राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित सरणु पणजी गांव के सवाई सिंह ने अत्यंत विषम परिस्थितियों और पारिवारिक दुखों का सामना करते हुए नीट परीक्षा में बड़ी सफलता हासिल की है। पांच बहनों के इकलौते भाई सवाई सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया 15039वीं रैंक प्राप्त की है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी में उनकी रैंक 1709 रही। कठिन आर्थिक हालातों के चलते 10वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें मजदूरी तक करनी पड़ी थी, लेकिन उन्होंने चिकित्सक बनने के अपने सपने को कभी ओझल नहीं होने दिया।
पिता का साया उठने के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत
सवाई सिंह के जीवन में सबसे बड़ा आघात 25 जून 2023 को लगा, जब फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान में प्रवेश के लिए आयोजित चयन परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया। परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे घर में शोक की लहर दौड़ गई। इस व्यक्तिगत क्षति और मानसिक आघात के बावजूद सवाई सिंह ने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों का दृढ़ता से मुकाबला किया और अपनी पढ़ाई के प्रति लगन को बनाए रखा।
मां के कड़े संघर्ष और दूध-घी बेचने की मिसाल
पिता के असमय चले जाने के बाद परिवार के लालन-पालन की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। सवाई सिंह की मां ने हार मानने के बजाय भैंस पालकर उसका दूध और घी बेचना शुरू किया, जिससे घर का खर्च चला और बच्चों की शिक्षा जारी रह सकी। अपनी मां के इस अथक परिश्रम को देखकर सवाई सिंह ने भी घर का संबल बनने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ मजदूरी का काम संभाला। मां की प्रेरणा और अटूट विश्वास ही सवाई सिंह की सबसे बड़ी शक्ति बनी, जिसने उन्हें हर कदम पर आगे बढ़ने का साहस दिया।
द्वितीय प्रयास में पाई नीट परीक्षा में सफलता
प्रतियोगी परीक्षा के पहले प्रयास में सफलता न मिलने पर सवाई सिंह निराश नहीं हुए। उन्होंने अपनी कमियों का विश्लेषण किया और फिफ्टी विलेजर्स सेवा संस्थान के उचित मार्गदर्शन में अपनी तैयारी को और अधिक सुदृढ़ बनाया। उनकी निरंतर मेहनत और अनुशासन का परिणाम यह रहा कि दूसरे प्रयास में उन्होंने नीट परीक्षा में उत्कृष्ट रैंक हासिल कर अपने परिवार का नाम रोशन किया। अब वह डॉक्टर बनने की राह पर अग्रसर हैं, जो उनकी मां के वर्षों के संघर्ष का एक साकार परिणाम है।



















