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कठिन दौर से गुजरकर बाड़मेर के सवाई सिंह ने NEET में हासिल की 15039वीं ऑल इंडिया रैंकसक्सेस स्टोरी
29 जुल॰ 2026, 3:04 pm (11 घंटे पहले)· 0

कठिन दौर से गुजरकर बाड़मेर के सवाई सिंह ने NEET में हासिल की 15039वीं ऑल इंडिया रैंक

राजस्थान के बाड़मेर जिले के सवाई सिंह ने पिता के निधन और आर्थिक तंगी जैसी भारी विपत्तियों को पार करते हुए नीट परीक्षा में 15039वीं रैंक प्राप्त की है। अपनी मां के संघर्ष और फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान के मार्गदर्शन के दम पर उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया।

राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित सरणु पणजी गांव के सवाई सिंह ने अत्यंत विषम परिस्थितियों और पारिवारिक दुखों का सामना करते हुए नीट परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की है। पांच बहनों के इकलौते भाई सवाई सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया 15039वीं रैंक प्राप्त की है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी में उनकी रैंक 1709 रही। कठिन आर्थिक हालातों के चलते 10वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें मजदूरी तक करनी पड़ी थी, लेकिन उन्होंने चिकित्सक बनने के अपने सपने को कभी ओझल नहीं होने दिया।

पिता का साया उठने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत

सवाई सिंह के जीवन में सबसे बड़ा आघात 25 जून 2023 को लगा, जब फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान में प्रवेश के लिए आयोजित चयन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया। परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे घर में शोक की लहर दौड़ गई। इस व्यक्तिगत क्षति और मानसिक आघात के बावजूद सवाई सिंह ने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का दृढ़ता से मुकाबला किया और अपनी पढ़ाई के प्रति लगन को बनाए रखा।

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मां के कड़े संघर्ष और दूध-घी बेचने की मिसाल

पिता के असमय चले जाने के बाद परिवार के लालन-पालन की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। सवाई सिंह की मां ने हार मानने के बजाय भैंस पालकर उसका दूध और घी बेचना शुरू किया, जिससे घर का खर्च चला और बच्चों की शिक्षा जारी रह सकी। अपनी मां के इस अथक परिश्रम को देखकर सवाई सिंह ने भी घर का संबल बनने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी का काम संभाला। मां की प्रेरणा और अटूट विश्वास ही सवाई सिंह की सबसे बड़ी शक्ति बनी, जिसने उन्हें हर कदम पर आगे बढ़ने का साहस दिया।

द्वितीय प्रयास में पाई नीट परीक्षा में सफलता

प्रतियोगी परीक्षा के पहले प्रयास में सफलता न मिलने पर सवाई सिंह निराश नहीं हुए। उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया और फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान के उचित मार्गदर्शन में अपनी तैयारी को और अधिक सुदृढ़ बनाया। उनकी निरंतर मेहनत और अनुशासन का परिणाम यह रहा कि दूसरे प्रयास में उन्होंने नीट परीक्षा में उत्कृष्ट रैंक हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन किया। अब वह डॉक्टर बनने की राह पर अग्रसर हैं, जो उनकी मां के वर्षों के संघर्ष का एक साकार परिणाम है।

सवाल-जवाब

सवाई सिंह कौन हैं और उन्होंने नीट में क्या रैंक हासिल की?
सवाई सिंह राजस्थान के बाड़मेर जिले के सरणु पणजी गांव के निवासी हैं। उन्होंने नीट परीक्षा के अपने दूसरे प्रयास में All India Rank 15039 और EWS श्रेणी में 1709वीं रैंक प्राप्त की है।
पिता के निधन के समय सवाई सिंह के सामने क्या चुनौती थी?
25 जून 2023 को फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान की चयन परीक्षा से महज एक दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया था, लेकिन उन्होंने इस भारी दुख के बावजूद पढ़ाई जारी रखी।
सवाई सिंह की मां ने परिवार चलाने के लिए क्या संघर्ष किया?
उनके पिता के निधन के बाद उनकी मां ने भैंस पालकर दूध और घी बेचकर पांच बेटियों और एक बेटे का पालन-पोषण किया तथा उनकी शिक्षा रुकने नहीं दी।
सवाई सिंह ने नीट परीक्षा की तैयारी में किस संस्थान से मार्गदर्शन प्राप्त किया?
उन्होंने फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान के मार्गदर्शन और सहयोग से अपनी नीट परीक्षा की तैयारी पूरी की।
क्या सवाई सिंह को पहले प्रयास में सफलता मिली थी?
नहीं, सवाई सिंह अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाए थे, जिसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी को और मजबूत किया और दूसरे प्रयास में यह रैंक हासिल की।
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