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राष्ट्रपति भवन में सजी राजस्थान की लोक विरासत, शाहपुरा के तीन फड़ कलाकारों ने किया अपनी कला का प्रदर्शनराजस्थान
9 अक्तू॰ 2026, 5:09 pm (2 घंटे पहले)· 0

राष्ट्रपति भवन में सजी राजस्थान की लोक विरासत, शाहपुरा के तीन फड़ कलाकारों ने किया अपनी कला का प्रदर्शन

राजस्थान के शाहपुरा से ताल्लुक रखने वाले तीन फड़ चित्रकारों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित कलाकार निवास कार्यक्रम में अपनी 700 साल पुरानी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनसे भेंट की।

राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली शाहपुरा फड़ चित्रकला को देश के सर्वोच्च संवैधानिक परिसर में विशेष स्थान मिला है। भीलवाड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शाहपुरा के तीन प्रमुख फड़ कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित कलाकार निवास कार्यक्रम में अपनी पारंपरिक कला प्रस्तुत की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन कलाकारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनकी बनाई कलाकृतियों का गहराई से अवलोकन किया। राष्ट्रीय मंच पर इस प्राचीन कला की प्रस्तुति ने राजस्थान की जीवंत लोक परंपराओं को एक नई गरिमा और पहचान प्रदान की है।

सात शताब्दियों की विरासत को आगे बढ़ा रहे तीन साधक

फड़ चित्रकला की यह परंपरा लगभग 700 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतर प्रवाहमान है। कपड़े पर प्राकृतिक रंगों और बारीक रेखाओं के संयोजन से लोकदेवताओं के जीवन, पौराणिक कथाओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक जीवन के ताने-बाने को उकेरने वाली यह शैली केवल एक शिल्प नहीं, बल्कि मौखिक इतिहास को सहेजने का सशक्त माध्यम है। इस कला परंपरा को आज के दौर में जीवंत रखने का श्रेय शांतिलाल जोशी, विजय जोशी और विवेक जोशी जैसे समर्पित साधकों को जाता है, जिन्होंने अपनी साधना से इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई है।

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इन तीनों चित्रकारों का कला जगत में लंबा और उल्लेखनीय योगदान रहा है। शांतिलाल जोशी को वर्ष 1991 में राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा जा चुका है, साथ ही उन्हें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। उनकी कला यात्रा और काम पर कई महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी तैयार की जा चुकी हैं। वहीं विजय जोशी को वर्ष 2003 में राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार, राष्ट्रीय फेलोशिप और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी सम्मान मिले हैं, और 24 मार्च 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले विवेक जोशी को भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्कॉलरशिप और राष्ट्रीय फेलोशिप प्रदान की जा चुकी है।

पारंपरिक कैनवास पर विकसित भारत और आधुनिक संकल्पनाएं

राष्ट्रपति भवन के इस विशेष कार्यक्रम में कलाकारों ने केवल ऐतिहासिक कथाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि सदियों पुरानी फड़ शैली के माध्यम से समकालीन भारत के दृष्टिकोण को भी चित्रित किया। कैनवास पर विकसित भारत की परिकल्पना, भारतीय संस्कृति की गहराई और वसुधैव कुटुंबकम् के शाश्वत संदेश को अत्यंत कुशलता से दर्शाया गया। पुरानी लोककला के ढांचे में भविष्योन्मुखी विचारों का यह समन्वय दर्शाता है कि पारंपरिक माध्यम आज के सामयिक विमर्श को व्यक्त करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

कला विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक तकनीकों और समकालीन सोच का यह अनोखा मेल नई पीढ़ी को लोक कलाओं से जोड़ने में बेहद मददगार साबित होगा। जब आज के युवा इन चित्रों में आधुनिक भारत के सपनों को अपनी प्राचीन शैली में ढला हुआ देखते हैं, तो उनका अपनी जड़ों के प्रति आकर्षण और गहरा होता है।

छोटे शहरों की प्रतिभाओं और सांस्कृतिक संरक्षण को नई दिशा

शाहपुरा जैसे छोटे कस्बे की इस लोक कला को देश के सबसे बड़े मंच पर प्रदर्शित होना यह रेखांकित करता है कि जमीनी प्रतिभाओं को जब उचित प्रोत्साहन मिलता है, तो वे सांस्कृतिक स्तर पर व्यापक प्रभाव छोड़ती हैं। यह उपलब्धि कला से जुड़े युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से मजबूती से जुड़े रहकर भी राष्ट्रीय स्तर की ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।

इस ऐतिहासिक कला रूप के संरक्षण के लिए अब संगठित प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। नई पीढ़ी को फड़ निर्माण की बारीक तकनीक, उसके 700 साल पुराने इतिहास और लोककथाओं के महत्व से परिचित कराना जरूरी है। कलाकारों को मिलने वाले नियमित प्रोत्साहन और आधिकारिक सम्मान से न केवल उनका मनोबल बढ़ता है, बल्कि यह अनमोल सांस्कृतिक धरोहर भी आने वाले दौर के लिए सुरक्षित बनी रहती है।

सवाल-जवाब

राष्ट्रपति भवन में राजस्थान की किस लोककला का प्रदर्शन किया गया?
राजस्थान के भीलवाड़ा क्षेत्र के शाहपुरा की प्रसिद्ध फड़ चित्रकला का प्रदर्शन राष्ट्रपति भवन में आयोजित कलाकार निवास कार्यक्रम में किया गया।
इस कार्यक्रम में शाहपुरा के किन कलाकारों ने भाग लिया?
इस कार्यक्रम में शाहपुरा के तीन प्रमुख फड़ चित्रकारों शांतिलाल जोशी, विजय जोशी और विवेक जोशी ने भाग लिया।
शाहपुरा की फड़ चित्रकला का इतिहास कितने वर्षों पुराना है?
फड़ चित्रकला की यह परंपरा लगभग 700 वर्षों से पीढ़ियों से निरंतर चली आ रही है।
राष्ट्रपति भवन में कलाकारों से किसने मुलाकात की?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कलाकारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनकी फड़ चित्रकला को देखा।
कलाकारों ने अपने फड़ चित्रों में किन समकालीन विषयों को उकेरा?
कलाकारों ने अपनी पारंपरिक शैली के माध्यम से विकसित भारत, भारतीय संस्कृति और वसुधैव कुटुंबकम् जैसे विषयों को चित्रित किया।
शांतिलाल जोशी को कौन से प्रमुख सम्मान मिल चुके हैं?
शांतिलाल जोशी को वर्ष 1991 में राष्ट्रपति पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं और उनकी कला पर डॉक्यूमेंट्री भी बनी हैं।
विजय जोशी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कब सम्मानित किया था?
विजय जोशी को 24 मार्च 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया गया था।
विवेक जोशी को भारत सरकार से कौन से प्रोत्साहन प्राप्त हुए हैं?
विवेक जोशी को भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्कॉलरशिप और राष्ट्रीय फेलोशिप प्राप्त हो चुकी है।
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टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·22 मिनट पहले

सात सौ साल पुरानी कला को आज के विजन से जोड़ना थोड़ा अजीब लगता है, क्या इससे इसकी मूल पवित्रता खो नहीं जाएगी?

Ravikash Gupta@ravikash·41 मिनट पहले

राष्ट्रपति भवन में राजस्थान की फड़ कला देखना वाकई बहुत बढ़िया लगा। हमारी पुरानी कलाओं को ऐसा सम्मान मिलना ही चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·40 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो आपकी ठीक है पर राष्ट्रपति भवन तक पहुँचने से क्या वाकई ज़मीनी कलाकारों की आमदनी सुधर जाएगी? मुझे थोड़ा शक है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

राष्ट्रपति भवन में इतनी पुरानी लोक कला का सम्मान देखकर अच्छा लगा। शाहपुरा के इन कलाकारों की मेहनत रंग लाई है, और हमारी संस्कृति को ऐसा मंच मिलना गर्व की बात है।

Rohan Verma@rohan-verma·59 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने! जब मैं भीलवाड़ा गया था, तब इन जोशी परिवार के काम को पास से देखने का मौका मिला था, सचमुच कमाल की कला है।

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