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मुरादाबाद के कंजरी सराय में सावन की रौनक: 10 फीट तक की खास कांवड़ें बना रहे पुश्तैनी कारीगरधर्म
23 जुल॰ 2026, 6:08 pm (1 घंटे पहले)· 1

मुरादाबाद के कंजरी सराय में सावन की रौनक: 10 फीट तक की खास कांवड़ें बना रहे पुश्तैनी कारीगर

सावन महीने को लेकर मुरादाबाद का कंजरी सराय कांवड़ों से सज गया है, जहां कारीगर 180 रुपये से लेकर विशेष ऑर्डर वाली 10 फीट तक की भव्य कांवड़ें तैयार कर रहे हैं।

सावन के पवित्र महीने का आगमन होते ही उत्तर भारत में शिवभक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच जाता है, और इस भक्ति के माहौल की सबसे जीवंत तस्वीर मुरादाबाद के बाजारों में देखने को मिलती है। मुरादाबाद का कंजरी सराय क्षेत्र इन दिनों एक विशेष आध्यात्मिक और व्यावसायिक केंद्र में तब्दील हो चुका है, जहां कांवड़ बनाने का काम जोरों पर है। कांवड़ यात्रा लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण वार्षिक अनुष्ठान है, जिसमें भक्त गंगा जल भरकर इन सजी हुई कांवड़ों में अपने स्थानीय मंदिरों तक ले जाते हैं। इसी यात्रा को सफल बनाने के लिए मुरादाबाद के कुशल कारीगर कई हफ्तों पहले से ही दिन-रात एक करके इस पवित्र ढांचे को आकार देने में जुट जाते हैं, जिससे पूरा बाजार खूबसूरत कांवड़ों से गुलजार हो जाता है।

पीढ़ियों की विरासत और कच्चा माल

कंजरी सराय में यह शिल्प कोई नया व्यापार नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों से चला आ रहा एक पुश्तैनी काम है, जिसे स्थानीय कारीगर पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ करते हैं। कांवड़ बनाने वाले एक अनुभवी स्थानीय कारीगर मनीष कुमार इस विरासत के बारे में बताते हैं कि उनका परिवार वर्षों से इस कला से जुड़ा हुआ है। ये कारीगर बाजार से सीधे तैयार माल नहीं खरीदते, बल्कि बांस, रंग-बिरंगे कागज, गोटा-पट्टी, घंटियां और अन्य सजावटी कच्चा माल खुद लाते हैं और अपने हाथों से एक-एक कांवड़ को बड़ी बारीकी से तैयार करते हैं। आज के समय में कंजरी सराय सिर्फ एक स्थानीय बाजार नहीं रह गया है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बन गया है, जहां से तैयार कांवड़ें आसपास के कई अन्य शहरों और क्षेत्रीय बाजारों में सप्लाई की जाती हैं।

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विभिन्न प्रकार की मनमोहक डिजाइनें

बाजार में इस समय कांवड़ों की कई अनूठी और शानदार वैरायटी मौजूद हैं, जो ग्राहकों की अलग-अलग प्राथमिकताओं को पूरा करती हैं। कारीगरों के अनुसार इस सीजन में 'खड़ी कांवड़' और 'बैठी कांवड़' की जबरदस्त मांग है। 'खड़ी कांवड़' का अपना एक विशेष धार्मिक महत्व है, क्योंकि शिवभक्त इसे अपनी यात्रा के दौरान कभी जमीन पर नहीं रखते हैं, जिसके लिए इसका डिजाइन खास तौर पर बैलेंसिंग वाला बनाया जाता है। इसके अलावा 'बैकुंठ कांवड़' और बेहद आकर्षक 'मंदिर वाली कांवड़' भी लोगों को खूब पसंद आ रही है। 'मंदिर वाली कांवड़' बिल्कुल एक चलते-फिरते छोटे मंदिर की तरह दिखती है, जिसे बनाने में कारीगरों को बहुत अधिक समय और कलात्मक कौशल लगाना पड़ता है।

विशालकाय कांवड़ और ऑर्डर की सुविधा

अपनी कला को अगले स्तर पर ले जाते हुए मुरादाबाद के ये कारीगर श्रद्धालुओं की विशेष मांग पर विशालकाय ढांचे भी तैयार कर रहे हैं। मनीष कुमार बताते हैं कि कुछ शिवभक्त अपनी मन्नत या समूह के हिसाब से बड़े साइज की मांग करते हैं, जिसके चलते वे ऑर्डर पर 10 फीट तक की विशाल कांवड़ें भी बना रहे हैं। इतनी बड़ी कांवड़ का वजन और आकार इतना ज्यादा होता है कि इसे उठाने और संतुलित रखने के लिए कम से कम चार लोगों की जरूरत पड़ती है। छोटे बच्चे के लिए सबसे छोटी कांवड़ से लेकर भव्य यात्रा के लिए सबसे बड़ी कांवड़ तक, कारीगर हर तरह के डिजाइन को आसानी से और ग्राहकों की पसंद के मुताबिक बनाने में पूरी तरह से सक्षम हैं।

अर्थव्यवस्था और कांवड़ की कीमतें

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सावन का यह महीना इन पुश्तैनी कारीगरों के लिए आजीविका का एक बहुत बड़ा साधन है। इस दौरान होने वाले शानदार कारोबार से इन परिवारों की अच्छी खासी कमाई हो जाती है, जो उन्हें साल भर आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। बाजार में हर वर्ग के श्रद्धालुओं का ध्यान रखा गया है, इसलिए यहां कांवड़ की शुरुआती कीमत मात्र 180 रुपये रखी गई है। इसके बाद, जैसे-जैसे कांवड़ का आकार बढ़ता है या उसमें विशेष प्रकार की सजावट की जाती है, उसकी कीमत भी उसी के अनुसार बढ़ती जाती है। अगर किसी भक्त का बजट ज्यादा है और वह अपने मनमुताबिक कोई खास डिजाइन बनवाना चाहता है, तो उसका रेट अलग से तय किया जाता है। अपनी इसी खासियत, वाजिब दाम और बेहतरीन कलाकारी के कारण मुरादाबाद का कंजरी सराय सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों के लिए भी कांवड़ खरीदने का एक प्रमुख और पसंदीदा ठिकाना बन गया है।

सवाल-जवाब

मुरादाबाद में मुख्य रूप से कांवड़ कहां बनाई जाती हैं?
मुरादाबाद के कंजरी सराय क्षेत्र में पुश्तैनी कारीगरों द्वारा कांवड़ बनाने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है।
बाजार में किस प्रकार की कांवड़ की सबसे ज्यादा मांग है?
इस बार बाजार में 'खड़ी कांवड़', 'बैठी कांवड़', 'बैकुंठ कांवड़' और 'मंदिर वाली कांवड़' की जबरदस्त मांग आ रही है।
कांवड़ की शुरुआती कीमत कितनी है?
बाजार में कांवड़ की शुरुआती कीमत मात्र 180 रुपये है, जो साइज और डिजाइन के आधार पर बढ़ती है।
ऑर्डर पर सबसे बड़ी कांवड़ कितनी बड़ी बनाई जा रही है?
कारीगर श्रद्धालुओं के विशेष ऑर्डर पर 10 फीट तक की विशाल कांवड़ें भी तैयार कर रहे हैं, जिन्हें उठाने के लिए चार लोगों की जरूरत होती है।
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