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₹5,000 की मशीन से लखीमपुर के जुबेर बने सफल कारोबारी, दो पहिया से गांव-गांव पहुंचा रहे मिठाससक्सेस स्टोरी
7 अग॰ 2026, 2:07 pm (83 दिन पहले)· 0

₹5,000 की मशीन से लखीमपुर के जुबेर बने सफल कारोबारी, दो पहिया से गांव-गांव पहुंचा रहे मिठास

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में जुबेर ने 5,000 रुपये की मशीन से कॉटन कैंडी का काम शुरू किया था। साइकिल से शुरुआत करने के बाद अब वे मोटरसाइकिल से गांव-गांव बिक्री कर रोजाना हजारों रुपये कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले में रहने वाले जुबेर की कहानी मेहनत और लगन की एक प्रेरणादायक मिसाल है। बेहद सीमित संसाधनों और कम पूंजी के साथ कॉटन कैंडी बेचने का काम शुरू करने वाले जुबेर आज अपने इलाके में एक सफल छोटे उद्यमी के रूप में जाने जाते हैं। शुरुआती दौर में साइकिल पर घर-घर जाकर चीनी की रूई या बुढ़िया के बाल बेचने वाले जुबेर अब मोटरसाइकिल के जरिए रोजाना गांव-गांव तक अपनी पहुंच बना चुके हैं। उनकी यह निरंतर मेहनत न केवल उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर रही है, बल्कि उन्हें हर दिन हजारों रुपये का बेहतरीन मुनाफा भी दिला रही है।

सीमित पूंजी से संघर्ष और पहला कदम

जुबेर की इस व्यावसायिक यात्रा की शुरुआत बिल्कुल आसान नहीं थी। शुरुआती दिनों में वित्तीय तंगी और सीमित पूंजी के कारण वे बड़े स्तर पर काम शुरू करने की स्थिति में नहीं थे। उन्होंने मात्र 5,000 रुपये की एक मशीन खरीदी और खुद ही कॉटन कैंडी तैयार करने लगे। हर सुबह कॉटन कैंडी की ताजा खेप तैयार कर वे अपनी साइकिल पर सवार होकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में निकल जाते थे।

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व्यवसाय की सफलता में स्वच्छता और स्वाद की अहम भूमिका रही। जुबेर ने शुरू से ही अपनी कॉटन कैंडी की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया। धीरे-धीरे लोगों के बीच उनकी मिठास की पहचान मजबूत होती गई। बच्चे ही नहीं, बल्कि गांव के बड़े-बुजुर्ग भी उनके नियमित ग्राहक बनने लगे। ग्राहकों के बढ़ते भरोसे ने जुबेर के हौसले को और बढ़ाया।

साइकिल से मोटरसाइकिल तक का विस्तार

जैसे-जैसे बिक्री बढ़ी, जुबेर ने अपने व्यवसाय को गति देने का निर्णय लिया। साइकिल की जगह उन्होंने मोटरसाइकिल का इस्तेमाल शुरू किया, जिससे समय की बचत के साथ-साथ दूर-दराज के कई अन्य गांवों तक पहुंचना आसान हो गया। मोटरसाइकिल के आ जाने से वे कम समय में अधिक स्थानों पर कॉटन कैंडी बेचने में सक्षम हो गए।

जुबेर अपने माल की बिक्री के लिए रणनीतिक स्थानों का चयन करते हैं। स्कूलों के आसपास, स्थानीय मेलों, उत्सवों और त्योहारों के दौरान उनकी कॉटन कैंडी की मांग काफी बढ़ जाती है। बच्चों की जेब और आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वे 2 रुपये से लेकर 20 रुपये तक के अलग-अलग पैकेट में बिक्री करते हैं। इससे हर वर्ग के बच्चे अपनी पसंद और बजट के अनुसार आसानी से खरीदारी कर पाते हैं।

कम लागत में बेहतर मुनाफा और भविष्य का लक्ष्य

कॉटन कैंडी का कारोबार एक ऐसा मॉडल है जिसमें लागत बेहद कम आती है और सही स्थान पर बिक्री होने पर अच्छा मुनाफा मिलता है। हालांकि जुबेर की दैनिक कमाई मौसम की स्थिति और मांग पर निर्भर करती है, लेकिन अनुकूल दिनों में वे रोजाना हजारों रुपये कमा लेते हैं। इस आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानजनक तरीके से कर रहे हैं और साथ ही व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए बचत भी कर रहे हैं।

जुबेर का सपना केवल खुद तक सीमित रहना नहीं है। वे आने वाले समय में अपने कॉटन कैंडी व्यवसाय को एक बड़ा और प्रतिष्ठित ब्रांड बनाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य है कि जैसे-जैसे उनका काम बढ़ेगा, वे स्थानीय स्तर पर अन्य बेरोजगार युवाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकेंगे।

सवाल-जवाब

जुबेर ने कॉटन कैंडी का कारोबार कितने रुपये से शुरू किया था?
जुबेर ने कॉटन कैंडी बनाने वाली 5,000 रुपये की मशीन खरीदकर इस कारोबार की शुरुआत की थी।
शुरुआत में जुबेर कॉटन कैंडी बेचने के लिए किस साधन का उपयोग करते थे?
शुरुआत में सीमित पूंजी होने के कारण वे साइकिल से आसपास के गांवों में कॉटन कैंडी बेचने जाते थे।
अब जुबेर कॉटन कैंडी की बिक्री के लिए किस वाहन का इस्तेमाल करते हैं?
अब वे मोटरसाइकिल का उपयोग करते हैं, जिससे कम समय में अधिक गांवों और दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच पाते हैं।
कॉटन कैंडी के पैकेट की कीमत कितनी रखी गई है?
बच्चों और ग्राहकों की आवश्यकता के अनुसार कॉटन कैंडी 2 रुपये से लेकर 20 रुपये तक की कीमत में बेची जाती है।
जुबेर की रोजाना की कमाई कितनी हो जाती है?
कमाई मौसम और बिक्री पर निर्भर करती है, लेकिन अच्छे दिनों में वे रोजाना हजारों रुपये तक कमा लेते हैं।
जुबेर का भविष्य को लेकर क्या सपना है?
वे अपने कॉटन कैंडी ब्रांड को एक अलग पहचान दिलाना चाहते हैं और आने वाले समय में अधिक लोगों को रोजगार देना चाहते हैं।
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