राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति में अब तेजी देखी जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा जानकारी के अनुसार, मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं। अगले 48 से 72 घंटों में मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के शेष हिस्सों में पहुंचने की पूरी संभावना है। इसका सीधा असर राजस्थान पर पड़ने वाला है, जहां अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के 31 से अधिक जिलों में मेघगर्जन, बारिश और वज्रपात के साथ तेज हवाएं चलने को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम प्रणालियों का असर
जयपुर मौसम विज्ञान केन्द्र ने बताया कि इस समय उत्तर प्रदेश के मध्य भाग से लेकर पश्चिम विदर्भ तक मध्य प्रदेश के ऊपर 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसके अलावा, उत्तर गुजरात और उसके आसपास के क्षेत्रों में 3.1 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। वहीं, हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से एक अन्य चक्रवाती परिसंचरण भी प्रभावी है। इन मिली-जुली मौसमी स्थितियों के कारण उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों को बड़ा बल मिल रहा है, जिससे राजस्थान में मानसून के अगले दो-तीन दिनों में पूरी तरह जोर पकड़ने की उम्मीद है।
जयपुर और प्रमुख संभागों में बारिश की स्थिति
राजधानी जयपुर में सोमवार को मौसम का मिजाज बदला रहेगा। आसमान में दिनभर घने बादल छाए रहने और रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आएगी, जिससे आम लोगों को चिलचिलाती गर्मी और उमस से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश के छह बड़े संभागों—बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा—में अगले चार-पांच दिनों तक मध्यम से कहीं-कहीं भारी बारिश की प्रबल संभावना है। हालांकि पूर्वी राजस्थान में मानसून ज्यादा सक्रिय रहने का अनुमान है, लेकिन पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में भी इस दौरान अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है।
31 जिलों के लिए आधिकारिक चेतावनी
मौसम विभाग ने 29 जून यानी सोमवार को पूर्वी राजस्थान के 26 और पश्चिमी राजस्थान के 5 जिलों के लिए विशेष अलर्ट जारी किया है। पूर्वी राजस्थान के जिलों में अजमेर, बांसवाड़ा, अलवर, बारां, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर, राजसमंद, सिरोही, टोंक, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झालावाड़, झुंझुनूं, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़, सवाई माधोपुर, सीकर और उदयपुर शामिल हैं। यहां 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और वज्रपात का खतरा है।
वहीं, पश्चिमी राजस्थान के पांच जिले—चूरू, पाली, श्रीगंगानगर, डीडवाना-कुचामन और हनुमानगढ़—में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। प्रशासन ने सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान लोग खुले स्थानों, बिजली के खंभों और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। साथ ही, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति से भी सतर्क रहने को कहा गया है। यह सक्रिय मानसून खरीफ की फसलों की बुवाई के लिए किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।













