दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत धनत्रयोदशी के पावन पर्व के साथ होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी विशेष दिन समुद्र मंथन के दौरान आरोग्य और आयुर्वेद के अधिष्ठाता भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से यह दिन धन्वन्तरि जयंती के रूप में भी श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इस अवसर पर अच्छे स्वास्थ्य के प्रदाता धन्वन्तरि के साथ ही मृत्यु के देवता यमराज की आराधना का भी विशेष महत्व होता है। शाम को घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर यमराज के निमित्त एक विशेष यम दीपक प्रज्वलित करने का विधान है, जिससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के संकट से मुक्ति मिलने की मान्यता है।
धनतेरस की तिथि और पूजा का शुभ समय
पंचांग गणना के आधार पर वर्ष 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। इस पर्व के लिए त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे होगा और इस तिथि का समापन 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे होगा।
धनतेरस पूजन के लिए सबसे उपयुक्त समय शाम 06:02 बजे से शाम 07:57 बजे तक रहेगा। इस दौरान प्रदोष काल शाम 05:33 बजे से रात 08:09 बजे तक प्रभावी रहेगा, जबकि स्थिर वृषभ काल शाम 06:02 बजे से शाम 07:57 बजे तक बना रहेगा। स्थिर लग्न और प्रदोष काल के संयोग में धन और आरोग्य के देवताओं की उपासना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
खरीदारी के लिए अनुकूल समय और चौघड़िया मुहूर्त
धनतेरस के पावन दिन नई वस्तुओं, आभूषणों और बर्तनों की खरीदारी करने की समृद्ध परंपरा रही है। इस वर्ष खरीदारी का समग्र शुभ समय 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे से शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 06:37 बजे तक लगातार रहेगा। दिन और रात के विभिन्न प्रहरों में चौघड़िया के अनुसार खरीदारी के कई विशेष समय खंड उपलब्ध रहेंगे।
प्रातः काल में चर, लाभ और अमृत चौघड़िया का समय सुबह 10:30 बजे से सुबह 10:43 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात दोपहर के समय शुभ चौघड़िया दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 01:27 बजे तक रहेगा। शाम से पूर्व अपराह्न वेला में चर चौघड़िया शाम 04:11 बजे से शाम 05:33 बजे तक चलेगा।
जो लोग रात्रि के समय खरीदारी करना चाहते हैं, उनके लिए लाभ चौघड़िया रात 08:49 बजे से रात 10:27 बजे तक रहेगा। इसके अलावा देर रात से अगले दिन भोर तक शुभ, अमृत और चर चौघड़िया रात 12:05 बजे से सुबह 04:59 बजे (7 नवंबर) तक उपलब्ध रहेगा।
पूजा विधि, परंपराएं और धार्मिक महत्व
इस पावन पर्व पर मां लक्ष्मी, धन के कोषाध्यक्ष कुबेर देवता और भगवान धन्वन्तरि की षोडशोपचार विधि से पूजा अर्चना करने का नियम है। भक्तजन अपने घरों में समृद्धि और आरोग्य की कामना के साथ इन देव शक्तियों का आह्वान करते हैं।
परंपरा के अनुसार इस दिन विशेष रूप से पीतल और चांदी के नए बर्तन खरीदे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस पर नए बर्तन घर लाने से धन संपदा में कई गुना वृद्धि होती है। इसके अतिरिक्त इस दिन सोने के आभूषणों अथवा सिक्कों की खरीदारी को भी अत्यधिक मंगलकारी माना गया है।
सूर्यास्त के उपरांत शाम के समय घर के मुख्य द्वार तथा भीतरी आंगन में तेल और घी के अनेक दीप जलाकर रोशनी की जाती है। इसी समय यमराज के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए एक मुख्य दीपक दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है, ताकि परिवार में दीर्घायु और आरोग्य की रक्षा हो सके।



















