अंतरिक्ष में दो दशकों से अधिक समय तक ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली विस्फोटों की टोह लेने वाली नासा की मशहूर वेधशाला स्विफ्ट अब अपनी अंतिम यात्रा पर है। यह उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में तेजी से नीचे आ रहा है और अत्यधिक घर्षण के कारण जलकर नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुका है। वैज्ञानिक समुदाय के लिए लंबे समय तक रीढ़ की हड्डी साबित हुआ यह मिशन अब निष्क्रिय अंतरिक्ष कचरे में बदल चुका है, जिसकी पृथ्वी पर वापसी तय मानी जा रही है।
दो साल की योजना और दो दशकों की शानदार वैज्ञानिक यात्रा
स्विफ्ट वेधशाला को 20 नवंबर 2004 को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था। यह वेधशाला मुख्य रूप से तीन शक्तिशाली दूरबीनों से लैस थी। इसका प्रमुख उद्देश्य गामा-रे बर्स्ट का पता लगाना और उनका विस्तृत अध्ययन करना था, जो ब्रह्मांड में होने वाले सबसे भीषण और ऊर्जावान विस्फोट माने जाते हैं। जब भी आकाश में ऐसा कोई तीव्र विस्फोट होता था, स्विफ्ट तुरंत उसकी स्थिति दर्ज करती थी और दुनिया भर की वेधशालाओं को आगे की जांच के लिए सटीक निर्देशांक भेज देती थी।
शुरुआत में इस वेधशाला को पृथ्वी की निचली कक्षा में केवल दो साल के प्राथमिक मिशन के लिए तैयार किया गया था। इसके बावजूद इसने अपनी निर्धारित समय सीमा से दस गुना अधिक समय तक पूरी कुशलता से काम किया। इस असाधारण अभियान ने ब्रह्मांड के क्रमिक विकास, सुपरनोवा के रहस्यों और ब्लैक होल द्वारा तारों को नष्ट किए जाने की घटनाओं को समझने में बेहद अहम भूमिका निभाई। अपने पूरे सेवाकाल में इस उपग्रह ने 2,000 से अधिक गामा-रे बर्स्ट और लगभग इतने ही सुपरनोवा का बारीकी से प्रेक्षण किया, जिनके आंकड़ों के आधार पर 7,000 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र तैयार किए गए।
सौर गतिविधियों की मार और बचाव अभियान की नाकामी
स्विफ्ट के पतन की शुरुआत 2024 में बढ़ी हुई सौर गतिविधियों के कारण हुई। सूर्य की तेज हलचलों ने पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे ऊपरी परतों को गर्म करके फैला दिया। इस बदलाव से उपग्रह पर वायुमंडलीय खिंचाव काफी बढ़ गया और वह धीरे-धीरे नीचे की ओर खिंचने लगा। उपग्रह में अपनी कक्षा को स्वतः सही करने के लिए कोई अलग प्रणोदन प्रणाली मौजूद नहीं थी, इसलिए उसका जीवन चक्र सीमित हो गया।
नासा ने स्विफ्ट को बचाने के लिए जुलाई 2026 में 30 मिलियन डॉलर की लागत वाला एक विशेष रोबोटिक मिशन शुरू किया था। लिंक नामक एक रोबोटिक अंतरिक्ष यान को स्विफ्ट को पृथ्वी से 150 मील ऊपर खींचने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, ताकि उसे एक उच्च कक्षा में स्थापित कर उसका परिचालन जीवन बढ़ाया जा सके। हालांकि, लिंक अंतरिक्ष यान की नियंत्रण प्रणाली में गंभीर तकनीकी खामियां आ गईं, जिसके कारण वह अंतरिक्ष में खुद को स्थिर और सही दिशा में बनाए रखने में पूरी तरह असमर्थ रहा। नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने अगस्त में बताया कि नियंत्रण प्रणाली की इन्हीं दिक्कतों की वजह से बचाव मिशन को रद्द करना पड़ा।
मिशन का औपचारिक अंत और अंतिम प्रेक्षण
उपग्रह की कक्षा लगातार गिरती रही और 26 अक्टूबर को नासा ने घोषणा की कि स्विफ्ट पृथ्वी की सतह से 170 मील से भी कम दूरी पर आ चुका है, जो किसी भी कार्यशील उपग्रह के लिए बेहद निचली और असुरक्षित कक्षा है। अत्यधिक निचली कक्षा में पहुंचने के कारण उपग्रह पर लगी दूरबीनें खगोलीय लक्ष्यों पर स्थिर नजर रखने में असमर्थ हो गईं।
स्विफ्ट ने 20 अक्टूबर को अपना अंतिम वैज्ञानिक प्रेक्षण पूरा किया। इसके तुरंत बाद पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में स्थित संचालन दल ने इसके परिचालन दर्जे को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया। वॉशिंगटन स्थित नासा मुख्यालय में खगोल भौतिकी प्रभाग के निदेशक शॉन डोमागल-गोल्डमैन ने एक बयान में कहा, "स्विफ्ट ने देश के लिए निवेश पर अविश्वसनीय, स्थायी लाभ दिया।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्विफ्ट अपने पीछे बहु-तरंगदैर्ध्य प्रेक्षणों का एक समृद्ध संग्रह छोड़ रहा है, जो आने वाले कई दशकों तक वैज्ञानिकों को नई खोजों में मदद करता रहेगा।
वायुमंडल में पुन: प्रवेश और गिरने वाला संभावित मलबा
अमेरिकी अंतरिक्ष बल के अनुमान के अनुसार, स्विफ्ट या उसका शेष हिस्सा शुक्रवार, 6 नवंबर के आसपास पृथ्वी पर गिर सकता है। वायुमंडल में तेज गति से प्रवेश करते समय उत्पन्न अत्यधिक गर्मी और दबाव से अधिकांश वेधशाला जलकर भस्म हो जाएगी। हालांकि, नासा के मुख्य मिशन वैज्ञानिक ब्रैड सेन्को के अनुसार टंगस्टन से बने कुछ मजबूत हिस्से और दर्पणों के टुकड़े इस प्रक्रिया में पूरी तरह नष्ट होने से बच सकते हैं।
एक्कु कंपोनेंट्स में गुणवत्ता प्रबंधक और एयरोस्पेस इंजीनियर डीन स्लेडेन के मुताबिक, उपग्रह के छह भारी रिएक्शन व्हील, जो दिशा साधने वाले फ्लाईव्हील थे, और लेंस तथा दर्पण जैसे मजबूत पुर्जे बचने की सबसे अधिक संभावना रखते हैं। उनके अनुसार केवल कुछ छोटे, झुलसे हुए टुकड़े ही नीचे पहुंचेंगे, जो किसी भी तरह से दूरबीन जैसे नहीं दिखेंगे।
प्रशांत क्षेत्र और मलबे का संभावित दायरा
अमेरिकी अंतरिक्ष बल द्वारा निगरानी किए जा रहे रीएंट्री जोन में भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया तथा मध्य और दक्षिण अमेरिका के बड़े भूभाग शामिल हैं। हालांकि कोई अधिक सटीक गणना सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्विफ्ट के सभी बचे हुए टुकड़े समुद्र में ही गिरेंगे।
नासा के अपने कक्षीय मलबा नियमों के अनुसार, किसी भी मलबे से मानव क्षति का जोखिम 10,000 में से 1 से अधिक नहीं होना चाहिए। डीन स्लेडेन का मानना है कि यह जोखिम विश्लेषण पहले ही पूरा हो चुका होगा और नासा को पिछली प्रथाओं की तरह इसे सार्वजनिक करना चाहिए ताकि किसी भी तरह के कयास के बजाय लोगों के सामने सटीक तथ्य रहें।



















