुमार सिंह से साइबर अपराधियों ने 1,72,396 रुपये की रकम निकाल ली।
  • करणी विहार थाना (दूसरा मामला): विनायक एन्क्लेव निवासी जयदेव सिंह के बैंक खाते से धोखाधड़ी कर 3,06,925 रुपये उड़ा लिए गए।
  • करणी विहार थाना (तीसरा मामला): गोकुल नगर के रहने वाले गौरी शंकर ने ऑनलाइन जालसाजी की शिकायत देते हुए 1,99,905 रुपये के गबन की जानकारी दी।
  • करधनी थाना: प्रकाश नगर 9 दुकान क्षेत्र के निवासी विकास अग्रवाल के साथ अपराधियों ने 2,95,000 रुपये का फ्रॉड किया।

हेल्पलाइन 1930 और बैंक ट्रेल खंगालने में जुटी पुलिस टीमें

साइबर अपराध की घटनाओं के तुरंत बाद केंद्रीय हेल्पलाइन 1930 पर आने वाली कॉल्स के जरिए पुलिस वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को फ्रीज करने का प्रयास करती है। इसके उपरांत प्रत्येक मामले को विस्तृत कानूनी कार्रवाई के लिए मुरलीपुरा, करणी विहार, वैशाली नगर तथा करधनी जैसे संबंधित क्षेत्रीय पुलिस थानों को सुपुर्द किया जाता है। जांच अधिकारी संदिग्ध फोन नंबरों की कॉल डिटेल और ऑनलाइन बैंक ट्रांजैक्शन की कड़ियों की बारीकी से पड़ताल कर रहे हैं, ताकि गिरोह के मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा जा सके। हालांकि, वसूली दर के बेहद निम्न स्तर पर टिके रहने से जनता में अपनी डूबी पूंजी मिलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

सवाल-जवाब

राजस्थान में 9 महीनों के दौरान साइबर ठगों ने कुल कितने रुपये लूटे?
जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच साइबर अपराधियों ने राज्य में 574 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
इस अवधि में कितने नागरिक साइबर धोखाधड़ी का शिकार बने?
प्रदेश भर में 9 महीनों के दौरान कुल 1,48,820 लोग साइबर ठगी का शिकार हुए हैं।
पुलिस अब तक पीड़ितों को कितनी रकम वापस दिला सकी है?
पुलिस पीड़ितों के खातों में अब तक केवल 9.93 करोड़ रुपये ही वापस लौटाने में सफल रही है।
बैंक खातों में कुल कितनी राशि फ्रीज कराई गई है?
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से विभिन्न बैंक खातों में 162.59 करोड़ रुपये की राशि होल्ड या फ्रीज कराई गई है।
अकेले जयपुर शहर में कितने लोग ठगी का शिकार हुए हैं?
जयपुर कमिश्नरेट क्षेत्र में 9 महीनों के दौरान करीब 28 हजार नागरिक साइबर ठगी का शिकार बने हैं।
साइबर ठगी की तुरंत शिकायत किस नंबर पर दर्ज कराई जा सकती है?
नागरिक वित्तीय साइबर अपराध की तुरंत सूचना देने और मदद पाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·53 मिनट पहले

574 करोड़ लुटने के बाद सिर्फ 9 करोड़ वापस मिलना बहुत डरावना है।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

करण भाई, सच में आंकड़े डराने वाले हैं। लेकिन क्या बैंक वाले और पुलिस वाले इस ठगी को रोकने के लिए कोई ठोस नया तरीका नहीं निकाल सकते?

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