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लखीमपुर खीरी की राम बेटी ने चाय-पराठे की छोटी सी कैंटीन से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, रोज कमा रहीं 2500 रुपयेसक्सेस स्टोरी
3 जुल॰ 2026, 11:19 am (72 दिन पहले)· 3

लखीमपुर खीरी की राम बेटी ने चाय-पराठे की छोटी सी कैंटीन से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, रोज कमा रहीं 2500 रुपये

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की राम बेटी ने 2018 में कैंटीन शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है, जहां पनीर और आलू पराठे सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं।

कभी घर की चारदीवारी तक सिमटी रहने वाली महिलाएं आज अपने हुनर और हौसले से न सिर्फ परिवार की माली हालत संभाल रही हैं, बल्कि समाज में अलग पहचान भी बना रही हैं। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्वयं सहायता समूह इन्हीं महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत जरिया बनकर उभरे हैं। जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत बने ये समूह महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का काम बखूबी कर रहे हैं।

इसी सिलसिले की एक चमकती कड़ी है माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह, जिसकी महिलाएं अपनी मेहनत से कामयाबी की नई इबारत लिख रही हैं। समूह की सदस्य राम बेटी बताती हैं कि उन्होंने साल 2017 में समूह से जुड़कर अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया। पहले उन्हें छोटे-छोटे बचत के काम और समूह चलाने की बारीकियां सिखाई गईं। इसके बाद साल 2018 में उन्होंने कैंटीन का संचालन शुरू किया, जो आज उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है।

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सीमित संसाधनों से हुई शुरुआत

राम बेटी के मुताबिक, राह इतनी आसान नहीं थी। थोड़े से संसाधनों के साथ काम शुरू हुआ, लेकिन समूह की सभी महिलाओं ने मिलकर पसीना बहाया। धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ता गया और कैंटीन पर ग्राहकों की तादाद भी लगातार चढ़ती चली गई। आज उनकी कैंटीन पर रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी और आम लोग नाश्ता और चाय का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं।

फिलहाल उनकी कैंटीन विकास भवन परिसर में चल रही है। यहां सुबह से शाम तक चाय, नाश्ते और लजीज पराठों की जबरदस्त मांग रहती है। खासतौर पर पनीर पराठा और आलू पराठा लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। इसके साथ ही चाय की बिक्री भी खूब होती है, जिससे समूह को नियमित और अच्छा मुनाफा मिल रहा है। राम बेटी रोजाना करीब 2500 रुपये की कमाई कर रही हैं।

बंटी हुई है जिम्मेदारी

राम बेटी बताती हैं कि माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह में कुल 11 महिलाएं शामिल हैं। हर महिला अपनी-अपनी जिम्मेदारी के हिसाब से अलग-अलग काम संभालती है। वे कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। पहले परिवार की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे खुद की मेहनत से कमाई कर रही हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और आने वाले कल की जरूरतें पूरी करने में बड़ी मदद मिल रही है। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ उनका आत्मविश्वास भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है।

समूह ने बदल दी जिंदगी

राम बेटी का मानना है कि अगर महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और मौका मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में झंडे गाड़ सकती हैं। उनके शब्दों में, स्वयं सहायता समूह ने उन्हें सिर्फ रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि नेतृत्व, टीम भावना और आत्मविश्वास भी सिखाया है। आज वे दूसरी महिलाओं को भी समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।

ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का असरदार माध्यम बनते जा रहे हैं। छोटे-छोटे कारोबार के जरिए महिलाएं परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ समाज में नई पहचान भी गढ़ रही हैं। माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल है, जहां 11 महिलाओं की मेहनत ने एक छोटे से प्रयास को कामयाब कारोबार में बदल दिया है। आज यह कैंटीन सिर्फ चाय और पराठे बेचने का ठिकाना नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है।

सवाल-जवाब

राम बेटी कौन हैं?
राम बेटी लखीमपुर खीरी के माया प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं, जो एक कैंटीन चलाती हैं।
उन्होंने कैंटीन कब शुरू की?
उन्होंने साल 2018 में कैंटीन का संचालन शुरू किया, जबकि समूह से 2017 में जुड़ी थीं।
राम बेटी रोजाना कितनी कमाई करती हैं?
वे रोजाना करीब 2500 रुपये की कमाई कर रही हैं।
कैंटीन कहां चल रही है?
उनकी कैंटीन इस समय विकास भवन परिसर में चल रही है।
कैंटीन में सबसे ज्यादा क्या पसंद किया जाता है?
यहां पनीर पराठा और आलू पराठा लोगों की पहली पसंद हैं, साथ ही चाय की बिक्री भी खूब होती है।
माया प्रेरणा समूह में कितनी महिलाएं हैं?
इस समूह में कुल 11 महिलाएं शामिल हैं, जो अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालती हैं।
यह समूह किस योजना के तहत बना है?
यह समूह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत गठित किया गया है।
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