कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि का हिंदू परंपरा में विशेष महत्व माना गया है, जिसे धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 6 नवंबर को पड़ रहा है। इस दिन श्रद्धालु सुख, वैभव और आर्थिक संपन्नता की कामना के साथ धन की देवी मां महालक्ष्मी की विधिवत आराधना करते हैं। धार्मिक परंपराओं में यह विश्वास अत्यंत गहरा है कि पूजा-अर्चना के दौरान यदि व्यक्ति अपनी जन्मराशि और उसके अधिपति ग्रह के अनुकूल मंत्रों का ध्यानपूर्वक जप करे, तो उसके शुभ परिणामों में कई गुना वृद्धि होती है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से प्रत्येक राशि के स्वामी ग्रह का स्वभाव अलग होता है, इसलिए उनके अनुसार चयनित मंत्रों की साधना करने से जीवन के आर्थिक अवरोध समाप्त होने की मान्यता है।
मंगल के प्रभाव वाली मेष तथा वृश्चिक राशि के मंत्र
ज्योतिष शास्त्र में मेष और वृश्चिक दोनों ही राशियों का आधिपत्य मंगल देव के पास माना जाता है। इस बार 6 नवंबर को धनतेरस पूजा के अवसर पर इन दोनों राशियों से जुड़े जातकों को मां लक्ष्मी की आराधना करते हुए विशेष रूप से 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का जप करना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार मंगल प्रधान जातकों द्वारा इस पवित्र मंत्र की साधना करने से करियर और व्यापार में निरंतर आर्थिक तरक्की के योग बनते हैं। इसके अतिरिक्त जो जातक पुराने कर्ज के बोझ अथवा देनदारियों से परेशान हैं, उन्हें भी इस जप के प्रभाव से ऋण से राहत मिलने की संभावना प्रबल होती है।
शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ एवं तुला राशि की साधना
भौतिक ऐश्वर्य, विलासिता और समृद्धि के प्रतिनिधि ग्रह शुक्र माने जाते हैं, जो वृषभ और तुला राशि के अधिपति हैं। इन दोनों राशियों के जातकों को धनतेरस के शुभ अवसर पर मां भगवती लक्ष्मी के शक्तिशाली मंत्र 'ॐ ऐं महालक्ष्म्यै नमः' का श्रद्धापूर्वक जप करना फलदायी बताया गया है। माना जाता है कि इस मंत्रोच्चार से शुक्र ग्रह अनुकूल प्रभाव प्रदान करता है, जिससे जीवन में चल रही धन संबंधी रुकावटें, अचानक आने वाले खर्च और आर्थिक तंगी दूर होकर पारिवारिक जीवन में सुखद वातावरण बनता है।
बुध प्रधान मिथुन और कन्या राशि के लिए लक्ष्मी मंत्र
बुद्धि और व्यापार के स्वामी बुध ग्रह का अधिकार मिथुन और कन्या राशि पर माना गया है। इस वर्ष धनतेरस पर मिथुन और कन्या राशि के लोगों को देवी लक्ष्मी के 'ॐ श्रीं ह्रीं ऐं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का ध्यानपूर्वक पाठ अथवा जप करना चाहिए। मान्यता है कि इस विशेष बीज मंत्र के उच्चारण से बुद्धि विवेक में वृद्धि होती है और पेशेवर जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। साथ ही कमाई और आमदनी के नए रास्ते भी सुलभ होने के संकेत मिलते हैं।
चंद्रमा के प्रभाव वाली कर्क राशि का मंत्र जप
कर्क राशि के अधिपति ग्रह चंद्रमा हैं, जिन्हें पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी लक्ष्मी का सहोदर भ्राता भी स्वीकार किया जाता है। ऐसे में धनतेरस की शाम कर्क राशि के श्रद्धालुओं को देवी की पूजा करते समय 'ॐ क्लीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का नियमित जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस मंत्र का शांत मन से जप करने पर घर में अन्न और धन के भंडार भरे रहते हैं, साथ ही जातक को मानसिक शांति और भावनात्मक स्थिरता भी सहज ही प्राप्त होती है।
सूर्य की राशि सिंह के जातकों के लिए विधान
सिंह राशि के स्वामी प्रत्यक्ष देवता सूर्य हैं, जो यश, तेज और आत्मबल का कारक माने जाते हैं। सिंह राशि के जातकों को धनतेरस के पावन दिन मां महालक्ष्मी के समक्ष 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्धलक्ष्मै नमः' मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। ऐसी धारणा है कि इस प्रभावशाली मंत्र के प्रभाव से जीवन में अटके हुए कार्य सिद्ध होते हैं और व्यक्ति को समाज में प्रतिष्ठा तथा भौतिक जीवन में उत्तम फल प्राप्त होते हैं।
बृहस्पति के स्वामित्व वाली धनु और मीन राशि की पूजा
देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व में आने वाली धनु और मीन राशि के जातकों के लिए धनतेरस की पूजा बेहद खास मानी जाती है। इन दोनों राशियों के लोगों को पूजा के समय 'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी नमः' मंत्र की माला का जप करना चाहिए। इसके साथ ही इन जातकों को मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पवित्र श्री सूक्त का पाठ भी विधिपूर्वक करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ धन और ऐश्वर्य का संचय बढ़ता है।
शनि के प्रभाव वाली मकर और कुंभ राशि का विशेष मंत्र
कर्मफलदाता शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। इन दोनों राशियों के जातकों को धनतेरस के शुभ अवसर पर मां कमला के प्रसिद्ध मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का स्पष्ट उच्चारण करते हुए जप करना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र के नियमित जप से कार्यक्षेत्र में आ रही अस्थिरता समाप्त होती है, आर्थिक मजबूती आती है और जातक को जीवन में आकस्मिक धन लाभ के अवसर मिलते हैं।



















