जेम्स एंडरसन की विदाई पर बढ़ा विवाद, लंकाशायर कर सकता है खास फेयरवेल का आयोजनएडन मार्कराम और मार्केस एकरमैन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जड़ी शतकीय साझेदारी, 56 साल पुराना इतिहास दोहरायापति विजय देवरकोंडा के साथ रिश्ते पर भड़कीं रश्मिका मंदाना, सोशल मीडिया ट्रोलर्स को दिया करारा जवाबप्रताप का ट्रेलर रिलीज, अमित साध का खूंखार अवतार और जेल की सलाखों के पीछे की कहानीनवंबर में आ रहा परिणीति चोपड़ा का पॉपुलर शो 'मॉम टॉक्स' का सीजन 2, जुड़ेंगे कई नए सितारेवैष्णवी शर्मा की कातिलाना गेंदबाजी और बल्लेबाजों के दम पर भारत ने जिम्बाब्वे को रौंदा, 3-0 से सीरीज अपने नाम कीट्रोल्स पर फूटा विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना का गुस्सा, खरी-खखरी सुनाते हुए कही यह बातभारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे को रौंदकर वनडे सीरीज में किया क्लीन स्वीपरणबीर कपूर की रामायण के अलावा दिवाली पर आ रही यह फैमिली ड्रामा फिल्म, नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी दिलवाली दिवालीडायना पेंटी की सौ साल पुरानी हवेली, शाहरुख खान के मन्नत से होती है तुलना
बेंगलुरु के 85 वर्षीय एन.जी. केसरी को चंदन के गिरे पेड़ से मिले 28 लाख रुपये, सरकार ने दिया खास सम्मानसक्सेस स्टोरी
6 जुल॰ 2026, 9:13 pm (115 दिन पहले)· 5

बेंगलुरु के 85 वर्षीय एन.जी. केसरी को चंदन के गिरे पेड़ से मिले 28 लाख रुपये, सरकार ने दिया खास सम्मान

बेंगलुरु में 85 साल के एन.जी. केसरी के आंगन में करीब 40 साल से खड़ा चंदन का पेड़ आंधी में गिर गया, लेकिन इसी पेड़ ने उन्हें करीब 28 लाख रुपये दिलाए और राज्य सरकार से 'सैंडलवुड शिरोमणि' सम्मान भी.

बेंगलुरु में रहने वाले 85 वर्षीय एन.जी. केसरी के लिए बारिश के मौसम में एक पेड़ का गिरना बुरी खबर नहीं बल्कि जिंदगी बदलने वाला मौका बन गया. उनके घर के आंगन में करीब 40 साल से खड़ा चंदन का पेड़ तेज बारिश और आंधी में जमीन पर गिर गया, और उसी पेड़ ने उन्हें रातोंरात करीब 28 लाख रुपये का मालिक बना दिया. इतना ही नहीं, वर्षों तक इस पेड़ की हिफाजत करने के लिए राज्य सरकार ने उन्हें 'सैंडलवुड शिरोमणि' सम्मान से भी नवाजा.

आंगन में अपने आप उग आया था चंदन का पौधा

करीब चार दशक पहले केसरी के घर के आंगन में चंदन का एक छोटा पौधा खुद ही उग आया था. उन्होंने न तो इसे लगाया था और न ही इसकी खेती की कोई योजना बनाई थी, फिर भी उन्होंने उस नन्हे पौधे को सींचना और उसकी देखभाल करना शुरू कर दिया. समय बीतने के साथ यह पौधा एक विशाल और मजबूत चंदन के पेड़ में तब्दील हो गया, जिसकी खुशबू आसपास के इलाकों तक फैलने लगी.

ये भी पढ़ें

चंदन की खुशबू ने खींचा लकड़ी चोरों को भी

पेड़ जितना बड़ा और खुशबूदार होता गया, उतना ही उस पर लकड़ी चोरों की नजर भी पड़ने लगी. कीमती चंदन की चोरी का खतरा भांपते हुए केसरी ने पेड़ को सुरक्षित रखने के लिए उसके चारों ओर लोहे का मजबूत पिंजरा बनवा दिया, ताकि कोई भी उसे नुकसान न पहुंचा सके. यह सतर्कता आगे चलकर उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई.

आंधी में पास का पेड़ गिरने से टूटा चंदन

इस साल जून में बेंगलुरु में तेज बारिश और आंधी आई, जिसके दौरान पास खड़ा एक बड़ा पेड़ चंदन के पेड़ पर आ गिरा. इस टक्कर की वजह से वर्षों पुराना चंदन का पेड़ भी धराशायी हो गया. लेकिन नुकसान मानकर बैठने की बजाय केसरी ने तुरंत नियमों का पालन किया और इसकी जानकारी वन विभाग को दी.

मैसूर डिपो में हुई जांच, वजन निकला करीब एक टन

वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद गिरे हुए चंदन के पेड़ को मैसूर स्थित सरकारी चंदन डिपो भेजा गया. वहां जांच में सामने आया कि पेड़ का वजन करीब एक टन था, जो इसे बेहद कीमती बनाता है.

कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स ने खरीदा, मिले 28 लाख

बाद में कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड ने यह चंदन खरीद लिया, जिससे केसरी को करीब 28 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ.

सालों की मेहनत को मिला सैंडलवुड शिरोमणि सम्मान

सिर्फ पैसा ही नहीं, केसरी को वर्षों तक चंदन के पेड़ की सुरक्षा और संरक्षण करने के लिए राज्य सरकार ने 'सैंडलवुड शिरोमणि' पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया. यह सम्मान उनके धैर्य और पेड़ के प्रति उनके समर्पण को मान्यता देता है.

सवाल-जवाब

चंदन का पेड़ कितने साल पुराना था?
यह चंदन का पेड़ करीब 40 साल पुराना था और केसरी के घर के आंगन में खड़ा था.
केसरी को इस पेड़ से कितना मुनाफा हुआ?
चंदन बिकने से उन्हें करीब 28 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ.
चंदन की लकड़ी किसने खरीदी?
कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड ने यह चंदन खरीदा.
पेड़ आखिर गिरा कैसे?
जून में तेज बारिश और आंधी के दौरान पास खड़ा एक बड़ा पेड़ चंदन के पेड़ पर आ गिरा, जिससे वह धराशायी हो गया.
पेड़ का वजन कितना निकला?
मैसूर के सरकारी चंदन डिपो में जांच में पेड़ का वजन करीब एक टन पाया गया.
केसरी को कौन सा सम्मान मिला?
राज्य सरकार ने उनके धैर्य और चंदन के पेड़ के संरक्षण के लिए उन्हें 'सैंडलवुड शिरोमणि' सम्मान दिया.
एन.जी. केसरी की उम्र कितनी है?
वे 85 साल के हैं और बेंगलुरु में रहते हैं.
चंदन का पौधा कैसे उगा था?
करीब चार दशक पहले उनके घर के आंगन में चंदन का पौधा अपने आप उग आया था, जिसे उन्होंने खुद सींचकर बड़ा किया.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp