भारत NCAP सेफ्टी असेसमेंट में टाटा की इस इलेक्ट्रिक कार का जलवा, पंच ईवी को मिली 5 स्टार रेटिंगकाठमांडू को क्यों कहते हैं मोमो का गढ़ और हर दिन इसे खाने के क्या हैं सेहत संबंधी खतरेन्यू मेक्सिको में ठंडे पड़े जिओथर्मल वेल को एआई और एडवांस ड्रिलिंग से मिला नया जीवनइथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के खिलाफ टाउनहॉल रोकने का आरोप, अरविंद केजरीवाल ने कहा पुलिस कार्रवाई से नहीं डरेगा देश2026 के लिए 15 बेहतरीन स्विमिंग पूल अपग्रेड्स: वेव जनरेटर से लेकर स्मार्ट रोबोटिक क्लीनर तकग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मुरली श्रीशंकर ने 8.09 मीटर छलांग लगाकर जीता सिल्वर मेडल, मुक्केबाजों ने बनाए 10 पदक के नए कीर्तिमानयूट्यूब एक्सपर्ट के आसान टिप्स: प्रूनिंग और खास खाद से गुड़हल में आएंगे ढेरों फूलअल्ट्राह्यूमन स्मार्ट रिंग की छिपी सेटिंग्स और फीचर्स से डेटा ट्रैकिंग को ऐसे बनाएं बेहतरअमेरिकी आव्रजन एजेंसी आईसीई के नए अनुबंधों में डिटेंशन सेंटरों पर राज्य कानून लागू न होने का दावाआपदा प्रबंधन में दुनिया के शीर्ष 6 देशों में शामिल हुआ भारत, नरेंद्र मोदी और अमित शाह के मॉडल से घटे आंकड़े
जबलपुर की राजेश्वरी ने लाडली बहना योजना के पैसों से खड़ा किया डेयरी कारोबार, अब हर महीने कमाई 15 हजार तकसक्सेस स्टोरी
21 जुल॰ 2026, 8:01 am (9 दिन पहले)· 1

जबलपुर की राजेश्वरी ने लाडली बहना योजना के पैसों से खड़ा किया डेयरी कारोबार, अब हर महीने कमाई 15 हजार तक

जबलपुर के कुगवां गांव की राजेश्वरी पटेल ने पति का ठेला हटने के बाद हार नहीं मानी और मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की मदद से डेयरी का काम शुरू किया, जिससे आज वे महीने में 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं।

कहते हैं कि तंगहाली अक्सर इंसान का असली दम आजमाने आती है, और जो इस कसौटी पर खरा उतरता है वही अपनी किस्मत की नई इबारत लिखता है। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के एक छोटे से गांव कुगवां की राजेश्वरी पटेल इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। एक वक्त था जब उनके घर पर दो वक्त की रोटी का संकट मंडरा रहा था और चारों तरफ निराशा थी, लेकिन उन्होंने हाथ पर हाथ रखकर बैठने के बजाय मेहनत का ऐसा रास्ता चुना जो आज पूरे इलाके के लिए प्रेरणा बन गया है।

पहले राजेश्वरी का परिवार सुख-चैन से गुजर-बसर कर रहा था। उनके पति ठेला लगाकर सामान बेचते थे और इसी से घर का खर्च चलता था। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि अचानक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की चपेट में उनका ठेला आ गया और हट गया। इस अचानक आए झटके ने परिवार की कमाई का इकलौता जरिया छीन लिया। कमाने वाला सहारा टूटते ही घर चलाना पहाड़ जैसा लगने लगा और हालात भुखमरी की कगार तक पहुंच गए।

ये भी पढ़ें

निराशा को पीछे छोड़ बुनी नई उम्मीद

ऐसे मुश्किल वक्त में जब ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, राजेश्वरी ने धीरज और समझदारी से काम लिया। इस संकट में उनके लिए मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना बड़ा सहारा बनी। योजना से हर महीने मिलने वाली रकम की एक-एक पाई को उन्होंने सहेजना शुरू किया। साथ ही घर पर थोड़ी-बहुत सिलाई-बुनाई का काम भी किया और पति के साथ मिलकर पाई-पाई जोड़ते हुए पूंजी इकट्ठा करने लगीं।

एक गाय से शुरू हुआ सफर

जुगाड़ और बचत से जुटाई गई इसी पूंजी और लाडली बहना योजना के पैसों के बल पर राजेश्वरी ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा दांव खेला। सबसे पहले उन्होंने एक गाय खरीदी और दूध बेचने का काम शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा भी बनने लगा। इसके साथ ही उन्होंने गाय के गोबर से कंडे यानी उपले बनाकर बेचने का काम भी शुरू कर दिया, जिससे उनकी आमदनी में और इजाफा हो गया।

दूध और उपलों से हर महीने हजारों की कमाई

आज राजेश्वरी दूध और उपले बेचकर हर महीने बड़ी आसानी से 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं। उनकी लगन और कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि अब उनके पास एक नहीं, बल्कि चार गायें हो चुकी हैं। राजेश्वरी बताती हैं कि अब उनके पति को धूप और छांव में ठेला नहीं लगाना पड़ता। पूरा परिवार अब आर्थिक रूप से सुरक्षित है और पहले से कहीं ज्यादा खुशहाल जिंदगी जी रहा है। एक छोटे से गांव की इस महिला ने दिखा दिया कि इरादे मजबूत हों तो मुसीबत भी तरक्की की सीढ़ी बन जाती है।

सवाल-जवाब

राजेश्वरी पटेल कौन हैं?
वे मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के कुगवां गांव की रहने वाली हैं, जिन्होंने पति की कमाई छिनने के बाद डेयरी का काम शुरू किया।
उनके परिवार पर संकट क्यों आया?
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में उनके पति का ठेला हट गया, जिससे परिवार की कमाई का इकलौता जरिया खत्म हो गया।
उन्होंने कारोबार के लिए पैसे कहां से जुटाए?
मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना से मिलने वाली रकम की बचत और सिलाई-बुनाई से जोड़ी गई पूंजी से।
उन्होंने कौन सा कारोबार शुरू किया?
पहले एक गाय खरीदकर दूध बेचना शुरू किया और साथ ही गोबर से उपले बनाकर बेचने लगीं।
राजेश्वरी अब हर महीने कितना कमाती हैं?
वे दूध और उपले बेचकर हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं।
अब उनके पास कितनी गायें हैं?
अब उनके पास एक नहीं बल्कि चार गायें हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR