मेंस एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का दबदबा बरकरार, जापान को 4-1 से शिकस्त देकर शीर्ष पर बनाई जगहबाइनेंस सुरक्षा चूक और फेड के सख्त रुख से गिरा बिटकॉइन, लगातार चौथे हफ्ते दबावअवैध पटाखों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस की सख्त कार्रवाई, 1,073 किलोग्राम बारूद जब्तवैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए ढाल बना घरेलू कोयला उत्पादन, सचिव विक्रम देव दत्त ने गिनाए आंकड़ेराहुल गांधी के शक्ति प्रदर्शन के सामने भाजपा का पलटवार, राजधानी में 1 नवंबर को आमने-सामने होंगे दोनों दलकरवा चौथ की तस्वीरों पर शफक नाज को लेकर उठीं धर्म परिवर्तन की चर्चाएं, सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाअमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डाक मतपत्र भेजकर पोप लियो XIV ने रचा अभूतपूर्व इतिहासदिल्ली के कॉलेज में फ्रेशर्स पार्टी के झगड़े से शुरू होकर एनुअल फेस्ट के प्रपोजल तक पहुंची आरव और अनाया की प्रेम कहानीपूर्वी कमान प्रमुख एयर मार्शल इंद्रपाल सिंह वालिया बने वायुसेना के अगले उप प्रमुखअभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी को 50 ओवर क्रिकेट में शामिल करने की मांग, युवराज सिंह ने चयन नीति पर उठाए सवाल
श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा जीएसएलवी-एफ18, भारत के नए नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 का होगा प्रक्षेपणविज्ञान
30 अक्तू॰ 2026, 10:26 pm (6 मिनट पहले)· 0

श्रीहरिकोटा से अंतरिक्ष में उड़ान भरेगा जीएसएलवी-एफ18, भारत के नए नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 का होगा प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 30 अक्टूबर की रात श्रीहरिकोटा से एनवीएस-03 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी पूरी कर चुका है। इस नए मिशन से भारत के नाविक सिस्टम की लोकेशन सेवाएं अधिक सटीक होंगी और आम गैजेट्स सीधे इसके सिग्नल पकड़ सकेंगे।

देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत 30 अक्टूबर की रात एक अहम अभियान शुरू होने जा रहा है, जब आंध्र प्रदेश स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से एक शक्तिशाली प्रक्षेपण यान आसमान की ओर रवाना होगा। इस मिशन के लिए दूसरे लॉन्च पैड को चुना गया है, जहां से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट अंतरिक्ष की कक्षा के लिए उड़ान भरेगा। अभियान के लिए निर्धारित समय रात 23 बजकर 51 मिनट तय किया गया है, जिसके जरिए भारत की दूसरी पीढ़ी की उपग्रह श्रृंखला का तीसरा सदस्य यानी एनवीएस-03 अपनी मंजिल की तरफ बढ़ेगा। इस प्रक्षेपण का प्राथमिक मकसद देश की अपनी क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली, जिसे नाविक के नाम से जाना जाता है, की निरंतरता बनाए रखना और उसकी तकनीकी क्षमताओं को पहले से ज्यादा सशक्त करना है।

स्वदेशी परमाणु घड़ी और उन्नत पेलोड से लैस प्रणाली

इस नए उपग्रह की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका स्वदेशी पेलोड ढांचा है, जिसे विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। एनवीएस-03 के भीतर देश में ही विकसित रूबिडियम एटॉमिक घड़ी लगाई गई है, जो समय गणना को बेहद सटीक बनाती है। बैकअप और तुलनात्मक अध्ययन के लिए इसमें कुछ आयातित परमाणु घड़ियां भी शामिल की गई हैं। यह तकनीकी संयोजन भारत के पूरे भूभाग के साथ-साथ राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर लगभग 1500 किलोमीटर तक के दायरे में सटीक भौगोलिक स्थिति और समय से जुड़ा डेटा उपलब्ध कराएगा।

ये भी पढ़ें

सुरक्षा और उपयोगिता के लिहाज से इस सिस्टम को दो अलग-अलग स्तरों पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें सामान्य नागरिकों के लिए स्टैंडर्ड पोजिशनिंग सर्विस का विकल्प रहेगा, जिससे आम लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए स्थान की जानकारी ले सकेंगे। वहीं दूसरी तरफ, सुरक्षा बलों और चुनिंदा अधिकृत एजेंसियों की गोपनीय आवश्यकताओं के लिए इसमें एक विशेष एन्क्रिप्टेड रेस्ट्रिक्टेड सर्विस जोड़ी गई है, जिसकी मदद से सीमा सुरक्षा और रणनीतिक अभियानों में निगरानी प्रणाली कहीं अधिक चाक-चौबंद हो सकेगी।

नागरिक गैजेट्स के लिए एल1 फ्रीक्वेंसी बैंड की नई सुविधा

इस अभियान का एक प्रत्यक्ष लाभ आम तकनीकी उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा, क्योंकि इसमें सिविलियन उपयोग को ध्यान में रखते हुए एल1 फ्रीक्वेंसी बैंड शामिल किया गया है। पुरानी पीढ़ी के उपग्रहों में इस विशिष्ट फ्रीक्वेंसी बैंड की कमी की वजह से सामान्य स्मार्टफोन पर इसका लाभ उठाना काफी सीमित था। अब बाजार में मौजूद नए स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और विभिन्न फिटनेस ट्रैकर्स सीधे नाविक नेटवर्क से तालमेल बिठा सकेंगे। इससे आम यात्रियों और उपभोक्ताओं को नेविगेशन ऐप्स तथा डिजिटल मानचित्रों पर रास्ता खोजते समय पहले से काफी बेहतर और सटीक जानकारी हासिल होगी।

इसरो अपने इस दूसरी पीढ़ी के बेड़े को मजबूत करने के लिए पूरी योजना के तहत काम कर रहा है, जिसके अंतर्गत कुल 5 ऐसे उपग्रह कक्षा में स्थापित किए जाने हैं। इस पूरी श्रृंखला के सक्रिय हो जाने के बाद देश की विदेशी जीपीएस नेटवर्क पर निर्भरता काफी हद तक घट जाएगी और भारत अपनी आत्मनिर्भर नेविगेशन प्रणाली के दम पर नागरिक और सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी कार्य संचालित कर सकेगा।

सवाल-जवाब

एनवीएस-03 सैटेलाइट कब और कहां से लॉन्च किया जा रहा है?
यह सैटेलाइट 30 अक्टूबर की रात 23 बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से लॉन्च होगा।
एनवीएस-03 को अंतरिक्ष में ले जाने वाले रॉकेट का नाम क्या है?
इस उपग्रह को जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा में भेजा जाएगा।
इस सैटेलाइट की नेविगेशन रेंज कितनी है?
यह उपग्रह भारत की पूरी मुख्य भूमि के साथ-साथ देश की सीमाओं से लगभग 1500 किलोमीटर बाहर तक सटीक पोजीशन और समय की जानकारी उपलब्ध कराएगा।
एल1 फ्रीक्वेंसी बैंड से आम उपयोगकर्ताओं को क्या फायदा मिलेगा?
एल1 बैंड जुड़ने से नए स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर्स सीधे नाविक सिग्नल्स पकड़ सकेंगे, जिससे मैप्स पर बेहतर एक्यूरेसी मिलेगी।
इस उपग्रह में समय मापने के लिए कौन सी खास तकनीक लगी है?
एनवीएस-03 में भारत में ही विकसित रूबिडियम एटॉमिक घड़ी लगाई गई है, जिसके साथ कुछ आयातित एटॉमिक घड़ियां भी शामिल हैं।
इसरो इस नई पीढ़ी की सीरीज में कुल कितने उपग्रह लॉन्च करेगा?
इसरो दूसरी पीढ़ी की इस श्रृंखला में कुल 5 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजने की योजना पर काम कर रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp