उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में परंपरागत खेती के साथ-साथ एक नई कमाई की कहानी लिखी जा रही है। उद्यान विभाग की 'पहले आओ, पहले पाओ' योजना ने किसानों को मधुमक्खी पालन की राह दिखाई है और इस राह पर चलने वालों की जिंदगी तेजी से बदल रही है। ऑनलाइन आवेदन करने पर चुने गए किसानों को 40 से 50 प्रतिशत तक का सरकारी अनुदान मिलता है, जिससे छोटे और सीमांत किसान भी बिना बड़े खर्च के यह काम शुरू कर पा रहे हैं।
कम खर्च में बड़ा मुनाफा, जानें इस कारोबार की खासियत
मधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसके लिए न ज्यादा जमीन चाहिए, न भारी पूंजी और न ज्यादा वक्त। कुछ बक्सों से शुरुआत करके धीरे-धीरे कारोबार को बड़ा किया जा सकता है। इसके साथ ही मधुमक्खियां खेतों में परागण का काम भी करती हैं, जिससे फसलों की पैदावार खुद-ब-खुद बढ़ जाती है। एक बॉक्स से सालभर में करीब 30 से 35 किलो शुद्ध शहद निकाला जा सकता है। बाजार में शुद्ध शहद की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए किसानों को अच्छे दाम मिल रहे हैं। शहद के अलावा मधुमक्खी पालन से मोम, रॉयल जेली और परागकण भी मिलते हैं, जिनकी बाजार में भी अच्छी कीमत होती है।
रीता देवी: 20 बॉक्स से चमकी किस्मत
खीरी जिले की रीता देवी उन किसानों में शामिल हैं जिन्होंने उद्यान विभाग की इस योजना का फायदा सबसे पहले उठाया। विभाग की ओर से उन्हें 20 बॉक्स मिले हैं और इनसे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है। वे बताती हैं कि बाजार में शुद्ध शहद की बढ़ती मांग की वजह से हजारों रुपये की कमाई आसानी से हो जाती है। इस वक्त लीची का सीजन चल रहा है, जिस कारण मधुमक्खियां लीची के पेड़ों पर बैठकर खूब शहद इकट्ठा कर रही हैं।
कपिल वर्मा: पढ़ाई के साथ-साथ 100 बॉक्स का कारोबार
खीरी जनपद के युवा कपिल वर्मा पिछले करीब 3 वर्षों से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। खास बात यह है कि वे अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं और साथ में यह कारोबार भी बखूबी संभाल रहे हैं। अभी उनके पास करीब 100 बॉक्स हैं। कपिल बताते हैं कि इस काम के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं पड़ती, बक्सों को खेत के किसी भी किनारे रखा जा सकता है। एक बॉक्स से औसतन 30 से 35 किलो शुद्ध शहद मिलता है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।
धरमू: कल्हौरी गांव में बदली तस्वीर
खीरी जनपद के कल्हौरी गांव के धरमू भी इसी योजना के लाभार्थी हैं। फिलहाल उनके पास करीब 20 बॉक्स हैं। उद्यान विभाग की एक अहम खासियत यह है कि वह बॉक्स देने से पहले किसानों को प्रशिक्षण देता है, ताकि वे मधुमक्खी पालन सही तरीके से कर सकें और अपनी आय दोगुनी कर सकें।
शिवम: 6 साल के तजुर्बे और 100 बॉक्स की ताकत
गोला तहसील क्षेत्र के परसादपुर गांव के शिवम जिले के सबसे अनुभवी मधुमक्खी पालकों में से एक हैं। वे पिछले करीब 6 वर्षों से यह काम कर रहे हैं और उनके पास करीब 100 बॉक्स हैं। शिवम बताते हैं कि स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता ने शहद की मांग और कीमत दोनों को ऊपर उठाया है। लोग अब चीनी की जगह प्राकृतिक शहद को तरजीह दे रहे हैं और आयुर्वेद तथा घरेलू उपचारों में भी शहद की खास अहमियत है, इसलिए बाजार में शुद्ध शहद अच्छे दामों पर बिकता है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि बरसात के मौसम में इस काम में थोड़ी दिक्कत जरूर आती है।
ऑनलाइन आवेदन और 'पहले आओ, पहले पाओ' का फॉर्मूला
जिला उद्यान प्रभारी लखीमपुर मृत्युंजय सिंह ने बताया कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। इस योजना में आवेदन ऑनलाइन होता है और चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया जाता है। चुने गए किसानों को 40 से 50 प्रतिशत अनुदान के साथ मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि वे इस काम में सफल हों और अपनी कमाई बढ़ा सकें।













