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लखीमपुर खीरी में उद्यान विभाग की योजना बदल रही किसानों की जिंदगी, मधुमक्खी पालन से हो रही जबरदस्त कमाईसक्सेस स्टोरी
3 घंटे पहले· 2

लखीमपुर खीरी में उद्यान विभाग की योजना बदल रही किसानों की जिंदगी, मधुमक्खी पालन से हो रही जबरदस्त कमाई

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में उद्यान विभाग की 'पहले आओ, पहले पाओ' योजना के तहत किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। रीता देवी, कपिल वर्मा, धरमू और शिवम समेत कई किसान इस अवसर का फायदा उठाकर शहद उत्पादन से अच्छी आमदनी कमा रहे हैं।

Amit PatelAmit PatelBusiness Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में परंपरागत खेती के साथ-साथ एक नई कमाई की कहानी लिखी जा रही है। उद्यान विभाग की 'पहले आओ, पहले पाओ' योजना ने किसानों को मधुमक्खी पालन की राह दिखाई है और इस राह पर चलने वालों की जिंदगी तेजी से बदल रही है। ऑनलाइन आवेदन करने पर चुने गए किसानों को 40 से 50 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान मिलता है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी बिना बड़े खर्च के यह काम शुरू कर पा रहे हैं।

कम खर्च में बड़ा मुनाफा, जानें इस कारोबार की खासियत

मधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसके लिए न ज्यादा जमीन चाहिए, न भारी पूंजी और न ज्यादा वक्त। कुछ बक्सों से शुरुआत करके धीरे-धीरे कारोबार को बड़ा किया जा सकता है। इसके साथ ही मधुमक्खियां खेतों में परागण का काम भी करती हैं, जिससे फसलों की पैदावार खुद-ब-खुद बढ़ जाती है। एक बॉक्स से सालभर में करीब 30 से 35 किलो शुद्ध शहद निकाला जा सकता है। बाजार में शुद्ध शहद की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। शहद के अलावा मधुमक्खी पालन से मोम, रॉयल जेली और परागकण भी मिलते हैं, जिनकी बाजार में भी अच्छी कीमत होती है।

रीता देवी: 20 बॉक्स से चमकी किस्मत

खीरी जिले की रीता देवी उन किसानों में शामिल हैं जिन्होंने उद्यान विभाग की इस योजना का फायदा सबसे पहले उठाया। विभाग की ओर से उन्हें 20 बॉक्स मिले हैं और इनसे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है। वे बताती हैं कि बाजार में शुद्ध शहद की बढ़ती मांग की वजह से हजारों रुपये की कमाई आसानी से हो जाती है। इस वक्त लीची का सीजन चल रहा है, जिस कारण मधुमक्खियां लीची के पेड़ों पर बैठकर खूब शहद इकट्ठा कर रही हैं।

कपिल वर्मा: पढ़ाई के साथ-साथ 100 बॉक्स का कारोबार

खीरी जनपद के युवा कपिल वर्मा पिछले करीब 3 वर्षों से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। खास बात यह है कि वे अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं और साथ में यह कारोबार भी बखूबी संभाल रहे हैं। अभी उनके पास करीब 100 बॉक्स हैं। कपिल बताते हैं कि इस काम के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं पड़ती, बक्सों को खेत के किसी भी किनारे रखा जा सकता है। एक बॉक्स से औसतन 30 से 35 किलो शुद्ध शहद मिलता है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।

धरमू: कल्हौरी गांव में बदली तस्वीर

खीरी जनपद के कल्हौरी गांव के धरमू भी इसी योजना के लाभार्थी हैं। फिलहाल उनके पास करीब 20 बॉक्स हैं। उद्यान विभाग की एक अहम खासियत यह है कि वह बॉक्स देने से पहले किसानों को प्रशिक्षण देता है, ताकि वे मधुमक्खी पालन सही तरीके से कर सकें और अपनी आय दोगुनी कर सकें।

शिवम: 6 साल के तजुर्बे और 100 बॉक्स की ताकत

गोला तहसील क्षेत्र के परसादपुर गांव के शिवम जिले के सबसे अनुभवी मधुमक्खी पालकों में से एक हैं। वे पिछले करीब 6 वर्षों से यह काम कर रहे हैं और उनके पास करीब 100 बॉक्स हैं। शिवम बताते हैं कि स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने शहद की मांग और कीमत दोनों को ऊपर उठाया है। लोग अब चीनी की जगह प्राकृतिक शहद को तरजीह दे रहे हैं और आयुर्वेद तथा घरेलू उपचारों में भी शहद की खास अहमियत है, इसलिए बाजार में शुद्ध शहद अच्छे दामों पर बिकता है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि बरसात के मौसम में इस काम में थोड़ी दिक्कत जरूर आती है।

ऑनलाइन आवेदन और 'पहले आओ, पहले पाओ' का फॉर्मूला

जिला उद्यान प्रभारी लखीमपुर मृत्युंजय सिंह ने बताया कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। इस योजना में आवेदन ऑनलाइन होता है और चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया जाता है। चुने गए किसानों को 40 से 50 प्रतिशत अनुदान के साथ मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि वे इस काम में सफल हों और अपनी कमाई बढ़ा सकें।

इसका आप पर असर

  • भारत में: देशभर में उद्यान विभाग की ऐसी सब्सिडी योजनाएं चलती हैं, इसलिए मधुमक्खी पालन में रुचि रखने वाले किसान अपने जिले के उद्यान विभाग से ऑनलाइन आवेदन करके 40 से 50 प्रतिशत अनुदान पा सकते हैं।
  • लखीमपुर खीरी में: जिले के किसानों के लिए यह अभी एक ठोस मौका है, लेकिन 'पहले आओ, पहले पाओ' की शर्त के चलते जल्दी आवेदन करना जरूरी है वरना जगह भर सकती है।

प्रेरणा और सीख

लखीमपुर खीरी के इन किसानों की कहानी बताती है कि सही योजना, सही वक्त और थोड़े से हौसले से जिंदगी को नई दिशा दी जा सकती है। उनकी यात्रा से पांच ठोस सीखें मिलती हैं:

  • छोटी शुरुआत ही असली शुरुआत है: रीता देवी और धरमू ने 20 बॉक्स से काम शुरू किया। सही वक्त या बड़े बजट का इंतजार करने की जरूरत नहीं, जो आज उपलब्ध है उससे ही कदम बढ़ाएं।
  • पढ़ाई और उद्यमिता साथ चल सकते हैं: कपिल वर्मा ने पढ़ाई जारी रखते हुए 100 बॉक्स का कारोबार खड़ा कर दिया। उनका उदाहरण बताता है कि जिंदगी को रोके बिना भी नया रास्ता अपनाया जा सकता है।
  • सरकारी सहायता को पहचानें और जल्दी लें: 40 से 50 प्रतिशत अनुदान ने किसानों की शुरुआती लागत आधी कर दी, लेकिन 'पहले आओ, पहले पाओ' की शर्त है। जागरूकता काफी नहीं, कदम उठाना जरूरी है।
  • पहले सीखो, फिर कमाओ: उद्यान विभाग का प्रशिक्षण लेकर काम शुरू करने से किसानों को सच्चा फायदा मिला। किसी भी नए काम में हुनर ही असली नींव होती है।
  • बाजार की दिशा पहचानें: शिवम ने 6 साल पहले भांप लिया था कि लोग प्राकृतिक शहद की तरफ बढ़ेंगे। बाजार का रुझान समझकर उसी दिशा में समय रहते कदम रखना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

सवाल-जवाब

'पहले आओ, पहले पाओ' योजना में मधुमक्खी पालन के लिए आवेदन कैसे करें?
इस योजना में ऑनलाइन आवेदन करना होता है और किसानों का चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होता है, इसलिए जल्द से जल्द आवेदन करना फायदेमंद है।
मधुमक्खी पालन शुरू करने पर कितना सरकारी अनुदान मिलता है?
उद्यान विभाग की ओर से किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए 40 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है।
एक मधुमक्खी बॉक्स से सालभर में कितना शहद निकल सकता है?
एक बॉक्स से सालभर में औसतन 30 से 35 किलो शुद्ध शहद प्राप्त किया जा सकता है।
क्या मधुमक्खी पालन शुरू करने से पहले ट्रेनिंग भी दी जाती है?
हां, उद्यान विभाग की ओर से बॉक्स देने से पहले किसानों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे यह काम सही तरीके से कर सकें।
शहद के अलावा मधुमक्खी पालन से और क्या उत्पाद मिलते हैं?
शहद के अलावा मधुमक्खी पालन से मोम, रॉयल जेली और परागकण भी मिलते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
लखीमपुर खीरी में इस योजना से किन किसानों को फायदा हुआ है?
रीता देवी, कपिल वर्मा, कल्हौरी गांव के धरमू और परसादपुर के शिवम जैसे किसान इस योजना से जुड़कर मधुमक्खी पालन से अच्छी कमाई कर रहे हैं।
क्या छोटे और सीमांत किसान भी मधुमक्खी पालन शुरू कर सकते हैं?
हां, मधुमक्खी पालन के लिए न ज्यादा जमीन चाहिए और न बड़ा निवेश, इसलिए छोटे और सीमांत किसान भी कुछ बक्सों के साथ यह काम आसानी से शुरू कर सकते हैं।
बरसात के मौसम में मधुमक्खी पालन पर क्या असर पड़ता है?
परसादपुर के शिवम के अनुसार बरसात के मौसम में मधुमक्खी पालन में थोड़ी दिक्कत होती है।
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