अक्सर यह माना जाता है कि स्कूल के बोर्ड परीक्षा का परिणाम किसी छात्र के पूरे भविष्य का पैमाना तय कर देता है, लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और सही दिशा में की गई मेहनत से इस धारणा को बदला जा सकता है। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के निवासी जैनेंद्रजीत का शैक्षणिक सफर इस बात की एक अद्भुत मिसाल प्रस्तुत करता है। एक दौर ऐसा भी था जब 10वीं कक्षा के नतीजों को देखकर आसपास के लोगों ने उनकी क्षमताओं पर सवाल उठाए थे और ताने कसे थे। हालांकि, जैनेंद्रजीत ने निराशा में डूबने के बजाय उस दौर को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बना लिया। 10वीं में गंभीर बीमारी के कारण केवल 54 प्रतिशत अंक लाने वाले इस युवा ने अपनी रणनीति बदली और देश के सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता दर्ज करते हुए आईआईटी बॉम्बे के प्रतिष्ठित कंप्यूटर साइंस (CSE) विभाग में अपनी जगह पक्की की। उन्होंने जेईई मेन 2023 में 99.98 परसेंटाइल और जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया 349वीं रैंक हासिल करके यह साबित कर दिया कि एक असफलता करियर का अंत नहीं होती।
बीमारी की वजह से प्रभावित हुआ 10वीं कक्षा का परिणाम
जैनेंद्रजीत बिहार के बेतिया स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय (वृंदावन) के छात्र रहे हैं। वे अपनी 10वीं बोर्ड परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने के प्रति काफी आशान्वित थे, लेकिन परीक्षा से ठीक पहले उनकी सेहत अचानक खराब हो गई। गंभीर बीमारी की वजह से उन्हें लगभग 40 से 50 दिनों तक लगातार बिस्तर पर रहना पड़ा, जिसके कारण उनकी परीक्षा की तैयारी अधूरी रह गई। जब बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, तो उनके प्राप्तांक बेहद निराशाजनक थे। उन्हें गणित विषय में 41 अंक, साइंस में 48 अंक और हिंदी में 49 अंक प्राप्त हुए, जिससे उनका कुल परिणाम महज 54 प्रतिशत पर सिमट गया। जहां उनके अन्य सहपाठी 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर खुशियां मना रहे थे, वहीं जैनेंद्रजीत को लोगों की आलोचनाओं और तानों का सामना करना पड़ रहा था। इस कठिन परिस्थिति ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया, पर उन्होंने हार मानने से साफ इनकार कर दिया।
पढ़ाई की रणनीति में बदलाव और कड़ा अनुशासन
कम अंकों को अपने करियर की सीमा मानने के बजाय जैनेंद्रजीत ने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया और पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल दिया। 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण परीक्षा जेईई पर केंद्रित कर दिया। उन्होंने अपनी दिनचर्या को पूरी तरह अनुशासित किया। तैयारी के दौरान किसी भी प्रकार का ध्यान भटकने से बचाने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया के सभी माध्यमों से पूरी तरह दूरी बना ली। उनका एकमात्र उद्देश्य देश के किसी शीर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रवेश हासिल करना था, जिसके लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया।
जेईई एडवांस्ड की तैयारी का विशेष रूटीन
प्रतियोगी परीक्षा में बेहतर रैंक पाने के लिए जैनेंद्रजीत ने एक सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक योजना बनाई। उन्होंने रोज 10 घंटे समर्पित भाव से पढ़ाई करने का समय निर्धारित किया। अपनी तैयारी को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने चार प्रमुख सिद्धांतों का पालन किया
- प्री-क्लास प्रिपरेशन (एडवांस लर्निंग): कोचिंग या क्लास रूम लेक्चर में शामिल होने से पहले वे आगामी विषय के बुनियादी सिद्धांतों को समझने के लिए उससे जुड़े शैक्षणिक वीडियो देख लेते थे। इस अभ्यास से क्लास में कठिन से कठिन कॉन्सेप्ट को समझना काफी आसान हो जाता था।
- छोटे और स्पष्ट लक्ष्य: पूरे पाठ्यक्रम का बोझ एक साथ उठाने के बजाय उन्होंने दैनिक आधार पर छोटे-छोटे और आसानी से पूरे होने वाले लक्ष्य तय किए, जिससे पढ़ाई का तनाव कम हुआ।
- स्मार्ट रिवीजन और मॉक टेस्ट: उन्होंने पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों (PYQs) को हल करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। इसके साथ ही नियमित रूप से मॉक टेस्ट दिए, जिससे प्रश्नों को हल करने की गति और सटीकता में जबरदस्त सुधार हुआ।
- ध्यान भटकाने वाली चीजों का त्याग: तैयारी के पूरे दौर में उन्होंने स्मार्टफोन के गैर-जरूरी इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई और सिर्फ अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा।
सफलता के बाद सोशल मीडिया पर बने प्रेरणा स्रोत
आईआईटी बॉम्बे में दाखिला मिलने के बाद जैनेंद्रजीत आज सोशल मीडिया पर लाखों छात्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। अकेले इंस्टाग्राम पर ही उनके 63 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं। वे सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपनी कॉलेज लाइफ, फिटनेस रूटीन और प्रेरणादायक सामग्री साझा करते हैं। उन्होंने अपने औसत छात्र से लेकर आईआईटी बॉम्बे तक पहुंचने के पूरे सफर को इंस्टाग्राम पर शेयर किया था, जिसे युवाओं द्वारा काफी पसंद किया गया। जैनेंद्रजीत ने अपनी 10वीं कक्षा की मार्कशीट की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर साझा की, ताकि वे उन सभी छात्रों का हौसला बढ़ा सकें जो किसी एक परीक्षा में कम अंक आने की वजह से निराश हो जाते हैं।



















