टाइम्स स्क्वायर पर उतरा योग का जादू
21 जून को न्यूयॉर्क के सबसे व्यस्त चौराहे टाइम्स स्क्वायर की तस्वीर उस दिन एकदम बदली हुई थी। गगनचुंबी इमारतों, चमचमाती डिजिटल स्क्रीन्स और चौबीसों घंटे चलने वाली भागदौड़ के लिए मशहूर इस जगह पर हजारों लोग एकत्रित हुए। ये लोग विभिन्न देशों, संस्कृतियों और पृष्ठभूमि से आए थे, लेकिन उनका मकसद एक था। सबने मिलकर योग मैट बिछाई, 'ओम' का उच्चारण किया और ध्यान में डूब गए। उस पल, जैसे पूरे टाइम्स स्क्वायर की रफ्तार थम सी गई।
की स्मिथ ने भारत को कहा दिल से शुक्रिया
योग सत्र खत्म होने के बाद कई प्रतिभागियों ने अपना अनुभव साझा किया। इनमें की स्मिथ नाम की एक प्रतिभागी का जवाब सबसे खास रहा। ANI को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा,
"मैं पहली बार योग शिविर में भाग लेने आया हूं। टाइम्स स्क्वायर हमेशा बहुत व्यस्त रहता है, यहां हर वक्त एक भागदौड़ और शोर रहता है। लेकिन आज इस कम्युनिटी का हिस्सा बनना और इस महा-चहलपहल के बिल्कुल बीचों-बीच खड़े होकर योग करना एक जादुई अनुभव था। हमने इस पूरी अराजकता और शोर-शराबे के बीच अपने भीतर एक गहरी शांति, जुड़ाव और कुछ पलों का ठहराव ढूंढ लिया। इसके लिए भारत का शुक्रिया कहना चाहता हूं।"
इस एक जवाब ने जो कुछ कहा, वह किसी बड़े सरकारी बयान से कम नहीं था। भारत की इस प्राचीन विरासत ने न्यूयॉर्क के शोर-शराबे के बीच भी अपनी गहरी छाप छोड़ी।
माइंड ओवर मैटर: टाइम्स स्क्वायर की अपनी खास परंपरा
टाइम्स स्क्वायर एलायंस हर साल 'माइंड ओवर मैटर' के नाम से यह योग सत्र आयोजित करता है। इस बार यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के साथ मेल खाने के कारण और भी भव्य रूप ले चुका था। इसमें शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि टाइम्स स्क्वायर जैसी शोरगुल भरी जगह पर योग करने का मकसद एक खास संदेश देना है। वह संदेश यह है कि अगर मन शांत हो, तो बाहरी दुनिया का कोई भी शोर आपको विचलित नहीं कर सकता।
भारतीय महावाणिज्य दूतावास का सहयोग
न्यूयॉर्क में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इस पूरे आयोजन में सहयोग किया। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत Amb. बिनया श्रीकांत प्रधान भी दूसरे प्रतिभागियों के साथ योग सत्र में शामिल हुए। सुबह के पहले सत्र से लेकर शाम ढलने तक टाइम्स स्क्वायर की सड़कों पर योग मैट बिछी रहीं। वहां मौजूद लोग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक तनाव से मुक्ति का रास्ता भी तलाश रहे थे।
योग: एक देश की नहीं, पूरी दुनिया की थाती
विशेषज्ञों का कहना है कि आज की भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में योग एक संजीवनी बूटी की तरह काम कर रहा है। टाइम्स स्क्वायर से आई ये तस्वीरें इस बात की सबसे बड़ी गवाह हैं कि दुनिया चाहे जितनी आधुनिक और तेज हो जाए, आंतरिक शांति और मानसिक स्वास्थ्य के लिए इंसान को अंततः योग और अध्यात्म की ओर ही लौटना होगा। इस आयोजन ने 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'एक विश्व, एक स्वास्थ्य' के भारत के संदेश को वैश्विक पटल पर एक बार फिर मजबूती से स्थापित किया।













